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Supreme Court: 'ब्राह्मोफोबिया' पर याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- शिक्षा और भाईचारे से खत्म होगी नफरत

Fri, 20 Mar 2026 09:56 PM IST
Nirmal Kant न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Nirmal Kant Updated Fri, 20 Mar 2026 09:56 PM IST
सार

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने ब्राह्मणों के खिलाफ कथित नफरत भरे भाषणों को दंडनीय बनाने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत भरी भाषा बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए और इसे समाज में शिक्षा, सहिष्णुता और भाईचारे के माध्यम से रोका जाना चाहिए। पढ़ें रिपोर्ट-

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SC dismisses petition seeking special protection against hate speech targeting Brahmins
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ कथित नफरत भरे भाषण को दंडनीय अपराध बनाने की मांग की गई थी। इस याचिका में इसे 'ब्राह्मोफोबिया' बताया गया था। 
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न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने याचिकाकर्ता महालिंगम बालाजी को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दी और कहा कि वह चाहें तो किसी अन्य उचित मंच पर जा सकते हैं। बालाजी खुद अदालत में पेश हुए थे। 
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने अपने आदेश में कहा, याचिकाकर्ता ने खुद पेश होकर याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी है। इसे रिकॉर्ड में लिया जाता है। याचिका को वापस लिया हुआ मानते हुए खारिज किया जाता है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नागरत्ना की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत भरी भाषा को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और व्यापक सामाजिक मूल्यों के जरिये इसका समाधान किया जाना चाहिए। 
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किसी समुदाय के खिलाफ नहीं चाहते नफरत भरे भाषण: सुप्रीम कोर्ट
पीठ ने कहा, हम किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत भरे भाषण को नहीं चाहते। यह शिक्षा, बौद्धिक विकास, सहिष्णुता और धैर्य पर निर्भर करता है। जब हर कोई भाईचारे का पालन करेगा, तो अपने आप नफरत भरी भाषा समाप्त हो जाएगी।  पीठ ने यह भी सवाल उठाया कि केवल एक ही समुदाय के लिए विशेष कानूनी पहचान और सुरक्षा की मांग क्यों की जा रही है। न्यायालय ने कहा कि कानून सबके लिए समान रूप से लागू होना चाहिए और इसे किसी एक समूह की शिकायतों के अनुसार नहीं बदला जा सकता।

याचिका में क्या अनुरोध किया गया था?
याचिका में व्यापक निर्देशों की मांग की गई थी। इसमें मांग की गई थी कि ब्राह्मणों के खिलाफ नफरत भरे भाषण को जाति आधारित भेदभाव का अलग रूप माना जाए और इसके लिए दंडनीय कार्रवाई की जाए। साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों को मुख्यधारा और सोशल मीडिया पर ऐसे मामलों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश देने की भी मांग की गई थी। याचिका में शीर्ष अदालत से यह भी अनुरोध किया गया कि ब्राह्मणों के खिलाफ जाति आधारित नफरत या हिंसा भड़काने वाले कथित घरेलू और विदेशी अभियान की व्यापक जांच केंद्रीय और राज्य एजेंसियों से कराई जाए।


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इसके अलावा, याचिकाकर्ता ने एक उच्च स्तरीय 'सत्य और न्याय आयोग' बनाने की मांग की, जो  1948 में महाराष्ट्र में ब्राह्मणों की हत्या और 1990 में कश्मीरी पंडितों के पलायन जैसे ऐतिहासिक घटनाक्रमों की जांच करे। साथ ही प्रभावित लोगों के लिए पुनर्वास, आर्थिक और शैक्षिक उपाय भी सुझाए गए थे।



 
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