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Rahul Gandhi: राहुल की सांसदी बहाली में BJP का दामन भी हुआ पाक साफ! क्यों दिख रही है भाजपा को इसमें अपनी जीत?

Mon, 07 Aug 2023 02:52 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Mon, 07 Aug 2023 02:52 PM IST
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सार
Rahul Gandhi: सियासी जानकारों का कहना है कि अगर राहुल गांधी की सांसदी बहाली में देरी होती, तो कांग्रेस की आक्रामकता के चलते भाजपा के लिए एक असहज स्थिति का सामना करना पड़ सकता था। लोकसभा की सदस्यता फैसले आने के तुरंत बाद चली गई थी, तो उसे लेकर समूचे देश के सियासी गलियारों में बड़ी चर्चाएं हुई थीं...
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Rahul Gandhi: With the reinstatement of Rahul's MP, BJP also feeling very relaxed and seeing its victory?
Rahul Gandhi - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

राहुल गांधी की सांसदी बहाली पर भारतीय जनता पार्टी भी अपनी बड़ी सियासी जीत देख रही है। दरअसल यह सियासी जीत किसी और वजह से नहीं, बल्कि उस हुए राजनीतिक हमले की वजह से मानी जा रही है। कांग्रेस के नेताओं ने जितनी जल्दी सांसदी जाने और बहाली को लेकर भाजपा पर हमला बोला था। सोमवार को जैसे ही लोकसभा कार्यालय वर्किंग मोड में आया, तो राहुल गांधी की सांसदी बहाली का आदेश जारी हो गया। सियासी जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के लिए तो यह बड़ी जीत है ही, लेकिन भारतीय जनता पार्टी भी तुरंत बहाली के आदेश पर अपना दामन भी पाक साफ मान रही है। क्योंकि कांग्रेस के नेताओं ने सबसे बड़े आरोप भारतीय जनता पार्टी पर यही लगाए थे कि जब राहुल गांधी के खिलाफ हाई कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद रद्द कर दी गई थी, तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनकी सांसदी उसी तेजी से बहाल की जानी चाहिए थी।

यह भी पढ़ें: Rahul Gandhi: सांसदी बहाली के डेढ़ के घंटे भीतर ही लोकसभा पहुंचे राहुल, सबसे पहले किया ये काम, जानें कहां बैठे

लोकसभा सचिवालय ने सोमवार को अधिसूचना जारी कर राहुल गांधी की सांसदी दोबारा से बहाल कर दी है। उन्हें मोदी सरनेम मामले में मार्च 2023 में दोषी ठहराया गया था। दो साल की सजा होने की वजह से संसद से उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई। हालांकि बाद में चार अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगाने का फैसला दे दिया था। राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार के. सुदर्शन कहते हैं कि कांग्रेस ने राहुल गांधी की सांसदी बहाली का सबसे बड़ा मुद्दा बना लिया था। इसलिए राहुल गांधी की सांसदी बहाली से भारतीय जनता पार्टी को भी सियासी तौर पर "डिफेंसिव पॉलिटिकल शॉट" खेलने का मौका मिल गया है। वह कहते हैं कि काग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे ने फ़ैसला आने के तुरंत बाद भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा था कि जितनी जल्दी राहुल गांधी की सांसदी गई थी, उतनी ही जल्दी राहुल गांधी की सांसदी की बहाली भी होनी चाहिए। कांग्रेस ने राहुल गांधी की सांसदी बहाली न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी थी और देश के सभी राज्यों के सभी शहरों में इस मामले में एक बड़ी मुहिम भी शुरू करने की योजना बनाई थी।

राजनीतिक विश्लेषक के सुदर्शन कहते हैं कि भाजपा के लिए कांग्रेस की ओर से किए जाने वाले इस हमले में एक असहजता तो दिख रही थी। उनका कहना है कि असहजता जायज भी थी क्योंकि राहुल गांधी की सदस्यता बहाली में होने वाली देरी पर कांग्रेस पार्टी की ओर से समूचे देश में यह माहौल बनाया जाना था कि भाजपा जान बूझकर इस मामले में देरी कर रही है। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और सोमवार को लोकसभा सचिवालय के कार्य दिवस की शुरुआत के साथ ही राहुल गांधी की सांसदी बहाली का आदेश जारी किया गया। वह कहते हैं ऐसा करके भाजपा ने अपने ऊपर लगने वाले आरोप और अपने खिलाफ बनाए जाने वाले माहौल से बचाव कर लिया है। सियासी जानकार मानते हैं कि लोकसभा स्पीकर की ओर से राहुल गांधी की शांति बहाली के फैसले पर बहुत हद तक पार्टी पर लग रहे आरोपों से बचाव तो हुआ ही है।

