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Mohan Bhagwat: वर्ण-जाति व्यवस्था को पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए, संघ प्रमुख मोहन भागवत ने दी नसीहत
Sat, 08 Oct 2022 12:12 AM IST
Jeet Kumar
पीटीआई, नागपुर
पीटीआई, नागपुर
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 08 Oct 2022 12:12 AM IST
सार
मोहन भागवत ने कहा कि सामाजिक समानता भारतीय परंपरा का एक हिस्सा था, लेकिन इसे भुला दिया गया और इसके हानिकारक परिणाम हुए।
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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि 'वर्ण' और 'जाति' को पूरी तरह से खत्म कर देना चाहिए। नागपुर में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि जाति व्यवस्था की अब कोई प्रासंगिकता नहीं है।
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हाल ही में जारी हुई डॉ मदन कुलकर्णी और डॉ रेणुका बोकारे की किताब "वज्रसुची तुंक" का हवाला देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि सामाजिक समानता भारतीय परंपरा का एक हिस्सा था, लेकिन इसे भुला दिया गया और इसके हानिकारक परिणाम हुए।
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आरएसएस प्रमुख ने कहा कि जो कुछ भी भेदभाव का कारण बनता है, उसे व्यवस्था से बाहर कर देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पिछली पीढ़ियों ने भारत सहित हर जगह गलतियाँ कीं। आगे भागवत ने कहा कि उन गलतियों को स्वीकार करने में कोई दिक्कत नहीं है जो हमारे पूर्वजों ने गलतियाँ की हैं।
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पिछले महीने किया था मदरसा मस्जिद का दौरा
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने सितंबर में कई मौलवियों के साथ बैठक की थी और दिल्ली में एक मस्जिद और मदरसे का दौरा भी किया था। जिसके बाद उन्होंने कहा था कि अल्पसंख्यक खतरे में नहीं हैं, हिंदुत्ववादी संगठन उनके डर को खत्म करने के लिए काम करते रहेंगे।
जनसंख्या पर बने कानून, कहा था पर्यावरण कितने लोगों को खिला सकता है
वहीं विजयादशमी के अवसर पर नागपुर में आरएसएस के स्थापना दिवस समारोह में मोहन भागवत ने जनसंख्या पर अपनी बात रखी थी। मोहन भागवत ने कहा, देश में जनसंख्या का सही संतुलन जरूरी है। हमें यह ध्यान रखना होगा कि अपने देश का पर्यावरण कितने लोगों को खिला सकता है, कितने लोगों को झेल सकता है। यह केवल देश का प्रश्न नहीं है। जन्म देने वाली माता का भी प्रश्न है। उन्होंने कहा, जनसंख्या की एक समग्र नीति बने, वह सब पर लागू हो। उस नीति से किसी को छूट न मिले।