कृषि विधेयकों पर सरकार के खिलाफ अकाली दल, हरसिमरत कौर बादल ने मंत्रिमंडल से दिया इस्तीफा
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कृषि संबंधी तीन अध्यादेशों को कानूनी जामा पहनाने संबंधी विधेयकों पर सत्तारूढ़ राजग में फूट पड़ गई है। विधेयक से जुड़े प्रावधानों पर नाराजगी जताते हुए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने बृहस्पतिवार को मोदी मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले लोकसभा में विधेयकों पर चर्चा के दौरान पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने उनके इस्तीफे की घोषणा की थी। हालांकि उन्होंने कहा कि पार्टी एनडीए सरकार को समर्थन जारी रखेगी।
विधेयकों के खिलाफ जारी विरोध सडक़ के बाद संसद और सरकार तक पहुंच गया। हरसिमरत ने इस्तीफे की जानकारी देते हुए ट्वीट किया, मैंने किसान विरोधी अध्यादेशों और विधेयकों के खिलाफ कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। किसानों की बहन और बेटी बनकर उनके साथ खड़े रहने पर मुझे गर्व है। इससे पहले सुखबीर बादल ने कहा, इन विधेयकों का पंजाब-हरियाणा सहित उत्तर भारत के 20 लाख किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। ये कृषि क्षेत्र में पंजाब सरकार की 50 साल की मेहनत तबाह कर देंगे। इसके प्रावधान किसान विरोधी हैं। पार्टी कोटे की मंत्री हरसिमरत कौर ने इससे जुड़े अध्यादेशों का मंत्रिमंडल की बैठक में विरोध किया था। विरोध के बावजूद बिलों को लोकसभा में पेश किया गया। इसलिए वह मंत्रिमंडल से इस्तीफा देंगी। मंगलवार को भी बादल ने इन बिलोंं का लोकसभा में तीखा विरोध करते हुए वापस लेने की मांग की थी।
भाजपा और एनडीए के सबसे पुराने सहयोगी अकाली दल से मोदी सरकार में केवल हरसिमरत ही शामिल थीं। पंजाब-हरियाणा के किसान कई दिनों से विधेयकों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार ने सोमवार को ही लोकसभा में आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन व सरलीकरण) विधेयक तथा कृषक (सशक्तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन व कृषि सेवा पर करार विधेयक पेश किया था।
देर शाम तक हरसिमरत कौर ने खुद ट्वीट कर अपने इस्तीफे की जानकारी दी। उन्होंने लिखा, 'मैंने किसान विरोधी अध्यादेशों और कानून के विरोध में केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है। किसानों के साथ उनकी बेटी और बहन के रूप में खड़े होने का गर्व है।'
I have resigned from Union Cabinet in protest against anti-farmer ordinances and legislation. Proud to stand with farmers as their daughter & sister.
— Harsimrat Kaur Badal (@HarsimratBadal_) September 17, 2020
किसान और अकाली दल एक दूसरे के पर्याय
हरसिमरत कौर ने पीएम मोदी को भेजे अपने इस्तीफे में लिखा, 'किसान और अकाली दल एक दूसरे के पर्याय हैं क्योंकि पार्टी सिख धर्म के संस्थापक श्री गुरु नानक देव के समतावादी दृष्टिकोण से प्रेरित है, जिन्होंने करतारपुर साहिब में अपने खेतों में एक विनम्र किसान के रूप में काम करते हुए लगभग 20 साल बिताए थे। यह दिखाने के लिए पर्याप्त है कि किसानों के लिए अकाली क्या है।'
Farmer & SAD are synonymous as party is inspired by egalitarian vision of the founder of Sikh faith, Shri Guru Nanak Dev who spent nearly 20 years working in his fields at Kartarpur Sahib as a humble farmer. It's enough to show what farmers mean to SAD: Harsimrat Kaur Badal to PM https://t.co/uVbIeA0Q5n pic.twitter.com/OGqIeiwj3M
— ANI (@ANI) September 17, 2020
एमएसपी पर विपक्ष फैला रहा भ्रम : तोमर
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, विपक्ष एमएसपी पर भ्रम फैला रहा है। एमएसपी था, है और आगे भी रहेगा। सरकार न तो राज्यों के अधिकारों में दखल दे रही है और न ये किसानों के खिलाफ हैं। किसानों को मंडियों के भरोसे नहीं छोड़ सकते। उपज की सही कीमत के लिए प्रतिस्पर्धा जरूरी है। कानून बनने पर निजी निवेश गांव तक पहुंचेगा। उपज कहीं भी बेचने की आजादी होगी। किसानों को सही कीमत मिलेगी।
राहुल गांधी ने पीएम को घेरा
राहुल गांधी ने कहा कि मोदी जी ने किसानों की आय दुगनी करने का वादा किया था, लेकिन मोदी सरकार के काले कानून किसान-खेतिहर मजदूर का आर्थिक शोषण करने के लिए बनाए जा रहे हैं। ये जमींदारी का नया रूप है और मोदी जी के कुछ मित्र नए भारत के जमींदार होंगे। कृषि मंडी हटी, देश की खाद्य सुरक्षा मिटी।
