Telangana: कांची गचीबौली जमीन विवाद में 'सुप्रीम' आदेश के बाद पुलिस सख्त, भूमि पर लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध
हैदराबाद विश्वविद्यालय से सटी 400 एकड़ जमीन विवाद तेज होता जा रहा है। इस मामले में छात्र संगठन विरोध कर रहे हैं। जमीन पर पेड़ काटने को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने जमीन पर लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया है।
विस्तार
हैदराबाद विश्वविद्यालय से सटी 400 एकड़ जमीन विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तेलंगाना पुलिस ने बड़ा कदम उठाया है। पुलिस ने क्षेत्र में कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए विवि से सटी कांची गचीबौली की जमीन पर लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस भूमि पर तेलंगाना सरकार के आईटी पार्क बनाने की योजना को लेकर हैदराबाद विवि छात्र संघ ने विरोध प्रदर्शन किया था। पेड़ों की कटाई से जुड़े इस मामले की सुनवाई तेलंगाना हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों में हो रही है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद डीसीपी (माधापुर जोन) विनीत ने एक आदेश जारी किया है। इसमें उन लोगों को प्रतिबंधित किया गया है, जिनका इस क्षेत्र में कोई काम नहीं है। आदेश में कहा गया है कि मानव जीवन और सुरक्षा के लिए खतरे को रोकना, सार्वजनिक शांति बनाए रखना और दंगों, झगड़े या किसी भी व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का कानूनी रूप से निर्वहन करने में बाधा डालने से रोकने के लिए यह फैसला लिया गया है। यह आदेश 16 अप्रैल तक लागू रहेगा।
छात्र संघ ने निकाली रैली
जमीन विवाद के बीच हैदराबाद विवि छात्र संघ ने शुक्रवार देर शाम को परिसर में रैली निकाली। इसमें विवि से पुलिस शिविर हटाने, छात्रों, नागरिक समाज समूहों और अन्य कार्यकर्ताओं के खिलाफ की गई एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई। छात्रों ने कहा कि हैदराबाद विवि प्रशासन भी उच्च न्यायालय में भूमि के स्वामित्व का दावा करने के लिए एक याचिका दायर करे।
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सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक रोक लगाई, 16 अप्रैल को सुनवाई
हैदराबाद विश्वविद्यालय के पास पेड़ों की कटाई का मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच गया है। शीर्ष अदालत ने अगले आदेश तक किसी भी गतिविधि पर रोक लगा दी है। बृहस्पतिवार को मामले की सुनवाई के दौरान देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा, यह एक बहुत ही गंभीर मामला है। तेलंगाना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की रिपोर्ट में चिंताजनक तस्वीर दिखाई गई है। अदालत ने तेलंगाना के मुख्य सचिव से पूछा है कि पेड़ों को हटाने सहित अन्य गतिविधियों को शुरू करने की क्या मजबूरी थी? इस संबंध में दो हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई 16 अप्रैल को तय की है।
सरकार ने बनाई कमेटी
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद तेलंगाना सरकार ने एक कमेटी बनाने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने इस मुद्दे पर सभी संबंधित पक्षों से बातचीत करने के लिए मंत्रियों की एक समिति गठित करने की घोषणा की है। समिति में डिप्टी सीएम मल्लू भट्टी विक्रमार्क, मंत्री श्रीधर बाबू और मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी को शामिल किया गया है। डिप्टी सीएम ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट द्वारा मांगी गई जानकारी निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रस्तुत करेगी। राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है और न्याय की जीत होगी। सरकार ने पुलिस अधिकारियों को छात्रों के प्रति कठोर व्यवहार न करने का भी निर्देश दिया है।
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क्या है पूरा मामला
जिस 400 एकड़ जमीन से पेड़ों को काटा जा रहा है, वह राज्य सरकार की है और सरकार ने इसे तेलंगाना इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉपरेशन को आवंटित की है। तेलंगाना इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉपरेशन ने इस जमीन पर विकास के लिए बीती 30 मार्च से पेड़ों की कटाई शुरू की। जिसका हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्रों और पर्यावरणविदों ने विरोध शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे वन संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन हो रहा है। हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि यह जमीन उसकी है न कि विश्वविद्यालय प्रशासन की। सरकार कानून के उल्लंघन से भी इनकार कर रही है। इसे लेकर हैदराबाद विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और इससे शैक्षणिक सत्र का नुकसान हो रहा है।
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