फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Putin India Visit: New Boost to Defence Partnership, Possible Pact on 5th-Gen Fighter Jet and BrahMos

Putin in India: रक्षा साझेदारी में नया अध्याय, 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान और ब्रह्मोस-एनजी पर बड़ा फैसला संभव

Fri, 05 Dec 2025 06:14 AM IST
शिवम गर्ग आशुतोष भाटिया, नई दिल्ली
आशुतोष भाटिया, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Fri, 05 Dec 2025 06:14 AM IST
सार

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से रक्षा साझेदारी को नई गति मिलेगी। एयर डिफेंस सिस्टम, सुखोई-57 के को-प्रोडक्शन, 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान और ब्रह्मोस-एनजी पर महत्वपूर्ण निर्णय होने की संभावना।

विज्ञापन
Putin India Visit: New Boost to Defence Partnership, Possible Pact on 5th-Gen Fighter Jet and BrahMos
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : ANI

विस्तार

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता करेंगे। इस दौरान रूस के साथ अहम रक्षा समझौतों पर बात बन सकती है। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य तकनीकी सहयोग और भविष्य की संयुक्त परियोजनाओं पर अहम फैसले लिए जाएंगे।

विज्ञापन


भारत रूस के साथ लड़ाकू विमानन के क्षेत्र में अहम फैसले ले सकता है। पुतिन की यात्रा से ठीक पहले रूस में सैन्य-तकनीकी सहयोग पर संघीय सेवा के निदेशक दिमित्री शुगायेव ने कहा कि दोनों देशों में सुखोई-30 विमानों के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के संयुक्त विकास पर सहयोग हो सकता है। साथ ही दोनों देश आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों, मानव रहित हवाई वाहनों और आधुनिक हवा से हवा में मार करने वाले हथियारों के संयुक्त उत्पादन पर सैन्य-तकनीकी सहयोग कर सकते हैं। पिछले दिनों रूस की ओर से भारत को लगातार पांचवीं पीढ़ी के सुखोई-57 स्टील्थ लड़ाकू विमानों के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन का प्रस्ताव दिया गया है।
विज्ञापन


ब्रह्मोस-एनजी...
दोनों देशों में ब्रह्मोस के उन्नत संस्करण पर भी बातचीत हो सकती है। भारत चाहता है कि ब्रह्मोस का हल्का संस्करण ब्रह्मोस-एनजी भी बनाया जाए। सूत्रों ने बताया कि इसके तकनीकी और उत्पादन संबंधी सहयोग पर बात हो सकती है। इस बारे में ठोस समयसीमा भी तय हो सकती है। फिलहाल भारत-रूस संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस एयरोस्पेस ब्रह्मोस-एनजी की डिजाइन पर काम कर रहा है। इसको ऐसे डिजाइन किया जा रहा है कि यह सेना, वायुसेना और नौसेना सभी के अलग-अलग प्लेटफार्म पर आसानी से फिट हो सके।
विज्ञापन
विज्ञापन




रूसी टीम का दौरा
रूस की एक तकनीकी टीम ने पिछले दिनों एचएएल का दौरा कर भारत में सुखोई-57 लड़ाकू विमान के निर्माण की संभावनाएं तलाशी थीं। टीम यह जायजा लेने गई थी कि यदि दोनों देश मिलकर पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान बनाएं, तो एचएएल के पास मौजूदा सुविधाएं कितनी पर्याप्त हैं। सूत्रों के मुताबिक इस टीम ने पाया कि एचएएल के पास इस विमान का निर्माण करने की करीब 50 प्रतिशत सुविधाएं पहले से ही मौजूद हैं। भारत को यूं भी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की काफी दरकार है।  मिग 21 की दो स्क्वॉड्रन रिटायर होने के बाद वायुसेना के पास केवल 29 स्क्वॉड्रन बची हैं। जबकि दोतरफा युद्ध की चुनौती के बीच जरूरत 42 फाइटर स्क्वॉड्रन की है।

विशेषज्ञों की राय
पूर्व वायुसेनाध्यक्ष एयर चीफ मार्शल अरूप राहा ने अमर उजाला से कहा कि फिलहाल स्थिति बहुत खराब है। यदि फाइटर स्क्वॉड्रन की संख्या घटकर पाकिस्तान के बराबर आ जाए तो मुश्किल हो जाएगी। भारत अपनी प्रतिरोध-क्षमता खो देगा। भारत के पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी विमान एम्का के विकास में तेजी लाने के लिए पीएमओ को हस्तक्षेप करना चाहिए। यदि ऐसा हो तो 8-10 साल में एम्का तैयार हो जाएगा। ऐसा होने तक अंतरिम उपाय के तौर पर सुखोई-57 की कुछ स्क्वॉड्रन लेनी चाहिए।  ऐसा हो तो अच्छा रहेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed