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Hindi News ›   India News ›   Some BJP leaders are not happy with Nitin Nabin becoming the president.

कानों देखी: नितिन नवीन क्या कर लेंगे, कैसे चतुराई से टाला गया संकट?

Fri, 23 Jan 2026 01:43 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Fri, 23 Jan 2026 01:43 PM IST
सार

भाजपा ने नितिन नवीन को अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है। भाजपा के इस फैसले का सभी कार्यकर्ताओं और मंत्रियों ने समर्थन किया। लेकिन भाजपा के कुछ नेताओं को नितिन के चुनाव में पीएम मोदी और  गृहमंत्री अमित शाह की चतुराई नजर आ रही है। 

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Some BJP leaders are not happy with Nitin Nabin becoming the president.
नितिन नवीन - फोटो : PTI

विस्तार

भाजपा के नव निर्वाचित अध्यक्ष नितिन नवीन ने जिम्मेदारी संभाल ली है। पद ग्रहण करने से पहले उन्होंने सभी बड़े नेताओं का आशीर्वाद लिया। इन सबके बीच उनका कुर्सी संभालना कुछ नेताओं को रास नहीं आया है। इस तरह के नेता नितिन नवीन उम्र और अनुभव को लेकर बातें कर रहे हैं। एक नेता जी नितिन नवीन के बारे में चर्चा पर इतना बिदक गए कि बोले वह क्या कर लेंगे? भाजपा के भीतर एक चर्चा यह भी है कि नितिन नवीन के बहाने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भाजपा अध्यक्ष पद को लेकर चले आ रहे संकट को बड़ी चतुराई से टाल दिया है। हालांकि दूसरे गुट की उम्मीद अभी भी कायम है।  

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अंतरिम बजट में ममता बनर्जी खेलेंगी ‘दांव’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 2 फरवरी को राज्य का अंतरिम बजट पेश करेंगी। इस बार के बजट पर चुनावी चुनौतियों को देखकर ममता बनर्जी का खास ध्यान है। वह युवा वर्ग को खास तौर पर ध्यान में रख सकती हैं। हालांकि भाजपा की अग्निमित्रा पॉल कहती हैं कि ममता बनर्जी अब चाहे जो कर लें। इस बार वह बंगाल का मिजाज भांपने में चूक गई हैं। ममता ने इस बार तृणमूल के दूसरे नेताओं को काफी अहम जिम्मेदारी दी है। उन्होंने पार्टी के नेताओं से भी बयान पर नियंत्रण रखने और सोच समझकर बोलने के लिए कहा है।  

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जदयू में शीत युद्ध का अंदाज ही निराला है

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जदयू के सुप्रीम लीडर हैं, लेकिन अब थोड़ा शांत रहते हैं। केन्द्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह कांटा सहित मछली को निगल जाने की राजनीति में पारंगत माने जाते हैं। वहीं, नीतीश कुमार के दूसरे वफादार भी हैं। कुछ हाशिए पर धकेल दिए हैं। उनमें मुख्य धारा में लौटने की छटपटाहट है। इस छटपटाहट के पीछे आगामी राज्यसभा चुनाव भी है। ऐसे में कई दौर का शीतयुद्ध चल रहा है। आरसीपी सिंह भी पार्टी में आने के लिए बेताब हैं। श्याम रजक ने यह कहकर मुश्किलें पैदा कर दी हैं कि आरसीपी पार्टी से गए ही कब थे? इधर दिल्ली में ललन सिंह की टीम ने केसी त्यागी का पत्ता काटने की कोशिश की है। हालांकि नीतीश कुमार राजनीति के चतुर खिलाड़ी हैं। बोलते नहीं। बस धीरे से काम कर देते हैं। ऐसे में सब समय की धार देख रहे हैं।

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असम में हिमंता का 80 से अधिक सीटें लाने का दावा 

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने केन्द्रीय भाजपा को भरोसा दिया है कि राज्य में पार्टी की 80 से अधिक सीटें आएंगी। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और भंवर जितेन्द्र सिंह की टीम इस बार बड़े दावे कर रही है। कांग्रेस के सांसद गौरव गगोई को कोच-राजबोंगशी, ताई-अहोम, चुटिया, मटक, मोरान और चाय जनतजातियों की नाराजगी से काफी उम्मीदें हैं। तृणमूल की एक राज्यसभा सांसद का कहना है कि सीएए-एनआरसी को लेकर जनता के एक बड़े वर्ग में बड़ी नाराजगी है। इन सबके बीच भाजपा के ही एक नेता ने अपनी पार्टी के रणनीतिकारों को हैरत में डाल दिया। उन्होंने साफ कहा कि बिस्वा सरमा जितने अच्छे नेता हैं, उससे बड़े शो-मैन। इसलिए सावधानी हटी तो दुर्घटना हटी।

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