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छोटे शहरों तक हवाई सेवा का नया प्लान: केंद्र-राज्य मिलकर चुनेंगे रूट-एयरपोर्ट, जानें उडान स्कीम में नया अपडेट
Tue, 22 Sep 2026 10:42 PM IST
शिवम गर्ग
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: शिवम गर्ग
Updated Tue, 22 Sep 2026 10:42 PM IST
सार
उड़ान योजना 2.0 के लिए मंगलवार को 21 राज्यों ने केंद्र के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस चरण में देश की करीब 100 ऐसी हवाई पट्टियों को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की तैयारी है, जिनका अभी इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
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विमानन सेवा
- फोटो : amarujala.com
विस्तार
देश में हवाई सफर को आसान और किफायती बनाने के लिए संशोधित उड़ान योजना के तहत रूट और एयरपोर्ट चयन की प्रक्रिया मंगलवार से शुरू हो गई है। केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इस योजना को आगे बढ़ाएंगी। इसका फोकस छोटे और दूर-दराज के शहरों को हवाई कनेक्टिविटी से जोड़ना है। इस चरण में राज्य सरकार उन रूट और एयरस्ट्रिप की पहचान करेंगी, जहां यात्रियों की आवाजाही ज्यादा है। इसके बाद केंद्र और राज्य मिलकर इन जगहों का विकास करेंगे। कम इस्तेमाल हो रहे एयरपोर्ट को भी ज्यादा उपयोगी बनाने पर जोर रहेगा।
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100 मौजूदा हवाई पट्टियों को एयरपोर्ट बनाने की तैयारी
उड़ान योजना 2.0 के लिए मंगलवार को 21 राज्यों ने केंद्र के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस चरण में देश की करीब 100 ऐसी हवाई पट्टियों को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की तैयारी है, जिनका अभी इस्तेमाल नहीं हो रहा है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने कहा, नए चरण में एयरपोर्ट बनाने की रफ्तार बढ़ाने पर जोर रहेगा। इसके लिए चैलेंज मोड अपनाया गया है। इसके तहत काम शुरू होने के बाद एयरपोर्ट निर्माण को 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। पहले इसमें औसतन तीन साल लगते थे। पिछले 10 साल में उड़ान के तहत 90 से ज्यादा एयरपोर्ट शुरू किए गए और करीब 1.54 करोड़ यात्रियों को सस्ती हवाई सेवा मिली।
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10 साल में 120 नए गंतव्यों को जोड़ने का लक्ष्य
नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि 2025-26 में देश के घरेलू एयरपोर्ट से करीब 42 करोड़ यात्रियों ने सफर किया। 2030 तक यह संख्या करीब 50 करोड़ सालाना होने का अनुमान है। नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा ने कहा, उड़ान का नया चरण केवल हवाई संपर्क बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा। इसका मकसद क्षेत्रीय हवाई सेवाओं को लंबे समय तक चलने लायक और आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है। नए चरण के लिए 10 साल में 29 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत 120 नए गंतव्यों को हवाई संपर्क से जोड़ने, 200 हेलीपैड बनाने और करीब चार करोड़ यात्रियों को हवाई सेवा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
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संशोधित उड़ान स्कीम के तहत नए रूट पर एयरलाइंस को बढ़ावा देने के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग अब 3 साल के बजाय 5 साल तक दी जाएगी। हालांकि तीसरे साल के बाद फंडिंग धीरे-धीरे कम होगी। इससे एयरलाइंस पर अचानक वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और किराए में अचानक बढ़ोतरी की संभावना कम होगी। इसके अलावा मॉडिफाइड उड़ान के तहत एयरलाइंस मांग के हिसाब से छोटे विमान, हेलिकॉप्टर और बड़े विमान चला सकेंगी। इसके अलावा जल निकायों से हवाई कनेक्टिविटी के लिए सी-प्लेन की अलग योजना भी तैयार की जा रही है।