Disaster: पीएम करेंगे 'आपदा जोखिम न्यूनीकरण राष्ट्रीय मंच' के तीसरे सत्र का उद्घाटन, जमीन धंसने पर होगी चर्चा
सम्मेलन के दौरान जोशीमठ और जम्मू-कश्मीर में धंस रही जमीन की घटनाओं पर चर्चा करने के अलावा वहां की जांच रिपोर्ट पर बातचीत होगी। ऐसी घटनाओं का मूल कारण क्या रहा है और भविष्य में उससे बचाव का तरीका क्या होगा, इस पर चर्चा की जाएगी....
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 मार्च को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आपदा जोखिम न्यूनीकरण राष्ट्रीय मंच (एनपीडीआरआर) के तीसरे सत्र का उद्घाटन करेंगे। एनपीडीआरआर के तीसरे सत्र का विषय 'बदलती जलवायु में स्थानीय मजबूती की रचना' है, जो जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर तेजी से बदलते आपदा जोखिम परिदृश्य के संदर्भ में, स्थानीय क्षमताओं के निर्माण के लिए, भारत के प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 10-सूत्रीय एजेंडा से जुड़ा हुआ है। सत्र में जोशीमठ/जम्मू-कश्मीर में जमीन धंसने के कारणों और उसके बचाव पर विशेष चर्चा होगी। एनपीडीआरआर में केंद्रीय मंत्रियों, राज्यों के आपदा प्रबंधन मंत्रियों, सांसदों, स्थानीय निकायों के प्रमुखों, विशिष्ट आपदा प्रबंधन एजेंसियों के प्रमुख, शिक्षाविद, निजी क्षेत्र के संगठनों, मीडिया और नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों सहित 1000 से अधिक विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे।
सम्मेलन के दौरान जोशीमठ और जम्मू-कश्मीर में धंस रही जमीन की घटनाओं पर चर्चा करने के अलावा वहां की जांच रिपोर्ट पर बातचीत होगी। ऐसी घटनाओं का मूल कारण क्या रहा है और भविष्य में उससे बचाव का तरीका क्या होगा, इस पर चर्चा की जाएगी। देश के किसी भी हिस्से में प्राकृतिक आपदा, मसलन बाढ़, भूकंप, जमीन धंसना, पहाड़ियों का खिसकना, तेजी से पिघलते ग्लेशियर और नदी के बहाव से होने वाला कटाव, इन बातों पर भी सम्मेलन में विशेषज्ञ अपनी बात रखेंगे। गत दिनों तुर्किये में आए भूकंप के बाद राहत एवं बचाव कार्य के लिए वहां पहुंची एनडीआरएफ की टीम ने 'ऑपरेशन दोस्त' शुरू किया था। एनडीआरएफ जवानों ने अनेक लोगों की जान बचाई। टीम ने वहां पर क्या विशेष कार्य किया, किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा, अगर भारत में इस तरह की आपदा आती है तो उसके लिए भारत में कितनी तैयारी है, उसमें कैसे सुधार की जरुरत है, कौन से उपकरण चाहिए, आदि बातों पर चर्चा के लिए सम्मेलन में एक विशेष सत्र रखा गया है। इस सत्र में एनडीआरएफ वे अधिकारी अपनी बात रखेंगे, जिन्होंने तुर्किये में भारतीय दल का नेतृत्व किया था।
इससे पहले यह सम्मेलन 2013 और 2017 में हुआ था। कोरोना संक्रमण के चलते तीसरा सम्मेलन अपने तय समय पर नहीं हो सका। इस सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन के चलते एकाएक जिस तरह की आपदा आने लगी हैं, उनसे बचाव के तरीकों पर मंथन होगा। तकरीबन सभी राज्यों के प्रतिनिधियों ने इस आयोजन में शामिल होने की स्वीकृति दी है। इसके अलावा एक्सपर्ट, तकनीकी विशेषज्ञ और निजी संस्थानों के भी अनेक प्रतिनिधि, आपदा प्रबंधन पर अपनी बात रखेंगे। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में, एनपीडीआरआर एक बहु-हितधारक राष्ट्रीय मंच है, जो एक विशेष प्रक्रिया द्वारा संचालित है। इसमें सभी हितधारक आपदा जोखिम में कमी (डीआरआर) पर कार्य प्रणालियों और प्रवृत्तियों पर चर्चा और विचारों का आदान-प्रदान, अंतराल की पहचान, सिफारिशें, आपदा जोखिम में कमी के प्रयासों को और तेज करने के लिए साझेदारी करते हैं। तीसरा सत्र मंत्रालयों, विभागों, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, शहरी व ग्रामीण स्थानीय निकायों, शैक्षणिक संस्थान, गैरसरकारी संगठन, सीएसओ, पीएसयू और समुदायों के बीच आपदा प्रबंधन कार्य प्रणालियों को मुख्यधारा में लाने में भी मदद करेगा।
गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एनपीडीआरआर में चार पूर्ण सत्र, एक मंत्रिस्तरीय सत्र और आठ विषयगत सत्र शामिल होंगे। उद्घाटन समारोह के बाद केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक विशेष मंत्रिस्तरीय सत्र आयोजित किया जाएगा, जहां केंद्र, राज्य और केन्द्रशासित प्रदेशों के मंत्री विभन्न स्तरों पर आपदा जोखिम न्यूनीकरण प्रणालियों को और मजबूत करने पर विचार-विमर्श करेंगे। दो दिनों के दौरान, विषय विशेषज्ञ, चिकित्सक, शिक्षाविद और प्रतिनिधि आपदा जोखिम में कमी से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे, जो कि सेंडाई फ्रेमवर्क और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर 10 सूत्रीय एजेंडे पर आधारित है।
इस कार्यक्रम से पहले देशभर के एक दर्जन से अधिक शहरों में पिछले दो महीने में आपदा जोखिम प्रबंधन (जैसे, लू, तटीय आपदाओं, आपदा जोखिम प्रबंधन में महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ाना) आदि विषयों पर 19 कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इन पूर्व-आयोजित 19 कार्यक्रमों के निष्कर्ष और सिफारिशों की जानकारी 10-11 मार्च 2023 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले एनपीडीआरआर के तीसरे सत्र में दी जाएगी। एनपीडीआरआर का पहला सत्र 2013 और दूसरा सत्र 2017 में आयोजित किया गया था। यह बैठक अमृत काल के दौरान हो रही है और एनपीडीआरआर के तीसरे सत्र के विचार-विमर्श से सरकार को प्रधानमंत्री मोदी के विजन-2047 के तहत 2030 तक भारत को आपदा प्रतिरोधी बनाने में मदद मिलेगी।