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नया खतरा: ड्रायर से हवा में उड़ रहे हर साल 3,500 टन अदृश्य रेशे, वैज्ञानिकों ने चेताया
Sat, 25 Oct 2025 08:07 AM IST
लव गौर
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: लव गौर
Updated Sat, 25 Oct 2025 08:07 AM IST
सार
अब तक यह माना जाता था कि वॉशिंग मशीन से निकलने वाले माइक्रोफाइबर पानी में मिलकर नदियों और समुद्रों को प्रदूषित करते हैं, लेकिन नई खोज ने दिखाया है कि ड्रायर भी हवा में खतरनाक मात्रा में ये सूक्ष्म रेशे फैला रहे हैं। घरों में अधिकांश टंबल ड्रायर सामान्य लिंट फिल्टर से लैस होते हैं, पर उनमें माइक्रोफाइबर फिल्टर नहीं होता।
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ड्रायर से हवा में उड़ रहे हर साल 3,500 टन अदृश्य रेशे
- फोटो : adobe stock
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विस्तार
घर के कपड़े सुखाने वाले ड्रायर से निकलने वाली बारीक धूल असल में सूक्ष्म रेशे अब वैश्विक प्रदूषण का नया स्रोत बन गए हैं। डेजर्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (डीआरआई) और कीप टाहो ब्लू के वैज्ञानिकों का ताज शोध बताता है कि सिर्फ अमेरिका में ही हर साल 3,543 मीट्रिक टन माइक्रोफाइबर हवा में छोड़े जाते हैं। यानी लगभग 30 स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के वजन के बराबर। ये रेशे रसायनों और रंगों से भरे होते हैं जो इंसान, जानवर और पर्यावरण तीनों के लिए खतरनाक साबित हो रहे हैं।
अब तक यह माना जाता था कि वॉशिंग मशीन से निकलने वाले माइक्रोफाइबर पानी में मिलकर नदियों और समुद्रों को प्रदूषित करते हैं, लेकिन नई खोज ने दिखाया है कि ड्रायर भी हवा में खतरनाक मात्रा में ये सूक्ष्म रेशे फैला रहे हैं। घरों में अधिकांश टंबल ड्रायर सामान्य लिंट फिल्टर से लैस होते हैं, पर उनमें माइक्रोफाइबर फिल्टर नहीं होता।
नतीजतन जब गर्म हवा से कपड़े सुखाए जाते हैं तो अदृश्य रेशे वातावरण में उड़ जाते हैं और सांस के साथ शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इन सूक्ष्म रेशों में मौजूद रसायन और रंग मानव स्वास्थ्य पर गहरा असर डालते हैं। पीएफएएस जैसे रसायन प्रजनन क्षमता और हार्मोनल संतुलन को बिगाते हैं।
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इसके अलावा फॉर्मेल्डीहाइड जैसे तत्व त्वचा, श्वसन तंत्र और विकास प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। हवा में उड़ने के बाद ये रेशे मिट्टी, पानी और यहां तक कि खाद्य श्रृंखला में भी प्रवेश कर जाते हैं।
उपाय: हवा में ही सुखाएं कपड़े
रिसर्च यह चेतावनी देता है कि हमें अपने घरों के उपकरणों के पर्यावरणीय प्रभाव को अब गंभीरता से समझना होगा। कुछ सरल उपाय बड़ा फर्क ला सकते हैं। जैसे माइक्रोफाइबर फिल्टर लगाएं। ड्रायर वेंट पर अतिरिक्त फिल्टर सूक्ष्म रेशों को रोक सकता है। कपड़े हवा में ही सुखाएं। जब संभव हो प्राकृतिक हवा में कपड़े सुखाना सबसे पर्यावरण-मित्र तरीका है। कम तापमान पर सुखाएं, क्योंकि इससे कपड़ों की टूट-फूट और रेशों का निकलना घटता है।साथ ही सॉफ्ट और टिकाऊ फैब्रिक चुनें। कम घिसने वाले कपड़े कम रेशे छोड़ते हैं।
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अब तक यह माना जाता था कि वॉशिंग मशीन से निकलने वाले माइक्रोफाइबर पानी में मिलकर नदियों और समुद्रों को प्रदूषित करते हैं, लेकिन नई खोज ने दिखाया है कि ड्रायर भी हवा में खतरनाक मात्रा में ये सूक्ष्म रेशे फैला रहे हैं। घरों में अधिकांश टंबल ड्रायर सामान्य लिंट फिल्टर से लैस होते हैं, पर उनमें माइक्रोफाइबर फिल्टर नहीं होता।
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नतीजतन जब गर्म हवा से कपड़े सुखाए जाते हैं तो अदृश्य रेशे वातावरण में उड़ जाते हैं और सांस के साथ शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इन सूक्ष्म रेशों में मौजूद रसायन और रंग मानव स्वास्थ्य पर गहरा असर डालते हैं। पीएफएएस जैसे रसायन प्रजनन क्षमता और हार्मोनल संतुलन को बिगाते हैं।
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इसके अलावा फॉर्मेल्डीहाइड जैसे तत्व त्वचा, श्वसन तंत्र और विकास प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। हवा में उड़ने के बाद ये रेशे मिट्टी, पानी और यहां तक कि खाद्य श्रृंखला में भी प्रवेश कर जाते हैं।
उपाय: हवा में ही सुखाएं कपड़े
रिसर्च यह चेतावनी देता है कि हमें अपने घरों के उपकरणों के पर्यावरणीय प्रभाव को अब गंभीरता से समझना होगा। कुछ सरल उपाय बड़ा फर्क ला सकते हैं। जैसे माइक्रोफाइबर फिल्टर लगाएं। ड्रायर वेंट पर अतिरिक्त फिल्टर सूक्ष्म रेशों को रोक सकता है। कपड़े हवा में ही सुखाएं। जब संभव हो प्राकृतिक हवा में कपड़े सुखाना सबसे पर्यावरण-मित्र तरीका है। कम तापमान पर सुखाएं, क्योंकि इससे कपड़ों की टूट-फूट और रेशों का निकलना घटता है।साथ ही सॉफ्ट और टिकाऊ फैब्रिक चुनें। कम घिसने वाले कपड़े कम रेशे छोड़ते हैं।