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आपदा प्रबंधन में भारत बना वैश्विक उदाहरण: प्रधान सचिव बोले- PM मोदी के नेतृत्व में घटी मौतें; बढ़ी राहत क्षमता
Thu, 10 Jul 2025 05:55 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: शुभम कुमार
Updated Thu, 10 Jul 2025 05:55 AM IST
सार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव डॉ पीके मिश्रा ने कहा कि भारत की विकसित होती आपदा जोखिम प्रबंधन प्रणाली के चलते आपदा से होने वाली मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने बताया कि मजबूत पूर्व चेतावनी तंत्र, संस्थागत ढांचा, वित्तीय निवेश और क्षमता निर्माण ने भारत को इस दिशा में वैश्विक नेतृत्व प्रदान किया है।
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पीएम नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव पीके मिश्रा
- फोटो : ANI
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा ने कहा कि आपदा प्रबंधन में मजबूत वित्तीय तंत्र, संस्थागत विकास और क्षमता निर्माण में निवेश से बेहतर नतीजे हासिल किए जा सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की विकसित होती आपदा जोखिम प्रबंधन प्रणाली के चलते आपदा-संबंधी मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है। यह आपदा प्रबंधन तंत्र की सबसे अहम उपलब्धियों में से एक है।
डॉ. मिश्रा ने भारतीय प्रबंधन संस्थान, बंगलूरू में सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी (सीपीपी) के रजत जयंती स्थापना दिवस के अवसर पर इस बात पर जोर दिया कि बेहतर पूर्व-चेतावनी प्रणालियों और सशक्त आपदा प्रबंधन से प्राकृतिक त्रासदी और अन्य खतरों के समय मृत्यु दर में लगातार गिरावट देखी गई है। उन्होंने कहा कि यह आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सेंडाई फ्रेमवर्क के तहत मूल प्रतिबद्धता के अनुरूप है। भारत इस प्रारूप के हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल है।
उन्होंने इस मौके पर इस तथ्य का भी उल्लेख किया कि कैसे एक व्यापक दृष्टिकोण के चलते गुजरात भूकंप राहत कार्यक्रम ने देश की आपदा प्रबंधन प्रणाली को बदलने में मदद की। मिश्रा ने, गुजरात से म्यांमार तक पिछले 25 वर्षों में भारत की आपदा प्रबंधन नीति और कार्यप्रणाली का विकास, विषय पर व्याख्यान के दौरान यह बात कही। एजेंसी
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आपदा प्रबंधन की दिशा में गुजरात की पहल बेहद कारगर
आपदा प्रबंधन को लेकर गुजरात पहल का उल्लेख करते हुए डॉ. मिश्रा ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (जीएसडीएमए) की ओर से उठाए गए कदमों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जीएसडीएमए के ये प्रयास सहायता और राहत से कहीं आगे बढ़कर थे। इनमें भूकंप रोधी गतिविधियां, नीतियों और कानूनों का निर्माण, आपदा प्रबंधन योजनाओं की तैयारी और और जागरूकता व सामुदायिक तैयारियों पर जोर दिया गया।
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अतीत में आई आपदाओं से सबक सीख प्रबंधन तंत्र में किए बदलाए
डॉ. मिश्रा ने ने कहा कि भारत में आपदा जोखिम प्रबंधन की कार्यप्रणाली में कई बदलाव आए हैं। उन्होंने इस दौरान 1991 के ओडिशा सुपर साइक्लोन, 2001 के गुजरात भूकंप और 2004 के हिंद महासागर में आई सुनामी के बारे में बताया, जिससे कई सबक मिले। डॉ. मिश्रा ने कहा कि 1993 का लातूर भूकंप और 2005 के कश्मीर भूकंप जैसी अन्य घटनाएं भी हुईं।
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डॉ. मिश्रा ने भारतीय प्रबंधन संस्थान, बंगलूरू में सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी (सीपीपी) के रजत जयंती स्थापना दिवस के अवसर पर इस बात पर जोर दिया कि बेहतर पूर्व-चेतावनी प्रणालियों और सशक्त आपदा प्रबंधन से प्राकृतिक त्रासदी और अन्य खतरों के समय मृत्यु दर में लगातार गिरावट देखी गई है। उन्होंने कहा कि यह आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सेंडाई फ्रेमवर्क के तहत मूल प्रतिबद्धता के अनुरूप है। भारत इस प्रारूप के हस्ताक्षरकर्ताओं में शामिल है।
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उन्होंने इस मौके पर इस तथ्य का भी उल्लेख किया कि कैसे एक व्यापक दृष्टिकोण के चलते गुजरात भूकंप राहत कार्यक्रम ने देश की आपदा प्रबंधन प्रणाली को बदलने में मदद की। मिश्रा ने, गुजरात से म्यांमार तक पिछले 25 वर्षों में भारत की आपदा प्रबंधन नीति और कार्यप्रणाली का विकास, विषय पर व्याख्यान के दौरान यह बात कही। एजेंसी
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आपदा प्रबंधन की दिशा में गुजरात की पहल बेहद कारगर
आपदा प्रबंधन को लेकर गुजरात पहल का उल्लेख करते हुए डॉ. मिश्रा ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (जीएसडीएमए) की ओर से उठाए गए कदमों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जीएसडीएमए के ये प्रयास सहायता और राहत से कहीं आगे बढ़कर थे। इनमें भूकंप रोधी गतिविधियां, नीतियों और कानूनों का निर्माण, आपदा प्रबंधन योजनाओं की तैयारी और और जागरूकता व सामुदायिक तैयारियों पर जोर दिया गया।
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अतीत में आई आपदाओं से सबक सीख प्रबंधन तंत्र में किए बदलाए
डॉ. मिश्रा ने ने कहा कि भारत में आपदा जोखिम प्रबंधन की कार्यप्रणाली में कई बदलाव आए हैं। उन्होंने इस दौरान 1991 के ओडिशा सुपर साइक्लोन, 2001 के गुजरात भूकंप और 2004 के हिंद महासागर में आई सुनामी के बारे में बताया, जिससे कई सबक मिले। डॉ. मिश्रा ने कहा कि 1993 का लातूर भूकंप और 2005 के कश्मीर भूकंप जैसी अन्य घटनाएं भी हुईं।