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निर्मला सीतारमण को ट्विटर यूजर ने कहा 'स्वीटी', मंत्री के जवाब ने की बोलती बंद

Tue, 14 Jan 2020 09:01 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Tue, 14 Jan 2020 09:01 AM IST
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Sitharaman shut down man who address her sweetie in tweet and accused her of misquoting Vivekanand
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक ट्विटर यूजर ने स्वीटी कहकर संबोधित किया जिसका की उन्होंने बड़ी ही शालीनता से जवाब दिया। यूजर ने मंत्री पर स्वामी विवेकानंद के एक मशहूर कथन को गलत कोट करने का आरोप लगाया, जिसे केंद्रीय मंत्री ने विवेकानंद की जयंती के मौके पर ट्वीट किया था। 

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रविवार को 60 साल की सीतारमण ने स्वामी विवेकानंद की जयंती पर उनके एक कथन को ट्वीट किया, 'उठो, जागो और ज्यादा सपने मत देखो। यह सपनों की भूमि है, जहां कर्म हमारे विचारों से निकलर माला बुनते हैं। मजबूत बनो और सच्चाई का सामना करो। इसके साथ एक रहो! विचारों का अंत होने दो।' विवेकानंद के इस कथन का संदर्भ देते हुए सीतारमण ने 'द कंप्लीट वर्क्स ऑफ स्वामी विवेकानंद IV, pp 388-89' लिखा। 
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इस ट्वीट के जवाब में सुजॉय घोष नाम के ट्विटर यूजर ने मंत्री को यह बताने की कोशिश की कि उन्होंने सही कथन का प्रयोग नहीं किया है। यूजर ने लिखा, 'निर्मला सीतारमण ने यह कथन (कोट) कथा उपनिषद और स्वामी जी के कथा उपनिषद और स्वामीजी के 'उठो जागो' कथन से लिया है। स्वीटी ये 'अपने लक्ष्य तक पहुंचने तक नहीं रुको' है न की 'ज्यादा सपने मत देखो'। यह बजट 2020 नहीं है कि जिसके बारे में आप हमें चेतावनी दे रही हैं।'
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उठो, जागो और अपने लक्ष्य तक पहुंचने तक मत रुको एक नारा है जो कथा उपनिषद के एक श्लोक से प्रेरित है। इसे 19वीं शताब्दी के आखिर मे स्वामी विवेकानंद ने मशहूर कर दिया था। वित्त मंत्री ने घोष को जवाब देते हुए कहा कि खुशी है की आप रुचि ले रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि उन्होंने गलत कथन ट्वीट नहीं किया है। मंत्री के जवाब की सोशल मीडिया पर लोग तारीफ कर रहे हैं वहीं घोष की आलोचना हो रही है।


सीतारमण ने घोष को जवाब देते हुए लिखा, 'खुशी है कि आप रुचि ले रहे हैं। जहां तक उनके कोट करने की बात है, मैंने कहा कि ये 'द अवेकेन इंडिया' से है जो अगस्त 1898 में लिखा गया था। वैसे मैंने कथन के नीचे इसके संदर्भ का हवाला दिया था। अगर आपको ज्यादा रुचि है तो इसे अद्वैत आश्रम की तरफ से प्रकाशित किया गया है।'

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