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US-Iran War: ऑपरेशन एपिक फ्यूरी पर अमेरिका का खुलासा, 24 घंटे में ईरान के हजार से ज्यादा ठिकानों पर किया हमला
Mon, 02 Mar 2026 11:11 PM IST
Himanshu Singh Chandel
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Mon, 02 Mar 2026 11:11 PM IST
सार
अमेरिका ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत ईरान पर बड़े सैन्य अभियान का खुलासा किया है। पहले 24 घंटों में 1000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए गए। इस अभियान में एयर, नौसैनिक, साइबर और अंतरिक्ष क्षमताओं का संयुक्त इस्तेमाल हुआ।
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अमेरिका का बयान
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच अमेरिका ने अपने बड़े सैन्य अभियान ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का आधिकारिक खुलासा किया है। वॉशिंगटन में दी गई जानकारी के अनुसार अमेरिकी सेना ने अभियान के पहले 24 घंटों में ही ईरान के एक हजार से अधिक सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। यह हमला हवा, समुद्र, साइबर और अंतरिक्ष क्षमताओं को मिलाकर किया गया, जिसे हाल के वर्षों के सबसे बड़े समन्वित सैन्य अभियानों में माना जा रहा है।
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने बताया कि यह ऑपरेशन लंबे समय से बनाई जा रही रणनीति का हिस्सा था। संयुक्त प्रमुख समिति के अध्यक्ष एयर फोर्स जनरल डैन कैन ने पेंटागन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि अभियान राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 28 फरवरी को शुरू किया गया। शुरुआती चरण में ही बड़े पैमाने पर हमले किए गए ताकि ईरान की सैन्य प्रतिक्रिया क्षमता कमजोर की जा सके।
हवा, समुद्र और जमीन से एक साथ हमला
जनरल केन के अनुसार ऑपरेशन में 100 से अधिक लड़ाकू और सहायक विमान शामिल किए गए। इनमें फाइटर जेट, टैंकर विमान, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक अटैक प्लेटफॉर्म और बिना पायलट वाले ड्रोन शामिल थे। इसके अलावा लंबी दूरी के बॉम्बर विमानों ने भी मिशन में हिस्सा लिया। अमेरिका के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और नौसैनिक बलों ने समुद्र से लगातार हमले किए।
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ये भी पढ़ें- Iran-Israel War: क्या ईरान में संकट और गहराएगा? नए अंतरिम सुप्रीम लीडर अलीरेजा अराफी की मौत के अपुष्ट दावे
पहले साइबर और स्पेस हमला, फिर सैन्य कार्रवाई
अधिकारियों ने बताया कि सीधे बमबारी से पहले अमेरिकी साइबर कमांड और स्पेस कमांड ने ईरान की निगरानी और संचार प्रणाली को निशाना बनाया। इन गैर-सैन्य लेकिन रणनीतिक हमलों के जरिए ईरान की प्रतिक्रिया क्षमता को बाधित किया गया। इसके बाद काइनेटिक स्ट्राइक यानी वास्तविक सैन्य हमले शुरू हुए, जिनमें भूमिगत ठिकानों तक को निशाना बनाया गया।
बी-2 बॉम्बर और लंबी दूरी मिशन की भूमिका
अमेरिकी बी-2 स्टेल्थ बॉम्बर ने अमेरिका से उड़ान भरकर करीब 37 घंटे का लंबा मिशन पूरा किया और गहरे भूमिगत ठिकानों पर बम गिराए। लगभग 57 घंटों के भीतर संयुक्त अमेरिकी बलों ने जमीन और समुद्र से सैकड़ों मिशन लॉन्च किए और हजारों गोला-बारूद इस्तेमाल किए। इस ऑपरेशन को तकनीकी और सैन्य समन्वय का बड़ा उदाहरण बताया गया।
अन्य वीडियो-
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अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने बताया कि यह ऑपरेशन लंबे समय से बनाई जा रही रणनीति का हिस्सा था। संयुक्त प्रमुख समिति के अध्यक्ष एयर फोर्स जनरल डैन कैन ने पेंटागन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि अभियान राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 28 फरवरी को शुरू किया गया। शुरुआती चरण में ही बड़े पैमाने पर हमले किए गए ताकि ईरान की सैन्य प्रतिक्रिया क्षमता कमजोर की जा सके।
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हवा, समुद्र और जमीन से एक साथ हमला
जनरल केन के अनुसार ऑपरेशन में 100 से अधिक लड़ाकू और सहायक विमान शामिल किए गए। इनमें फाइटर जेट, टैंकर विमान, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक अटैक प्लेटफॉर्म और बिना पायलट वाले ड्रोन शामिल थे। इसके अलावा लंबी दूरी के बॉम्बर विमानों ने भी मिशन में हिस्सा लिया। अमेरिका के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और नौसैनिक बलों ने समुद्र से लगातार हमले किए।
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पहले साइबर और स्पेस हमला, फिर सैन्य कार्रवाई
अधिकारियों ने बताया कि सीधे बमबारी से पहले अमेरिकी साइबर कमांड और स्पेस कमांड ने ईरान की निगरानी और संचार प्रणाली को निशाना बनाया। इन गैर-सैन्य लेकिन रणनीतिक हमलों के जरिए ईरान की प्रतिक्रिया क्षमता को बाधित किया गया। इसके बाद काइनेटिक स्ट्राइक यानी वास्तविक सैन्य हमले शुरू हुए, जिनमें भूमिगत ठिकानों तक को निशाना बनाया गया।
बी-2 बॉम्बर और लंबी दूरी मिशन की भूमिका
अमेरिकी बी-2 स्टेल्थ बॉम्बर ने अमेरिका से उड़ान भरकर करीब 37 घंटे का लंबा मिशन पूरा किया और गहरे भूमिगत ठिकानों पर बम गिराए। लगभग 57 घंटों के भीतर संयुक्त अमेरिकी बलों ने जमीन और समुद्र से सैकड़ों मिशन लॉन्च किए और हजारों गोला-बारूद इस्तेमाल किए। इस ऑपरेशन को तकनीकी और सैन्य समन्वय का बड़ा उदाहरण बताया गया।
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