कांंग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला की टिप्पणी
पार्टी महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने कहा मोदी जी ऐसे अहंकारी शासक हैं जिन्होंने अपने 70वें जन्मदिन पर काला कानून बना किसान-मजदूर की आजीविका छीन ली। खेत खलिहान पर किए इस क्रूर आक्रमण के लिए देश भाजपा की सात पुश्तों को माफ नहींं करेगा। कृषि अध्यादेश पर अपनी प्रतिक्रिया में रणदीप सुरजेवाला के बोल प्रधानमंत्री को लेकर इस कदर बिगड़े कि उन्होंने कहा कि अबकी बार- बंदर के हाथ में उस्तरा सरकार। उन्होंने कहा कि किसान की आय कब तक दुगनी होगी पता नहींं। कोरोना से कृषक आय पर क्या असर पड़ा पता नहीं। प्रवासी मजदूर मरे पता नहींं ये हैं मोदी सरकार के संसद में जवाब। इसीलिए तो देश कैसेे चलाते हैं पता नहींं।
कांग्रेस ने कहा था-इस्तीफा दें हरसिमरत
अकाली दल दावा करता है कि कैबिनेट बैठक मेंं हरसिमरत ने अध्यादेश का विरोध किया था। जबकि कैबिनेट मिनट्स में इसका उल्लेख नहीं है। हरसिमरत विरोध में हैं, तो इस्तीफा दें। एमएसपी खत्म नहीं हो रही तो, तीनों बिलों में इसका उल्लेख क्यों नहीं है? - रवनीत सिंह बिट्टू, सांसद, कांग्रेस
किसान इसलिए हैं विरोध में
- आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक के जरिये अनाज, दालों, तिलहन, आलू और प्याज के दाम बाजार के मुताबिक हो जाएंगे। किसानों का आरोप है कि इससे बिचौलियों और बड़े उद्योगपतियों का फायदा होगा।
- धीरे-धीरे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खत्म हो जाएगा। राज्यों की मंडी धीरे-धीरे अर्थ खो देगी। पंजाब-हरियाणा के किसानोंं को एमएसपी से व्यापक फायदा मिलता है।
वहीं, इसे लेकर भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने अपनी सरकार पर ही सवाल खड़े किए हैं। स्वामी ने एक ट्वीट में कहा, 'लोकसभा में बहुमत होने के बावजूद एक सरकार एनडीए नामक गठबंधन कैसे बना सकती है, लेकिन अपने किसानों से संबंधित मामले पर विधेयक को संसद में पेश करने से पहले अपने सहयोगियों से चर्चा नहीं करती है। विधेयक को वापस लीजिए और फिर एक सर्वसम्मत विधेयक के लिए सहयोगियों के साथ बात करें।'
How can a Government despite being in majority in Lok Sabha yet forms a coalition called NDA, but does not consult its allies before introducing a Bill in Parliament on a subject concerning farmers? Withdraw the Bill and then negotiate with allies for a consensus Bill.
— Subramanian Swamy (@Swamy39) September 17, 2020
दरअसल केंद्र सरकार ने जून में कृषि से संबंधित तीन अध्यादेश जारी किए थे, जिसका किसानों ने विरोध किया था। लेकिन अब एक बार फिर से सरकार ने मानसून सत्र के दौरान सदन में इन्हें विधेयक के तौर पर रखा और मंगलवार को इनमें से एक विधेयक को पास करवा दिया। केंद्र सरकार के इन तीन प्रमुख विधेयकों का पंजाब और हरियाणा के किसानों द्वारा जमकर विरोध हो रहा है।
उधर विपक्षी पार्टियों ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और इसे किसान विरोधी बताकर विरोध कर रहे हैं। राज्य सरकारों ने इसे संघी ढांचे के खिलाफ बताया है और इसे वापस लेने के लिए कहा है।
वहीं एनडीए के पुरानी घटक दल और केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल शिरोमणि अकाली दल ने अपने सदस्यों से सरकार के इन विधेयकों के खिलाफ सदन में वोट करने को कहा है। अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने सदन में इस पर चर्चा में कहा था कि इस कानून को लेकर पंजाब के किसानों, आढ़तियों और व्यापारियों के बीच बहुत शंकाएं हैं। सरकार को इस विधेयक और अध्यादेश को वापस लेना चाहिए।
अकाली दल के अध्यक्ष ने कहा कि आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक सहित तीन विधेयक, अकेले पंजाब में 20 लाख किसानों और 15-20 लाख खेत मजदूरों को प्रभावित करने वाले हैं। बादल ने कहा कि देश के 2.5 प्रतिशत भूस्खलन वाले राज्य देश के लिए लगभग 50 प्रतिशत अनाज का उत्पादन करते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब का मंडी सिस्टम 12,000 गांवों में 1,900 सेटअप के नेटवर्क के साथ दुनिया में सबसे अच्छा है।
केंद्र सरकार संसद के मौजूदा मानसून सत्र में किसानों से संबंधित कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा प्रदान करना) विधेयक, 2020, कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020 लेकर आई है। इसमें आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक को मंगलवार को लोकसभा से पारित कर दिया गया।