प्रेम सिंह तमांग का सियासी सफर: अपने राजनीतिक गुरु से बगावत कर बनाई पार्टी, अब दूसरी बार सिक्किम की सत्ता में
पूर्व सीएम पवन कुमार चामलिंग को अपना राजनीतिक गुरु मानने वाले प्रेम सिंह तमांग ने चामलिंग के ही खिलाफ विरोध की आवाज को बुलंद किया था। इसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी बनाई और लगातार दूसरी बार बहुमत के साथ जीत हासिल की।
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सिक्किम के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग के नेतृत्व वाली सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) ने प्रचंड बहुमत के साथ जीत हासिल की है। सीएम तमांग ने खुद दो विधानसभा क्षेत्रों से जीत हासिल की है। कभी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) के संस्थापक और पूर्व सीएम पवन कुमार चामलिंग को अपना राजनीतिक गुरु मानने वाले तमांग ने एसडीएफ के खिलाफ ही विरोध की आवाज को बुलंद किया था। इसके बाद लगातार दो चुनावों में एसकेएम ने एसडीएफ को करारी शिकस्त देकर सत्ता का सिंहासन हासिल किया। प्रेम सिंह तमांग कौन हैं? उनका जन्म कब-कहां हुआ? उन्होंने कहां से शिक्षा हासिल की? उन्होंने कब राजनीति में कदम रखा? कैसे अपने राजनीतिक गुरु कहे जाने वाले पूर्व सीएम चामलिंग के खिलाफ विद्रोह कर वे सिक्किम के मुख्यमंत्री बने? विवाद में रहने के बाद भी उन्होंने कैसे मजबूत जनाधार हासिल किया? इन सब सवालों का जवाब आपको इस रिपोर्ट में मिलेगा।
राजनीति में आने से पहले सरकारी शिक्षक थे तमांग
प्रेम सिंह तमांग का जन्म 5 फरवरी 1968 को पश्चिम सिक्किम के सिंग्लिंग बस्टी में हुआ था। उनके पिता का नाम कालू सिंह तमांग और मां का नाम धन माया तमांग है। शुरुआती शिक्षा हासिल करने के बाद तमांग ने 1988 में दार्जिलिंग गवर्नमेंट कॉलेज से कला में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। राजनीति में आने से पहले तमांग सरकारी शिक्षक थे। हालांकि, शिक्षक की नौकरी के बदले उनकी सामाजिक कार्यो में अधिक रूचि रही। इसी वजह से उन्होंने बाद में सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) की राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू कर दिया और पार्टी के सदस्य बन गए। इसके बाद उन्होंने सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया और एसडीएफ के स्थाई सदस्य बन गए। चामलिंग, एसडीएफ के संस्थापक रहे पूर्व सीएम पवन कुमार चामलिंग को अपना राजनीतिक गुरु मानते थे।
पहली बार 1994 में सोरेंग चाकुंग सीट से हासिल की जीत
वर्ष 1994 में तमांग ने अपने जीवन का पहला विधानसभा चुनाव लड़ा। एसडीएफ के टिकट पर सोरेंग चाकुंग सीट से चुनाव लड़कर उन्होंने पहली जीत भी दर्ज की। 1994 से 1999 तक वे पशुपालन, चर्च और उद्योग विभाग के मंत्री रहे। 1999 के विधानसभा चुनाव में वे एक बार फिर से सोरेंग चाकुंग विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। वर्ष 1999 से लेकर 2004 तक उन्होंने राज्य के उद्योग और पशुपालन मंत्री के रूप में कार्य किया। दरअसल, उन्होंने एक बार फिर से चाकुंग निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार सतीश मोहन प्रधान को हराकर जीत दर्ज की। इसी के साथ वे राज्य के भवन एवं आवास विभाग के मंत्री बने। 2009 में प्रेम सिंह तमांग ने अपर बुर्तुक से चुनाव लड़ा और कांग्रेस प्रत्याशी अरुण कुमार राय को मात दी। चुनाव के तुरंत बाद उन्हें उद्योग विभाग का अध्यक्ष चुना गया हालांकि, उन्होंने अध्यक्ष के रूप में काम नहीं किया।
