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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में तैनात आईपीएस अफसरों के परिजनों से छिनी सरकारी गाड़ी, हो रहा था दुरुपयोग

Thu, 09 Jan 2020 09:31 PM IST
देव कश्यप जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली  Published by: देव कश्यप Updated Thu, 09 Jan 2020 09:31 PM IST
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Relatives of IPS officers posted in paramilitary forces will no longer able to misuse govt vehicle
CRPF DG Rajeev Rai Bhatnagar - फोटो : CRPF सांकेतिक

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में तैनात कई आईपीएस अफसरों के परिवार जो कि सरकारी गाड़ी का लुत्फ उठा रहे थे, अब उनकी वह सुविधा छीन गई है। सरकारी गाड़ी एवं ड्राइवर की सेवा लेने वालों में न केवल मौजूदा आईपीएस, बल्कि रिटायर्ड डीजी भी शामिल हैं।

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इनमें कई अधिकारियों ने अपने परिजनों के लिए दो-तीन वाहन तक रखे हुए हैं। अमर उजाला डॉट कॉम ने तीन जनवरी को 'पुलिस अफसरों के परिवार वाले उठा रहे हैं सरकारी गाड़ी और ड्राइवर का लुत्फ, रिटायर्ड डीजी भी हैं शामिल' शीर्षक से खबर चलाई थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने अर्धसैनिक बलों में तैनात पुलिस अफसरों के परिजनों को मिली रही वाहन की सुविधा तुरंत प्रभाव से खत्म कर दी है। केंद्र सरकार के सर्विस रूल में इस तरह से अफसर के परिजनों को सरकारी गाड़ी और ड्राइवर उपलब्ध कराने का कोई प्रावधान भी नहीं है। यह सब आपसी सेटिंग से होता है।
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ये भी पढ़ें:- पुलिस अफसरों के परिवार वाले उठा रहे हैं सरकारी गाड़ी और ड्राइवर का लुत्फ, रिटायर्ड डीजी भी हैं शामिल
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अमर उजाला डॉट कॉम ने अपनी खबर में बताया था कि कई अफसरों के परिवार वाले गाड़ी के अलावा ड्राइवर और कुक का लुत्फ भी उठा रहे हैं। भले ही वे अफसर दिल्ली से बाहर तैनात हैं, लेकिन उन्होंने अपनी परिजनों के लिए बल मुख्यालय से कह कर गाडियों और ड्राइवर का इंतजाम कर रखा है। सरकारी कुक भी अपनी सेवा देता है। ड्राइवर, कुक की सेलरी और पेट्रोल डीजल को मिलाकर वह खर्च एक लाख रुपये प्रतिमाह से ऊपर चला जाता है।

कुछ अफसर ऐसे भी हैं जो डीजी स्तर के पद से रिटायर हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें सरकारी वाहन उपलब्ध कराया गया है। सीआरपीएफ में एक आईपीएस, जो मणिपुर में आईजी के पद पर तैनात हैं, उन्होंने कथित तौर पर वहां से सड़क के द्वारा दिल्ली में रह रही अपनी पत्नी के लिए इनोवा गाड़ी भेज रखी है। सीआरपीएफ से डीजी रैंक में रिटायर हुए पूर्व आईपीएस को स्विफ्ट कार दी गई है। इस कार का नंबर 'एचआर-70 2डी 8510' बताया गया था।


यह गाड़ी लंबे समय से पूर्व आईपीएस इस्तेमाल कर रहे हैं। एक दूसरे रिटायर्ड अधिकारी के पास सरकारी सियाज, इनोवा और एक बाइक मिली है।एक अन्य गाड़ी इनोवा 'एएस 01 एवी 3786' है। यह गाड़ी सीआरपीएफ के दिल्ली स्थित मुख्यालय से जारी नहीं हुई है। इसे मणिपुर की 32 बटालियन से दिल्ली भेजा गया है। चूंकि वहां तैनात एक आईपीएस का परिवार दिल्ली में रहता है, इसलिए उनके लिए यह गाड़ी रोड के द्वारा यहां लाई गई है।

काले रंग की सियाज कार जिसका नंबर एचआर 36 एए 0003, इसका इस्तेमाल भी एडीजी रैंक से रिटायर हुए एक अधिकारी कर रहे थे। उक्त अधिकारी को कार के अलावा गनमैन भी दिया गया है। सरकारी पैसे का दुरुपयोग कर सुविधाएं लेने वालों की सूची लंबी है। इसमें कई दूसरे पुलिस संगठन भी शामिल हैं, जहां अफसरों द्वारा दो-दो जगह पर फोर्स की सुविधाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनकी गाड़ियां भी वापस ली जा रही हैं।

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