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सबरीमाला मंदिर केस : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, संविधान के अनुसार हों धार्मिक परंपराएं 

Wed, 25 Jul 2018 01:47 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 25 Jul 2018 01:47 AM IST
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Sabarimala temple case: Supreme Court said, according to the constitution religious traditions

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में 10-50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर रोक के खिलाफ दायर याचिका पर कहा कि रीति-रिवाज या धार्मिक परंपराएं संविधान के अनुसार होनी चाहिए। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अनुच्छेद-25 और 26 का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को सिर्फ ‘जन स्वास्थ्य, जन व्यवस्था और नैतिकता’ के आधार पर ही मंदिर में घुसने से रोका जा सकता है। 

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भगवान अय्यप्पा मंदिर का संचालन करने वाले त्रावणकोर देवास्वम बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि देश की मस्जिदों में भी महिलाओं को प्रवेश की अनुमति नहीं है। आस्था पर आधारित इन परंपराओं के परीक्षण से मुद्दों का पिटारा खुल जाएगा। इस पर पीठ ने कहा कि 1950 में संविधान लागू होने के बाद सब कुछ संविधान के दायरे में है। पीठ ने सिंघवी से कहा कि देवस्वाम बोर्ड को स्थापित करना होगा कि निश्चित आयु वर्ग की महिलाओं का प्रवेश वर्जित करना धार्मिक परंपरा का आवश्यक और अनिवार्य हिस्सा है।
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पीठ ने केरल हाईकोर्ट में बोर्ड के कथन में अंतर्विरोध का जिक्र करते हुए कहा कि तीर्थयात्रा शुरू होने पर पहले पांच दिन सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्गों की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति होती थी। इसके बाद भीड़ बढ़ने से उनके प्रवेश पर रोक लगाई गई थी। शीर्ष अदालत ने 19 जुलाई को सुनवाई के दौरान कहा था कि महिलाओं में दस वर्ष की आयु से पहले भी मासिक धर्म शुरू हो सकता है।
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इस मामले में न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन का कहना था कि एक विशेष आयु वर्ग की महिलाओं को अलग करना उन्हें अछूत मानने जैसा है, जो संविधान के अनुच्छेद-17 कि तहत गलत है। इस पर पीठ ने कहा था कि मंदिर में प्रवेश से वंचित की जा रही महिलाओं में सवर्ण वर्ग की भी हो सकती हैं, जबकि यह प्रावधान सिर्फ अनुसूचित जातियों से संबंधित है। 


कोर्ट ने बताया था मौलिक अधिकारों का हनन
13 अक्तूबर, 2017 को शीर्ष अदालत ने कहा था कि महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर रोक उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। इसके बाद कोर्ट ने मामला पांच सदस्यीय संविधान पीठ को भेज दिया था। सबरीमाला मंदिर में 10-50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर रोक को ‘इंडियन यंग लायर्स एसोसिएशन’ और अन्य ने चुनौती दी है। 

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