सियासी जानकारों का कहना है कि अगर राहुल गांधी की सांसदी बहाली में देरी होती, तो कांग्रेस की आक्रामकता के चलते भारतीय जनता पार्टी के लिए एक असहज स्थिति का सामना करना पड़ सकता था। राजनैतिक विश्लेषक जोगेंद्र कुदेशिया कहते हैं कि जब राहुल गांधी की लोकसभा की सदस्यता फैसले आने के तुरंत बाद चली गई थी, तो उसे लेकर समूचे देश के सियासी गलियारों में बड़ी चर्चाएं हुई थीं। हालांकि लोकसभा से उनकी सदस्यता रद्द किए जाने का आदेश तो कोर्ट की ओर से सुनाई गई दो साल की सजा के आधार पर थी, लेकिन जिस तरीके से आनन-फानन में उनकी सदस्यता रद्द की गई और सरकारी बंगला खाली कराया गया उससे भाजपा पर कई तरह के सवाल भी उठने लगे थे। वह कहते हैं जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया, तो भारतीय जनता पार्टी के पास अपने ऊपर लगे उन तमाम सवालों का जवाब देने के लिए सही सियासी मौका भी ढूंढ लिया। ऐसे में अब जब लोकसभा स्पीकर की ओर से राहुल गांधी की सदस्यता बहाल कर दी गई है, तो बहुत हद तक भाजपा के पास अपना दामन पाक साफ बताने के पर्याप्त बंदोबस्त हो चुके हैं।

इस मामले में अपना पक्ष रखते हुए संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा कि लोकसभा स्पीकर ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए राहुल गांधी की सदस्यता बहाली की प्रक्रिया तुरंत पूरी की है। पार्टी के नेताओं के मुताबिक वे किसी भी तरीके के राग द्वेष से न तो पहले प्रेरित थे और न ही अब प्रेरित हैं। यही वजह है कि राहुल गांधी की सदस्यता बहाली में बिल्कुल देरी नहीं की। भाजपा की ओर से आए इस बयान को लेकर सियासी जानकार मानते हैं कि यह सेफ साइड में खेला गया एक बड़ा सियासी शॉट है। वरिष्ठ पत्रकार जटाशंकर सिंह कहते हैं कि राहुल गांधी की सांसदी बहाली को जितना कांग्रेस अपने लिए बड़ा सियासी फायदा मान कर चल रही है। भारतीय जनता पार्टी भी उसी तरीके से खुद को एक बड़ी सियासी जीत के तौर पर देख रही है। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि राहुल गांधी की सांसदी बहाली एक स्वागत योग्य कदम है। यह सिर्फ लोकतंत्र की जीत ही नहीं है बल्कि ही भारत समेत वायनाड के लोगों में एक बड़ा भरोसा दिलाता है।

राहुल गांधी की सदस्यता बहाली के साथ ही कांग्रेस अब न सिर्फ संसद में आक्रामक रूप रुख अख्तियार करेगी, बल्कि जमीन पर भी आगे बढ़ाने की तैयारियां शुरू करेगी। कांग्रेस पार्टी से जुड़े नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी की सांसदी बहाली से उनकी पार्टी के नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है। पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी कहते हैं कि राहुल गांधी के संसद में रहने से वह उन सभी मुद्दों को अब और प्रमुखता के साथ उठा सकेंगे, जिसे लेकर बीते कुछ दिनों से वह संसद ने अपनी आवाज बुलंद करते आए हैं। उनका कहना है कि राहुल गांधी लगातार मणिपुर मामले में सबसे ज्यादा संवेदनशील होकर जिम्मेदारी तय करने की बात करते रहे हैं। मणिपुर जाने वाले नेताओं में सबसे पहले राहुल गांधी ही वहां पर पहुंचे थे। वह कहते हैं कि ऐसे बहुत से मामलों में अब संसद में राहुल गांधी की मौजूदगी से न सिर्फ कांग्रेस पार्टी बल्कि INDIA गठबंधन से जुड़े सभी दलों की  ताकत के साथ मुद्दों को नई आवाज भी मिलेगी।

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