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टीएमसी: 20 बागी सांसदों ने मांगा चार हफ्ते का और समय, लोकसभा की सदस्यता रद्द करने के नोटिस का देना है जवाब
Tue, 22 Sep 2026 10:13 PM IST
शिवम गर्ग
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: शिवम गर्ग
Updated Tue, 22 Sep 2026 10:13 PM IST
सार
टीएमसी छोड़कर एनसीपीआ के साथ गए 20 लोकसभा सांसदों ने सदस्यता रद्द करने के नोटिस का जवाब देने के लिए चार हफ्ते का और समय मांगा है। सांसदों का कहना है कि जरूरी दस्तावेज जुटाने में अभी समय लग रहा है। आखिर इस मामले में आगे क्या होगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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टीएमसी के बागी सांसद
- फोटो : Amar Ujala Graphics
विस्तार
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के साथ जाने वाले 20 लोकसभा सांसदों ने सदस्यता रद्द करने की मांग से जुड़े नोटिस का जवाब देने के लिए चार हफ्ते का और समय मांगा है। उन्हें पहले 22 सितंबर तक जवाब देना था।
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एनसीपीआई की संसदीय अध्यक्ष काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि 20 सांसद अपने जवाब के लिए जरूरी सभी दस्तावेज अभी एकत्र नहीं कर पाए हैं। इसी वजह से लोकसभा सचिवालय से चार सप्ताह की अतिरिक्त मोहलत मांगी गई है।
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26 अगस्त को जारी हुआ था नोटिस
लोकसभा सचिवालय ने 26 अगस्त को इन सांसदों को नोटिस भेजकर टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी की ओर से दाखिल सदस्यता रद्द करने की याचिकाओं पर जवाब मांगा था। शुरुआत में सांसदों को जवाब के लिए सात दिन का समय दिया गया था। बाद में स्पीकर ओम बिरला ने यह समय बढ़ाकर 22 सितंबर तक कर दिया था।
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अभिषेक बनर्जी ने जून में इन सांसदों के खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले में सुनवाई करते हुए सांसदों को नोटिस जारी किया और स्पीकर के सामने चल रही कार्यवाही को तेजी से आगे बढ़ाने की बात कही थी।
जून में TMC छोड़कर NCPI के साथ गए थे सांसद
20 सांसदों ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद जून में पार्टी छोड़ दी थी और एनसीपीआई के साथ जाने की घोषणा की थी। उन्होंने लोकसभा में अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता की मांग भी की है। हालांकि, टीएमसी का कहना है कि ये सांसद पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीतकर आए थे और दूसरी राजनीतिक पार्टी के साथ जाने के कारण उन पर दलबदल कानून लागू होता है। वहीं, बागी सांसदों का पक्ष रहा है कि उनका एनसीपीआई के साथ जाना वैध विलय है। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच कानूनी विवाद चल रहा है।
TMC ने साधा निशाना
अतिरिक्त समय मांगने पर टीएमसी नेता कुनाल घोष ने बागी सांसदों पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सांसदों ने अपना राजनीतिक रास्ता तय कर लिया है तो नोटिस का जवाब देने में इतना समय क्यों लग रहा है। वहीं, काकोली घोष दस्तीदार ने इस बयान पर टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि इस मामले का फैसला अदालत और लोकसभा को करना है।
बागी सांसदों के BJP में जाने की चर्चा
इस बीच 20 सांसदों के अगले राजनीतिक कदम को लेकर भी अटकलें जारी हैं। पिछले सप्ताह बागी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने दावा किया था कि 20 में से 17 सांसद दुर्गा पूजा से पहले या उसके बाद भाजपा में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, दूसरे असंतुष्ट सांसदों ने इस दावे को खारिज किया था और भाजपा ने भी इससे दूरी बनाई थी। फिलहाल सदस्यता रद्द करने की कार्यवाही में अगला कदम इन सांसदों के जवाब और उसके बाद लोकसभा स्तर पर होने वाली प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।