आरबीआई का खुलासा: बैंकों में मार्च तक पांच लाख करोड़ की लोन धोखाधड़ी
- 2,06,941 करोड़ की चपत शीर्ष पांच बैंकों को
- 78,072 करोड़ का सबसे ज्यादा नुकसान एसबीआई को
- रियल एस्टेट क्षेत्र की नामी (सूचीबद्ध) कंपनियों पर मकान खरीदारों का भरोसा बढ़ रहा, 8 सूचीबद्ध कंपनियों की चार साल में 16 फीसदी बढ़ी बिक्री में हिस्सेदारी
विस्तार
‘बैड लोन’ की समस्या से जूझ रहे बैंकों के साथ मार्च 2021 तक पांच लाख करोड़ के कर्ज धोखाधड़ी का मामला भी सामने आया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मुताबिक, देश में संचालित बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ 31 मार्च 2021 तक 4.92 लाख करोड़ रुपये का लोन फर्जीवाड़ा हुआ है। इसमें निजी और सरकारी बैंक दोनों शामिल हैं।
आरबीआई ने सूचना के अधिकार के तहत मांगी जानकारी में बताया कि देश में संचालित 90 बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने 31 मार्च 2021 तक धोखाधड़ी के कुल 45,613 मामले दर्ज कराए हैं। इसमें 4.92 लाख करोड़ की राशि शामिल है, जो कुल लोन बुक की 4.5 फीसदी है। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई को नुकसान भी सबसे ज्यादा उठाना पड़ा है। उसके साथ 78,072 करोड़ रुपये का लोन फ्रॉड हुआ। इसके बाद पंजाब नेशनल बैंक के साथ 39,733 करोड़, बैंक ऑफ इंडिया के साथ 32,224 करोड़, यूनियन बैंक के साथ 29,572 करोड़ और बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ 27,341 करोड़ का फ्रॉड हुआ है।
शीर्ष 5 बैंकों का योगदान 42 फीसदी
कुल लोन फ्रॉड में शीर्ष पांच बैंकों का योगदान 42 फीसदी है और ये सभी सरकारी बैंक हैं। इन पांच बैंकों के लोन फ्रॉड की कुल राशि 2 लाख 6 हजार 941 करोड़ रुपये है। इसके बाद निजी बैंकों का नंबर आता है, जिसमें आईसीआईसीआई बैंक के साथ 26,084 करोड़ (5.3 फीसदी) की लोन धोखाधड़ी हुई। दूसरे नंबर पर यस बैंक है, जिसकी हिस्सेदारी 4.02 फीसदी और इसके बाद एक्सिस बैंक की 2.54 फीसदी है। इन तीन बैंकों का कुल योगदान 11.87 फीसदी है। हालांकि, निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक एचडीएफसी का इसमें योगदान महज 0.55 फीसदी रहा।
किस बैंक के साथ कितनी धोखाधड़ी
बैंक संख्या राशि (करोड़ रुपये)
एसबीआई 5,406 78,072
पीएनबी 2,297 39,733
बैंक ऑफ इंडिया 1,962 32,224
यूनियन बैंक 1,494 29,572
बैंक ऑफ बड़ौदा 2,267 27,341
आईसीआईसीआई बैंक 3,908 26,084
आईडीबीआई बैंक 1,195 21,333
केनरा बैंक 1,628 20,861
आईओबी 1,295 19,906
यस बैंक 124 19,771
बीते वित्त वर्ष में 159 फीसदी बढ़ी धोखाधड़ी
रिजर्व बैंक ने जनवरी में जारी रिपोर्ट में बताया था कि वित्त वर्ष 2019-20 में बैंकों के साथ लोन धोखाधड़ी में 159 फीसदी का उछाल आया था, जिसमें कुल 1.86 लाख करोड़ की राशि शामिल थी। इसमें एक लाख से ज्यादा की धोखाधड़ी के मामले 28 फीसदी बढ़े। आरबीआई के अनुसार, 2014-15 से 2019-20 तक बैंकों ने कुल 3.6 लाख करोड़ की धोखाधड़ी की शिकायत की थी। पिछले वित्त वर्ष के दौरान इस राशि में 1.40 लाख करोड़ का और इजाफा हुआ है। मार्च 2021 तक कुल धोखाधड़ी में 2,261 खातों को विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया गया है, जिसमें 1.72 लाख करोड़ की राशि शामिल हैं।
नामी कंपनियों पर बढ़ रहा मकान खरीदारों का भरोसा
महामारी से प्रभावित रियल एस्टेट क्षेत्र की नामी (सूचीबद्ध) कंपनियों पर मकान खरीदारों का भरोसा बढ़ रहा है। इससे उनकी बिक्री में भी तेजी आई है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भरोसे की वजह से पिछले चार साल में देश की आठ सबसे नामी कंपनियों (डेवलपर्स) की बिक्री में हिस्सेदारी 16 फीसदी बढ़ गई।
रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में 2016-17 के दौरान बिके कुल 2,03,000 मकानों में आठ कंपनियों ब्रिगेड इंटरप्राइजेज, गोदरेज प्रॉपर्टीज, कोल्टे-पाटिल, महिंद्रा लाइफस्पेसेज, ओबेरॉय रियल्टी, प्रेस्टीज एस्टेट्स, पुरवांकरा और शोभा की हिस्सेदारी महज छह फीसदी थी, जो 2020-21 के शुरुआती नौ महीने में बढ़कर 22 फीसदी हो गई। इस दौरान सात प्रमुख शहरों में कुल 93,140 मकान बिके। इनमें गैर-सूचीबद्ध डेवलपर्स की हिस्सेदारी 18 फीसदी और अन्य डेवलपर्स की 60 फीसदी रही।
महामारी के बावजूद बिक्री में उछाल
महामारी के बावजूद 2020-21 के शुरुआती नौ महीने यानी अप्रैल-दिसंबर के दौरान आट सूचीबद्ध कंपनियों ने कुल 2.12 करोड़ वर्ग फीट जमीन बेची। यह 2019-20 की समान अवधि में बिके 2.08 करोड़ वर्ग फुट जमीन से दो फीसदी ज्यादा है। आलोच्य अवधि में 66.4 लाख वर्ग फुट बिक्री के साथ गोदरेज प्रॉपर्टीज सबसे आगे रही, जबकि प्रेस्टीज एस्टेट्स की बिक्री 50.4 लाख वर्ग फुट रही।
रेरा-जीएसटी के बाद तेजी से बढ़ी हिस्सेदारी
एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के चेयरमैन अनुज पुरी का कहना है कि रेरा और जीएसटी जैसी संरचनात्मक नीतियां आने के बाद संगठित एवं नामी कंपनियों की बाजार में हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी। समय पर डिलीवरी की वजह से मकान खरीदारों का भी इनमें भरोसा बढ़ता गया। अब सूचीबद्ध और बड़े डेवलपर्स ही किफायती एवं मध्यम आय वर्ग परियोजनाओं की नई मांग पूरी कर रहे हैं।
2020-21 की चौथी तिमाही में 2 फीसदी रहेगी विकास दर : इक्रा
घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा ने सोमवार को कहा कि 2020-21 की चौथी यानी मार्च तिमाही में विकास दर दो फीसदी रह सकती है, जबकि सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) के लिहाज से इसके तीन फीसदी रहने का अनुमान है।
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि 2020-21 के दौरान अर्थव्यवस्था में 8.45 फीसदी गिरावट रहेगी, जो 10 फीसदी से कम है। उधर, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने आर्थिक वृद्धि दर में 10 फीसदी से ज्यादा गिरावट का अनुमान जताया है। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर का कहना है कि मार्च तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर दो फीसदी रहेगी, जो दिसंबर तिमाही के 0.40 फीसदी से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि आलोच्य तिमाही में जीवीए के लिहाज से वृद्धि दर 3 फीसदी रहेगी, जो दिसंबर तिमाही में एक फीसदी रही थी। ऐसे में 2020-21 के दौरान अर्थव्यवस्था में दहाई अंकों की गिरावट नहीं आएगी। हमारा मानना है कि मार्च तिमाही में जीवीए का प्रदर्शन अर्थव्यवस्था में सुधार का अर्थपूर्ण संकेतक होगा। इस दौरान जीवीए की वृद्धि दर आर्थिक वृद्धि से ज्यादा रहेगी।
यस बैंक को धोखाधड़ी मामले में 25 करोड़ के जुर्माने से राहत
यस बैंक को एडिशनल टीयर-1 (एटी-1) बॉन्ड मामले में 25 करोड़ रुपये के जुर्माने से फिलहाल राहत मिल गई है। ग्राहकों से धोखाधड़ी के मामले में बाजार नियामक सेबी के बैंक पर जुर्माना लगाने के फैसले पर सिक्योरिटीज अपीलीय न्यायाधिकरण (सैट) ने अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही कहा कि पक्ष गलत साबित होने पर बैंक को आदेश के दो सप्ताह के भीतर जुर्माना भरना होगा।
सैट ने इस मामले में सेबी से चार सप्ताह में जबाव मांगा है। इसके तीन सप्ताह बाद बैंक को सेबी के जबाव पर अपना पक्ष रखना होगा। सुनवाई 31 जुलाई तक के लिए टाल दी गई है। दरअसल, सेबी ने आरोप में कहा था कि बैंक ने एटी-1 बॉन्ड बेचते हुए ग्राहकों को इससे जुड़े जोखिम की जानकारी नहीं दी थी। नियामक ने बैंक के तीन अधिकारियों विवेक कंवर पर एक करोड़, आशीष नासा एवं जसजीत सिंह पर भी 50-50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।