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पवन खेड़ा: गिरफ्तारी से राहत की अपील सुप्रीम कोर्ट में खारिज, असम की अदालत में अपील कर सकते हैं कांग्रेस नेता
Fri, 17 Apr 2026 01:50 PM IST
Asmita Tripathi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: Asmita Tripathi
Updated Fri, 17 Apr 2026 01:50 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पवन खेड़ा की गिरफ्तारी से सुरक्षा देने से इन्कार कर दिया। इसके साथ ही पीठ ने कहा कि कांग्रेस नेता असम की अदालत में अपील कर सकते हैं।
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पवन खेड़ा
- फोटो : @INCIndia
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को गिरफ्तारी से सुरक्षा देने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने उनकी ट्रांजिट अग्रिम जमानत की अवधि बढ़ाने की याचिका खारिज की। खेड़ा को मुख्यमंत्री की पत्नी पर टिप्पणी मामले में राहत नहीं मिली। पीठ ने उन्हें असम की सक्षम अदालत जाने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने पहले तेलंगाना हाई कोर्ट की ट्रांजिट जमानत पर रोक लगाई थी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के आचरण पर सवाल उठाए थे। दरअसल, असम पुलिस ने खेड़ा पर मानहानि, जालसाजी के आरोप लगाए।
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अपील करने के लिए स्वतंत्र
सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया, 'प्रतिवादी गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अपील करने के लिए स्वतंत्र है। आवेदन पर उसके गुण-दोष के आधार पर विचार किया जाएगा।' न्यायालय ने आगे कहा कि असम न्यायालय तेलंगाना उच्च न्यायालय द्वारा दी गई पारगमन जमानत या सर्वोच्च न्यायालय के पहले के उस आदेश से प्रभावित नहीं होगा, जिसमें इसे स्थगित किया गया था। न्यायमूर्ति माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर अधिकार क्षेत्र वाली अदालत काम नहीं कर रही है, तो तत्काल सुनवाई के लिए अनुरोध किया जा सकता है, जिस पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा।
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शीर्ष न्यायालय को गुमराह करने का आरोप लगाया
खेड़ा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंहवी ने शीर्ष न्यायालय से मंगलवार तक सुरक्षा बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने तर्क दिया कि पारगमन जमानत पर रोक लगाने का पिछला आदेश एकतरफा पारित किया गया था। तेलंगाना उच्च न्यायालय द्वारा दी गई एक सप्ताह की सुरक्षा शुक्रवार को समाप्त हो रही है। सिंहवी ने कहा, 'माननीय न्यायाधीशों को एकतरफा आदेश पारित करने के लिए राजी किया गया है। मैं सोमवार को (असम में) याचिका दायर कर रहा हूं। क्या माननीय न्यायाधीश मुझे मंगलवार तक सुरक्षा नहीं दे सकते? क्या मैं कोई शातिर अपराधी हूं?' उन्होंने आरोप लगाया कि शीर्ष न्यायालय को गुमराह किया गया था और गलत दस्तावेज दाखिल करने को उन्होंने एक मामूली गलती बताया।
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हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता के आचरण पर सवाल उठाया। तेलंगाना उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का हवाला देने के लिए आधार कार्ड के उपयोग का जिक्र करते हुए, न्यायमूर्ति माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी की 'आप कहते हैं कि आप निष्पक्ष रहे हैं। हम कह रहे हैं कि ऐसा नहीं है।' जब सिंहवी ने यह तर्क दिया कि तेलंगाना उच्च न्यायालय के समक्ष सुनवाई के दौरान गलत दस्तावेज को सुधार लिया गया था, तो न्यायमूर्ति माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी की कि इस तरह के सुधार से कथित रूप से मनगढ़ंत सामग्री पर आधारित प्रारंभिक फाइलिंग को ठीक नहीं किया जा सकता है। पीठ ने कहा कि आप इसे छोटी सी गलती कैसे कह सकते हैं?
क्या है मामला?