ऐसे हुआ था एसडीएफ से मनभेद
दरअसल, 2009 में सिक्किम के कर्मचारियों द्वारा रोलू पिकनिक कार्यक्रम के बाद तमांग और एसडीएफ के बीच मनभेद हो गया। इसकी वजह यह थी कि सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इस घटना के बाद से एसडीएफ से तमांग की दूरियां बढ़ने लगीं थीं। इसके बाद वह पार्टी के बागी विधायकों की श्रेणी में शामिल हो गए। समय के साथ-साथ वे प्रत्यक्ष रूप से एसडीएफ का विरोध करने लगे थे। इसके बाद वर्ष 2013 में उन्होंने आधिकारिक रूप से एसडीएफ से पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया।
2013 में हुआ सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा का गठन
वर्ष 2013 में एसडीएफ से प्रेम सिंह तमांग के इस्तीफे के बाद राज्य में सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) नाम से नई पार्टी अस्तित्व में आई। तमांग ने पार्टी का गठन किया और 2014 के विधानसभा चुनाव में ताल ठोक दी। इस दौरान एसकेएम ने राज्य की 32 में से 10 सीटों पर जीत दर्ज की। 43 प्रतिशत मतदान प्रतिशत के साथ राज्य में एसकेएम के लिए अच्छी शुरुआत थी। कह सकते हैं कि यह समय चामलिंग के नेतृत्व वाली एसडीएफ के लिए एक चुनौती की तरह था। 2014 के चुनाव में एसडीएफ ने 22 सीटें जीतीं और पवन कुमार चामलिंग लगातार पांचवीं बार सीएम बने थे।
जब प्रेम सिंह तमांग पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप
वर्ष 2014, जब सिक्किम में पहली बार चुनाव लड़ रही एसकेएम ने विधानसभा चुनाव में 10 सीटों पर जीत दर्ज की, इसके ठीक बाद तमांग पर सरकारी धन की हेराफेरी का आरोप लगा। आरोप था कि सिक्किम सरकार में पूर्व मंत्री रहते हुए तमांग ने सरकारी खजाने का दुरुपयोग किया। अदालत ने भी इस मामले में तमांग को दोषी करार दिया और तमांग को अपनी विधायकी गंवानी पड़ी। इसके बाद 2019 के विधानसभा चुनाव में कुछ विचित्र हुआ।
जब सत्ताधीश बनी एसकेएम, चुनाव न लड़ने के बाद भी सीएम बने तमांग
समय बदला और इसके बाद वर्ष 2019 में राज्य में पहली बार तमांग के नेतृत्व वाली एसकेएम ने राज्य में पहली बार जीत दर्ज की। ये वो पल था जब, 24 वर्ष, पांच महीने और 15 दिन तक काबिज रही पवन कुमार चामलिंग की सरकार को सत्ता से बाहर होना पड़ा। एसकेएम 17 सीटों पर जीत हासिल कर सत्ता पर काबिज हुई। राज्य में पवन कुमार चामलिंग सरकार का अस्त हुआ और प्रेम सिंह तमांग सरकार का उदय हो गया। खास बात यह है कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे तमांग ने इस बार चुनाव नहीं लड़ा। इसके बावजूद, उन्होंने सिक्किम के छठे मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। सीएम बनने के बाद तमांग ने पोकलोक-कामरांग विधानसभा क्षेत्र से उपचुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
इस बार यानी वर्ष 2024 में तमांग ने अपने जनाधार पर फिर एक बार मुहर लगा दी और जिन दो सीटों से उन्होंने चुनाव लड़ा, वहां उन्हें जीत हासिल हुई। सोरेंग-चाकुंग और रेनॉक सीटों पर जीत दर्ज कर तमांग ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि जनता के बीच उनकी मजबूत पकड़ है।