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Ratan Tata: मुंबई हमले के दौरान दिखा रतन टाटा का जुझारूपन, मारे गए कर्मचारियों के परिजनों को जीवनभर दी सैलरी

Thu, 10 Oct 2024 03:10 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 10 Oct 2024 03:10 PM IST
सार

जब ताज होटल में आतंकी मेहमानों और होटल कर्मचारियों को निशाना बना रहे थे और होटल में विस्फोट की खबरें पूरी दुनिया की सुर्खियां बनी हुईं थी, उस वक्त रतन टाटा ने नेतृत्व की ऐसी मिसाल पेश की, जिसे कई पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा। 

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ratan tata stood tall during 26/11 mumbai terror attack taj hotel memory
रतन टाटा - फोटो : instagram/ratantata

विस्तार

रतन टाटा के निधन पर हर कोई उनकी दयालुता और परोपकार की चर्चा कर रहा है, लेकिन साल 2008 में जब मुंबई पर आतंकी हमला हुआ तो उन हमलों के दौरान रतन टाटा का जुझारूपन और आतंक के आगे न झुकने की हिम्मत भी सभी ने देखी। जब ताज होटल में आतंकी मेहमानों और होटल कर्मचारियों को निशाना बना रहे थे और होटल में विस्फोट की खबरें पूरी दुनिया की सुर्खियां बनी हुईं थी, उस वक्त रतन टाटा ने नेतृत्व की ऐसी मिसाल पेश की, जिसे कई पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा। 
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मुंबई हमले के बाद ताज होटल का पुराना वैभव लौटाया
मुंबई आतंकी हमले के दौरान टाटा समूह के लग्जरी होटल ताज महल होटल पर भी हमला हुआ। उस हमले में मारे गए 166 लोगों में से 33 लोग ताज होटल में ही मारे गए थे। इनमें 11 होटल के कर्मचारी थे। हमले के बाद रतन टाटा ने मारे गए सभी कर्मचारियों के परिवारों की देखभाल करने का फैसला किया और हमले में मारे गए कर्मचारियों के परिजनों को जीवन भर पूरी सैलरी दी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रतन टाटा ने ताज होटल की मरम्मत और उसके पुनर्निमाण पर एक अरब डॉलर से ज्यादा की रकम खर्च की थी और होटल का वैभव लौटाया। 
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कमल हासन ने भी रतन टाटा के जुझारूपन की तारीफ की थी 
मशहूर अभिनेता कमल हासन ने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा कि '2008 के मुंबई हमले के बाद मैं रतन टाटा से मिला था, उस संकट की घड़ी में दिग्गज उद्योगपति ने जुझारूपन की मिसाल पेश की और उस स्थिति में उन्होंने जिस तरह का चरित्र दिखाया, उससे वह देश को फिर से और मजबूती से खड़ा करने की भारत की भावना का प्रतीक बन गए।'
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हमले में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिजनों को जीवन भर दी सैलरी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुंबई हमले के बाद रतन टाटा पीड़ितों के घर गए थे और उनकी देखभाल का वादा किया था। रतन टाटा ने ताज पब्लिक सर्विस वेलफेयर ट्रस्ट की स्थापना भी की और इसी ट्रस्ट के माध्यम से मुंबई हमले के दौरान ताज होटल में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिवारों का ध्यान रखा गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आतंकी हमले के दौरान ताज के बाहर खड़े एक रेहड़ी पटरी वाले बुजुर्ग की चार साल की बेटी भी हमले में जख्मी हुई थी। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी कि वह बेटी का इलाज करा सके, जब ये बात रतन टाटा को पता चली तो उन्होंने उस बच्चे की इलाज का पूरा लाखों रुपये का खर्च उठाया था। 

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