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Karnataka: पांच बड़ी वजहों से सिद्धरमैया बने मुख्यमंत्री, शिवकुमार रह गए पीछे
Fri, 19 May 2023 05:54 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 19 May 2023 05:54 AM IST
सार
कर्नाटक में कांग्रेस की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले डीके शिवकुमार पर सिद्धरमैया पांच वजहों से भारी पड़े। जानिए वो वजहें...
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खरगे के साथ डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया।
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद को लेकर रस्साकशी में सिद्धरमैया विजेता बने हैं। 2006 में जेडीएस से कांग्रेस में आए सिद्धरमैया नौवीं बार विधायक बने हैं। जबकि, डीके शिवकुमार छात्र जीवन से कांग्रेसी रहे हैं। बहरहाल, कर्नाटक में कांग्रेस की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले डीके शिवकुमार पर सिद्धरमैया पांच वजहों से भारी पड़े। जानिए वो वजहें...
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अनुभव
सिद्धरमैया के पास सरकार चलाने का व्यापक अनुभव है। कर्नाटक में बीते चार दशक में 2013 से 2018 के दौरान वे पहले मुख्यमंत्री रहे हैं, जो अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा कर पाए। सरकार चलाने के साथ ही सिद्धरमैया के पास जाति, संप्रदाय और वर्गों में बंटे कर्नाटक में सरकार के हितों को साधने का अनुभव भी है।
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संतुलन
कुर्बा गौडा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले सिद्धरमैया ने दलित, पिछड़े और मुस्लिमों में खासे लोकप्रिय हैं। यह अनोखा संतुलन उन्हें डीके शिवकुमार से रेस में आगे कर देता है। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को कर्नाटक में विधानसभा चुनावों की तरह कामयाबी पाने के लिए सिद्धरमैया के संतुलित समीकरणों की जरूरत होगी।
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साफ छवि
सिद्धरमैया पर व्यक्तिगत रूप से भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं है। यह उनके व्यक्तित्व का सबसे मजबूत पक्ष है, जिसे कांग्रेस आलाकमान आगामी लोकसभा चुनावों के चलते नजरंदाज करने की स्थिति में नहीं है। दूसरी तरफ डीके शिवकुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग जैसे केस दर्ज हैं।
लोकप्रिय
कर्नाटक में सिद्धरमैया का बड़ा प्रशंसक वर्ग है। पिछले वर्ष उनके जन्मदिन पर 16 लाख प्रशंसक जुटे थे। चुनाव प्रचार और भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी उन्होंने अपनी लोकप्रियता की ताकत कांग्रेस आलाकमान के सामने बखूबी प्रदर्शित की थी। लोकसभा चुनाव कांग्रेस सिद्धरमैया के प्रशंसकों को नाराज करने का जोखिम नहीं लेना चाहती।
विधायकों के करीबी
सिद्धरमैया आलाकमान को बड़ी तादाद में अपने खेमे के विधायकों को टिकट दिला पाए। किस्मत कहें या कारीगरी सिद्धरमैया के खेमे के ज्यादा विधायक जीते हैं। विधायक भी आलाकमान को बता चुके हैं कि वे सिद्धरमैया को ही सीएम बनना चाहते हैं। 2024 के चुनावों को ध्यान में रखकर पार्टी में फूट न पड़े इस वजह से सिद्धरमैया का पलड़ा भारी रहा।
किसान परिवार में जन्मे, अहिंदा से चमके
12 अगस्त, 1948 को मैसूर जिले के वरुणा होब्ली के एक गांव में किसान परिवार में पैदा हुए सिद्धारमैया पेशे से वकील हैं। वकालत के दौरान ही एक वकील के कहने पर उन्होंने 1983 में पहली बार भारतीय लोक दल के टिकट पर चामुंडेश्वरी से चुनाव लड़ा और जीता। यह हर किसी के लिए हैरत की बात थी। हालांकि, उन्हें असल ख्याति अहिंदा सम्मेलन से मिली।
क्या है अहिंदा
यह एक शब्द संक्षेप है। इस शब्द को कर्नाटक के पहले मुख्यमंत्री देवराज उर्स ने इजाद किया था। अहिंदा का मतलब अल्पसंख्यातरु (अल्पसंख्यक) हिंदुलिदावारू (पिछड़ा वर्ग) और दलितारू (दलित) है। कर्नाटक में राजनीति के शीर्ष पर बने रहने के लिए इन तीनों वर्गों पर पकड़ रखना बेहद जरूरी है। माना जाता है कि उर्स के बाद सिद्धारमैया ने ही अहिंदा को साधा है।
निराश क्यों होना चाहिए, लंबा रास्ता तय करना है : शिवकुमार
बंगलूरू। कांग्रेस के संकटमोचक कहे जाने वाले डीके शिवकुमार एक बार फिर कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनते-बनते चूक गए। 61 वर्षीय शिवकुमार आठवीं बार विधायक चुने गए हैं। 2013 में भी सीएम पद पर दावा ठोका था, लेकिन सिद्धरमैया से वह उस वक्त भी पीछे रह गए थे। शिवकुमार ने कहा, कहा कि निराश होने की कोई वजह नहीं है और अभी तो लंबा रास्ता तय करना बाकी है।
दलित नेता को डिप्टी सीएम नहीं बनाया तो मुश्किल हो सकती है ः परमेश्वर
वरिष्ठ कांग्रेस नेता जी परमेश्वर ने केंद्रीय नेतृत्व को आगाह किया कि यदि किसी दलित नेता को उपमुख्यमंत्री न बनाया गया तो प्रतिकूल प्रतिक्रिया हो सकती है और इससे पार्टी को आगे चलकर मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। दलित नेता परमेश्वर राज्य में कांग्रेस जदएस सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे थे।
सिद्धरमैया के सामने मंत्रिमंडल गठन, ‘गारंटियां’ बड़ी चुनौतियां
कर्नाटक के मुख्यमंत्री का पदभार संभालने जा रहे कांग्रेस नेता सिद्धरमैया के सामने मंत्रिमंडल का गठन, विभागों का आवंटन और चुनाव घोषणापत्र में की गई ‘गारंटियां’ का अहम बड़ी चुनौतियां होंगी। शपथ लेने के बाद सिद्धरमैया के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी समुदायों, क्षेत्रों, गुटों और विधायकों की पुरानी तथा नई पीढ़ियों का प्रतिनिधित्व करने के बीच सही संयोजन के साथ एक मंत्रिमंडल गठित करना है।
224 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस ने 135 सीटों पर जीत हासिल की है जबकि सरकार में केवल 34 विधायक ही मंत्री बनाए जा सकते हैं। ऐसे में मंत्री पद के आकांक्षी विधायकों को संतुष्ट करना बड़ी चुनौती होगी। मंत्रिमंडल में विभिन्न समुदायों के नेताओं को जगह देना भी एक बड़ी चुनौती बनेगी।
अंत में भ्रष्टाचार जीता : भाजपा
भाजपा ने कांग्रेस पर उपक्षेत्रीय आकांक्षाओं और प्रमुख समुदायों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। साथ ही पार्टी ने कहा कि आखिर अंत में भ्रष्टाचार की जीत हुई।
भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने दावा किया कि पहली बार, कर्नाटक में ऐसी सरकार होगी जो न तो उपक्षेत्रीय आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है और न ही प्रमुख समुदायों का।