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CCC 2025: '...अदृश्य चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्क रहे सशस्त्र बल', रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया आह्वान

Tue, 16 Sep 2025 06:13 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 16 Sep 2025 06:13 PM IST
सार

कोलकाता में संयुक्त कमांडर सम्मेलन के दूसरे दिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सशस्त्र बलों से आह्वान किया कि हमें अदृश्य चुनौतियों से निपटने के लिए सतर्क रहना चाहिए। इस दौरान उन्होंने ये भी कहा युद्ध की प्रकृति लगातार बदल रही है, इसलिए सशस्त्र बलों को पारंपरिक युद्ध की सोच से आगे बढ़कर तैयार रहना चाहिए।

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Rajnath Singh exhorts Armed Forces to remain alert to deal with invisible challenges
राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री - फोटो : PTI

विस्तार

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि युद्ध की प्रकृति लगातार बदल रही है, इसलिए भारतीय सशस्त्र बलों को पारंपरिक युद्ध की सोच से आगे बढ़कर 'अदृश्य चुनौतियों' से निपटने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। कोलकाता में आयोजित 16वें संयुक्त कमांडर्स कॉन्फ्रेंस (सीसीसी) 2025 को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज के समय में खतरे सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं हैं।
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'युद्ध की अवधि का अंदाजा लगाना मुश्किल'
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आगे कहा, 'सूचना, वैचारिक, पर्यावरणीय और जैविक युद्ध जैसे असामान्य खतरों से निपटने के लिए हमें सजग और तैयार रहना होगा।' उन्होंने जोर देकर कहा कि आज की दुनिया में युद्ध अचानक शुरू हो सकते हैं और उनकी अवधि का अंदाजा लगाना मुश्किल है। उन्होंने कहा 'युद्ध दो महीने, एक साल या पांच साल तक भी चल सकता है। हमें हमेशा इतनी क्षमता बनाए रखनी होगी कि किसी भी स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दे सकें।'
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ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र
रक्षा मंत्री ने 'ऑपरेशन सिंदूर' की सराहना की, जिसे मई में पहलगाम आतंकी हमले के बाद अंजाम दिया गया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। राजनाथ सिंह ने कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर ने साबित किया कि ताकत, रणनीति और आत्मनिर्भरता, ये तीन स्तंभ 21वीं सदी में भारत को शक्ति प्रदान करेंगे। आज हमारे पास स्वदेशी तकनीक और हमारे बहादुर सैनिकों के साहस के दम पर किसी भी चुनौती का सामना करने की क्षमता है। यही असली आत्मनिर्भर भारत है।'


'सुदर्शन चक्र' रक्षा तंत्र का प्रस्ताव
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत का रक्षा क्षेत्र आक्रामक और रक्षात्मक क्षमताओं का मिश्रण है। उन्होंने कमांडर्स से आग्रह किया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप 'सुदर्शन चक्र' नाम का उन्नत वायु रक्षा तंत्र के निर्माण के लिए काम करें। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के लिए एक समिति बनाई गई है, जो पांच साल की मध्यम अवधि की योजना और दस साल की दीर्घकालिक योजना तैयार करेगी।

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सशस्त्र बलों में तालमेल पर जोर
रक्षा मंत्री ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए सशस्त्र बलों के बीच आपसी तालमेल और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय बेहद जरूरी है। इस बैठक में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इससे पहले, सोमवार को पीएम मोदी ने तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन किया और ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए सशस्त्र बलों की सराहना की। उन्होंने रक्षा मंत्रालय को संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया।
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