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सबरीमाला मंदिर सोना घोटाला: चेन्नई की कंपनी स्मार्ट क्रिएशंस पर केरल SIT की जांच तेज, 4.5 किलो सोना गायब
Mon, 13 Oct 2025 11:42 PM IST
शिवम गर्ग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: शिवम गर्ग
Updated Mon, 13 Oct 2025 11:42 PM IST
सार
Sabarimala Temple Gold Scam: सबरीमाला मंदिर के द्वारपालक मूर्तियों के सोना चढ़ाने में गड़बड़ी का मामला तूल पकड़ गया है। केरल एसआईटी ने चेन्नई स्थित स्मार्ट क्रिएशंस कंपनी के सीईओ से पूछताछ की। करीब 4.5 किलो सोना गायब बताया जा रहा है।
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सबरीमाला मंदिर
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला अय्यप्पा मंदिर में सोने की परत चढ़ाने के काम में गड़बड़ी का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। केरल पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने सोमवार को चेन्नई में छापा मारा और वहां स्थित स्मार्ट क्रिएशंस नामक कंपनी के दफ्तर में जांच शुरू की।
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सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी टीम ने कंपनी के सीईओ पंगेज बंदारी से पूछताछ की। यह पूछताछ मंदिर की द्वारपालक मूर्तियों के सोना चढ़ाने के काम में लगभग 4.54 किलोग्राम सोने की कमी के मामले में की गई। यह सोना 2019 में मूर्तियों के कॉपर प्लेट्स (तांबे की चादरों) पर इलेक्ट्रोप्लेटिंग के दौरान उपयोग किया गया था।
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मंदिर से जुड़ा 4.5 किलो सोना गायब, सियासी घमासान शुरू
इस मामले ने केरल की राजनीति में भूचाल ला दिया है। भाजपा ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। 2019 में देवस्वम बोर्ड के रिकॉर्ड्स के अनुसार, जब सोने की प्लेटें रिपेयरिंग के लिए हटाई गईं, तब उन्हें तांबे की चादरें बताया गया। मगर जब प्लेटें वापस लौटीं, तो उनका वजन करीब 4.41 किलो कम पाया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि उन्निकृष्णन पोट्टी नामक व्यक्ति ने दावा किया था कि जो चादरें उसे दी गई थीं, वे तांबे की थीं जिन पर थोड़ा सोना बचा था और उन्हें बाद में चेन्नई की कंपनी में फिर से सोना चढ़ाया गया।
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विजिलेंस रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
केरल हाईकोर्ट में सौंपी गई देवस्वम विजिलेंस रिपोर्ट के अनुसार, उन्निकृष्णन पोट्टी, जिनकी न तो कोई स्थायी आय है और न ही कोई घोषित व्यावसायिक पृष्ठभूमि, ने सबरीमाला मंदिर की कई परियोजनाओं में बिचौलिए की भूमिका निभाई। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सोने की प्लेटिंग का वास्तविक खर्च पोट्टी ने नहीं, बल्कि कई निजी निवेशकों ने वहन किया था। श्रीकोविल के मुख्य दरवाजे की सोने की प्लेटिंग बेल्लारी के व्यापारी गोवर्धन ने कराई, जबकि छत (कट्टिल्ला) की तांबे की प्लेटिंग बेंगलुरु के उद्योगपति अजी कुमार ने प्रायोजित की थी। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि पोट्टी केवल एक मध्यस्थ के रूप में काम कर रहा था और देवस्वम प्रशासन में अपनी निकटता का उपयोग करके अनुचित प्रभाव डाल रहा था।
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एक बार फिर चर्चा में आया विजय माल्या का पुराना दान
यह विवाद 1998 में उद्योगपति विजय माल्या द्वारा दान किए गए 30.3 किलोग्राम सोना और 1,900 किलोग्राम तांबा से जुड़ा है। इन धातुओं का उपयोग मंदिर के गर्भगृह और लकड़ी की नक्काशियों को कवर करने के लिए किया गया था। अब SIT इस बात की जांच कर रही है कि आखिर सोने की मात्रा में कमी कैसे हुई, और इसमें कंपनी, देवस्वम बोर्ड या अन्य अधिकारियों की क्या भूमिका रही।