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Tamil Nadu: दलित रसोइये को स्कूली बच्चों का खाना बनाने से रोका, तिरुपुर में एससी-एसटी एक्ट के तहत छह को सजा

Sat, 29 Nov 2025 12:23 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुपुर Published by: पवन पांडेय Updated Sat, 29 Nov 2025 12:23 PM IST
सार

तमिलनाडु में एक अदालत ने 2018 के एक मामले में छह लोगों को सजा सुनाई है और उनपर जुर्माना भी लगाया है। दरअसल, एक दलित महिला को स्कूली बच्चों का खाना बनाने से रोका गया था, इसी मामले में अदालत ने फैसला सुनाया है। यह फैसला बताता है कि जातिगत भेदभाव के खिलाफ कानून और न्याय व्यवस्था मजबूती से खड़ी है।

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Six sentenced for preventing Dalit cook from preparing food for school children in TN’s Tirupur
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : एआई

विस्तार

तमिलनाडु के तिरुपुर जिले में साल 2018 में सरकारी स्कूल की एक दलित महिला रसोइया को बच्चों के लिए मिड-डे मील बनाने से रोकने के मामले में एक विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में छह लोगों को दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा और 5,000 रुपये जुर्माना लगाया है।
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क्या था पूरा मामला?
थिरुमलाई गौंडनपालयम के सरकारी उच्च माध्यमिक स्कूल में 44 वर्षीय दलित महिला पप्पल को रसोइया के रूप में नियुक्त किया गया था। लेकिन कुछ स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने जातिगत आधार पर विरोध किया और उन्हें भोजन बनाने से रोक दिया। इस भेदभाव के खिलाफ तमिलनाडु अस्पृश्यता उन्मूलन मोर्चा ने प्रदर्शन किया। वहीं विरोध बढ़ने के बाद पप्पल का तबादला कर दिया गया। इसके बाद जुलाई 2018 में पप्पल की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर पुलिस ने एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम सहित अन्य धाराओं में 35 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया। पुलिस ने इनमें से आठ लोगों को गिरफ्तार किया था।
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छह पर जुर्माना और जेल, 25 बरी
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट एम. सुरेश ने जांच और गवाहों के आधार पर छह लोगों को दोषी पाया। दोषियों में पी. पलानीसामी गौंडर, एन. साक्षीवेल, आर. शन्मुगम, सी. वेलिंगिरी, ए. दुरईसामी, वी. सीतलक्ष्मी शामिल हैं। इन सभी को दो साल की कठोर कारावास और प्रत्येक को 5000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। फैसला सुनने के बाद सभी को कोयंबटूर सेंट्रल जेल भेज दिया गया। वहीं मामले में सबूत न मिलने की वजह से 25 लोगों को बरी कर दिया गया, जबकि सुनवाई के दौरान चार लोगों की मौत हो गई।

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पीड़िता की वकील की प्रतिक्रिया
पीड़िता की ओर से केस लड़ रहे वरिष्ठ अधिवक्ता पीपी मोहन ने कहा कि यह फैसला न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय पप्पल का ट्रांसफर कराने वाले बीडीओ और कुछ पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, तभी पीड़िता को पूरा न्याय मिलेगा।
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