जस्टिस ढींगरा ने माना, वाड्रा जमीन सौदे में हुई गड़बड़ी, कांग्रेस ने बताया साजिश
चंडीगढ़ में ढींगरा आयोग की रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के तुरंत बाद दिल्ली में कांग्रेस राबर्ट वाड्रा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पक्ष में खड़ी हुई। कांग्रेस ने आयोग के चेयरमैन जस्टिस एसएन ढींगरा और आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस का कहना है कि जस्टिस ढींगरा जिस गोपाल सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के जुड़े हैं उसे निजी जमीन मुफ्त दिलाई गई। साथ ही वहां तक कंक्रीट सड़क बनाने पर वर्तमान सरकार ने अनुचित ढंग से एक करोड़ रुपए खर्च किए हैं।
कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बुधवार को मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि गुडग़ांव में जस्टिस ढींगरा के ट्रस्ट को उपहार स्वरूप जमीन देना कितना उचित है। ऐसे समय में जब ढींगरा स्वयं जमीन की जांच से संबंधित आयोग के चेयरमैन थे। उन्होंने आरोप लगाया कि ढींगरा आयोग केंद्र और राज्य सरकार के हाथों की कठपुतली बनकर काम करता रहा। उन्होंने आयोग के गठन के तरीके उसकी कार्यप्रणाली और कार्यकाल बढ़ाने पर भी सवाल उठाया।
2.7 एकड़ जमीन राबर्ट वाड्रा से संबंधित
आयोग की जांच के दायरे में शामिल गांधी परिवार से जुड़े राबर्ट वाड्रा उनकी कंपनी स्कॉई लाइट हॉस्पिटलिटी को लेकर सफाई में उतरी पार्टी ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को बदनाम करने के राजनीतिक षडयंत्र के तहत ढींगरा आयोग का गठन किया गया था। सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा में विभिन्न सरकारों ने करीब 32 हजार 897 एकड़ जमीन के लाइसेंस दिए हैं। जबकि आयोग की जांच का दायरा 16 लाइसेंस और 63.40 एकड़ जमीन तक सीमित रहा। जिसमें 2.7 एकड़ जमीन राबर्ट वाड्रा से संबंधित है।
इसमें न तो वाड्रा और न ही उनकी कंपंनी ने कोई नियम-कानून का उल्लघंन किया। सरकार ने उनका लाइसेंस रिन्यू नहीं किया है और न ही डीएलएफ को जमीन ट्रांसफर को लेकर अंतिम अनुमति दी है। उसके बाद भी वर्तमान सरकार ने नीति में परिवर्तन कर जमीन पाना आौर स्थानांतरण करना तआसान बना दिया है। सुरजेवाला का कहना है कि ढींगरा आयोग ने न तो रॉबर्ट वाड्रा, न उनकी कंपंनी और न ही तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को कोई समन जारी किया है। अयोग ने हुड्डा को को लिखकर जवाब दिया किया है कि आपके खिलाफ कोई शिकायत नहीं आई है।
जबकि आयोग एक्ट के मुताबिक अगर जांच में किसी व्यक्ति पर प्रतिकूल टिप्पणी होती है तो उसे समन जारी होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सोची समझी राजनीति के तहत इस मुद्दे को जिंदा रखने के लिए ऐसा किया जा रहा है।
आयोग ने रिपोर्ट सौंपी भी नहीं थी लेकिन मीडिया में सार्वजनिक में उसके अंश आ रहे हैं।