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SC: 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर बैन की मांग, शीर्ष कोर्ट ने खारिज की याचिका

Fri, 04 Apr 2025 01:01 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 04 Apr 2025 01:01 PM IST
सार

मामले की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की पीठ में न्यायमूर्ति बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह शामिल थे। पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से कहा, 'यह नीतिगत मामला है। आप संसद से कानून बनाने के लिए कहें।'

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SC refuses to entertain plea imposing statutory prohibition on social media usage for children below 13 years
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने शुक्रवार को 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर वैधानिक प्रतिबंध लगाने की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह नीतिगत मामला है। इसके अलावा कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संबंधित प्राधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रखने की आजादी दी।

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पीठ ने क्या कहा?
न्यायमूर्ति बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से कहा, 'यह नीतिगत मामला है। आप संसद से कानून बनाने के लिए कहें। हम इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकते।' पीठ ने कहा कि हम मौजूदा याचिका पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं हैं, क्योंकि मांगी गई राहत नीति के दायरे में है। याचिका का निपटारा करते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता को प्राधिकरण के समक्ष अभ्यावेदन करने की स्वतंत्रता भी दी। पीठ ने कहा कि यदि ऐसा कोई अभ्यावेदन किया जाता है तो उस पर आठ सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार विचार किया जाना चाहिए।
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किसने लगाई याचिका, क्या मांग की?
सुप्रीम कोर्ट में जेप फाउंडेशन की ओर से याचिका लगाई गई थी। इसमें केंद्र और अन्य संबंधित पक्षों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक बच्चों की पहुंच को विनियमित करने की मांग की गई थी। इसके लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण जैसी मजबूत आयु सत्यापन प्रणाली शुरू करने का निर्देश देने की मांग भी की गई थी। वकील मोहिनी प्रिया के माध्यम से दायर याचिका में बच्चों के लिए बनाए गए नियमों का पालन नहीं कर पाने की सूरत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए सख्त दंड लागू करने की भी मांग की गई थी।

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