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क्या बदलेगा तेहरान का सियासी समीकरण?: इस्राइल के निशाने पर ईरान के 2500 से अधिक सैन्य ठिकाने, समझिए इसके मायने

Mon, 02 Mar 2026 11:43 PM IST
Shubham Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Mon, 02 Mar 2026 11:43 PM IST
सार

इस्राइल और अमेरिका के हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा रखा है। इसी बीच भारत में इस्राइल के राजदूत रियुवेन अजार ने दावा किया कि ईरान के आसमान पर नियंत्रण है और 2,500 से अधिक सैन्य ठिकाने निशाने पर हैं। आइए जानते हैं कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर इस्राइली दूत ने क्या-क्या कहा?

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Political change on Iran Israeli ambassador to India said more than 2,500 military sites were targeted
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

इस्राइल और अमेरिका के ईरान पर हमलों और तेहरान की तीखी जवाबी कार्रवाई ने पश्चिम एशिया को विस्फोटक मोड़ पर ला खड़ा किया है। मिसाइलों, ड्रोन और सैन्य ठिकानों पर हमलों के बीच सवाल सिर्फ जंग का नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन, तेल आपूर्ति और वैश्विक ताकतों की नई रणनीति का भी है। इसी बीच भारत में इस्राइल के राजदूत रियुवेन अजार इन ईरान पर जारी हमलों को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि  इस्राइल और अमेरिका इस समय ईरान के हवाई क्षेत्र पर नियंत्रण बनाए हुए हैं और अब तक 2,500 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है।

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न्यूज एजेंसी आईएएनएस के एक विशेष बातचीत में अजार ने उम्मीद जताई कि ईरान में शासन परिवर्तन हो सकता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ईरान और उत्तर में मौजूद हिज्बुल्ला की ओर से दागी जा रही ज्यादातर मिसाइलों और ड्रोन को इस्राइल ने हवा में ही रोक लिया है। हालांकि, एक बैलिस्टिक मिसाइल के सीधे हमले में बेइत शेमेश शहर में 9 नागरिकों की मौत हो गई और करीब 50 लोग घायल हुए। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद इस्राइल की एयर डिफेंस प्रणाली मजबूत तरीके से काम कर रही है और अधिकांश हमलों को विफल किया जा रहा है।
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ईरान में शासन परिवर्तन की उम्मीद
अजार ने कहा कि ईरान में हाल ही में लाखों लोग सड़कों पर उतरे थे और मौजूदा शासन के खिलाफ प्रदर्शन किया था। उनका मानना है कि अब यह फैसला ईरानी जनता को करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरानी शासन ने प्रदर्शनकारियों पर सख्ती की और बड़ी संख्या में निर्दोष लोगों की जान गई। इस्राइल का कहना है कि मौजूदा सैन्य कार्रवाई का मकसद ईरान की हमलावर क्षमता को खत्म करना और उसके प्रमुख सुरक्षा ठिकानों जैसे बसीज और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के मुख्यालयों को निशाना बनाना है।
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अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद चुनौती
बता दें कि ईरान में अभी स्थिति बहुत ही तनावपूर्ण चल रही है। इसका बड़ा कारण है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की इस्राइल और अमेरिका के हालिया हमले में मोत हो गई, जिसके बाद पूरे देश की स्थिति और संवेदनशील हो गई है। अजार ने कहा कि इस्राइल की कोशिश है कि ईरान की सैन्य ताकत को इतना कमजोर कर दिया जाए कि वह भविष्य में इस्राइल, क्षेत्र के अन्य देशों और अमेरिकी ठिकानों पर हमला न कर सके। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरानी नेतृत्व ने अपना रुख नहीं बदला, तो आगे और सख्त कार्रवाई हो सकती है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना
बातचीत के दौरान अजार ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनके हालिया इस्राइल दौरे ने दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि इस्राइल और भारत के बीच केवल रणनीतिक हित ही नहीं, बल्कि साझा मूल्यों और विरासत का भी रिश्ता है। इस्राइल, भारत की तरह, क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि चाहता है।


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क्या जमीनी कार्रवाई होगी?

इसके साथ ही जवाबी कार्रवाई से संबंधित सवाल पर कि क्या इस्राइल ईरान में जमीनी सैनिक कार्रवाई कर सकता है, अजार ने कहा कि फिलहाल कार्रवाई हवाई हमलों तक सीमित है। हालांकि, किसी खास खतरे को खत्म करने के लिए सीमित स्तर पर कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन बड़े पैमाने पर जमीनी आक्रमण की फिलहाल कोई योजना नहीं है।

तेल टैंकर पर हमले पर प्रतिक्रिया
इसके साथ ही ईरान की तरफ तेल टैंकर पर हमले को लेकर अजार ने कहा कि यह कदम तनाव बढ़ाने वाला है और इससे ईरान को ही नुकसान होगा। उनका कहना है कि नागरिक ठिकानों और तेल व्यापार को निशाना बनाना स्थिति को और गंभीर बनाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि जैसे-जैसे सैन्य कार्रवाई आगे बढ़ेगी, ईरान की क्षमताएं कमजोर होंगी और वह क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने में सफल नहीं होगा। अजार ने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों या हफ्तों में तनाव कम होगा और हालात सामान्य होने की दिशा में बढ़ेंगे।

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