कांग्रेस नेता ने 5 अप्रैल को आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के पास कई पासपोर्ट और विदेश में संपत्ति है, जिनका जिक्र राज्य में 9 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों के लिए मुख्यमंत्री के चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया था। इसी वजह से अपने दावों को साबित करने के लिए कथित तौर पर जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। खेड़ा ने 7 अप्रैल को हाईकोर्ट का रुख किया था और अपना आवासीय पता हैदराबाद का बताया। खेड़ा ने हाईकोर्ट से गुजारिश की कि अगर उन्हें गिरफ्तार किया जाता है, तो उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया जाए। 10 अप्रैल को हाईकोर्ट ने खेड़ा को एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दे दी और उन्हें संबंधित अदालत में याचिका दायर करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया था।
15 अप्रैल को असम सरकार ने यह दलील दी थी कि तेलंगाना हाईकोर्ट में खेड़ा की ओर से दायर की गई याचिका कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और यह ‘फोरम शॉपिंग’ (अपनी पसंद की अदालत चुनने की कोशिश) के समान है। इसमें कहा गया था कि अधिकार क्षेत्र की सीधे तौर पर कमी थी। अपराध असम में हुआ था और एफआईआर भी असम में ही दर्ज की गई थी। इसमें यह भी कहा गया कि अग्रिम जमानत की अर्जी एक मनगढ़ंत दस्तावेज पेश करके दायर की गई थी, जिसका एकमात्र मकसद तेलंगाना हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र को साबित करना था।
जब खेड़ा बोले-क्या मैं संगीन अपराधी हूं; कोर्ट ने पूछा-क्या यह छोटी गलती थी
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने असम की अदालत में जाने के लिए मंगलवार तक का समय मांगते हुए कहा, क्या मैं कोई संगीन अपराधी हूं कि मुझे यह राहत भी न दी जाए? उन्होंने यह भी दलील दी कि दस्तावेज जमा करने में हुई एक छोटी सी गलती के लिए किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन नहीं किया जाना चाहिए। इस पर शीर्ष अदालत ने पूछा, क्या यह सचमुच एक छोटी सी गलती है? खेड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने जोर देकर कहा कि आधार कार्ड गलत तरीके से पेश होना एक वास्तविक भूल थी और इसमें किसी भी तरह की कोई जालसाजी नहीं की गई थी। उन्होंने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट का पिछला आदेश असम की अदालत के फैसले को प्रभावित कर सकता है। लेकिन पीठ ने स्पष्ट किया कि उस समय भी यह बात साफ कर दी गई थी और अब फिर से यह स्पष्ट किया जाता है कि पिछले आदेश में की गई टिप्पणियां खेड़ा की याचिका पर विचार करते समय असम की अदालत के फैसले को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करेंगी।
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अपील करने के लिए स्वतंत्र
सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया, 'प्रतिवादी गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अपील करने के लिए स्वतंत्र है। आवेदन पर उसके गुण-दोष के आधार पर विचार किया जाएगा।' न्यायालय ने आगे कहा कि असम न्यायालय तेलंगाना उच्च न्यायालय द्वारा दी गई पारगमन जमानत या सर्वोच्च न्यायालय के पहले के उस आदेश से प्रभावित नहीं होगा, जिसमें इसे स्थगित किया गया था। न्यायमूर्ति माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर अधिकार क्षेत्र वाली अदालत काम नहीं कर रही है, तो तत्काल सुनवाई के लिए अनुरोध किया जा सकता है, जिस पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा।
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शीर्ष न्यायालय को गुमराह करने का आरोप लगाया
खेड़ा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंहवी ने शीर्ष न्यायालय से मंगलवार तक सुरक्षा बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने तर्क दिया कि पारगमन जमानत पर रोक लगाने का पिछला आदेश एकतरफा पारित किया गया था। तेलंगाना उच्च न्यायालय द्वारा दी गई एक सप्ताह की सुरक्षा शुक्रवार को समाप्त हो रही है। सिंहवी ने कहा, 'माननीय न्यायाधीशों को एकतरफा आदेश पारित करने के लिए राजी किया गया है। मैं सोमवार को (असम में) याचिका दायर कर रहा हूं। क्या माननीय न्यायाधीश मुझे मंगलवार तक सुरक्षा नहीं दे सकते? क्या मैं कोई शातिर अपराधी हूं?' उन्होंने आरोप लगाया कि शीर्ष न्यायालय को गुमराह किया गया था और गलत दस्तावेज दाखिल करने को उन्होंने एक मामूली गलती बताया।
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हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता के आचरण पर सवाल उठाया। तेलंगाना उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का हवाला देने के लिए आधार कार्ड के उपयोग का जिक्र करते हुए, न्यायमूर्ति माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी की 'आप कहते हैं कि आप निष्पक्ष रहे हैं। हम कह रहे हैं कि ऐसा नहीं है।' जब सिंहवी ने यह तर्क दिया कि तेलंगाना उच्च न्यायालय के समक्ष सुनवाई के दौरान गलत दस्तावेज को सुधार लिया गया था, तो न्यायमूर्ति माहेश्वरी की अध्यक्षता वाली पीठ ने टिप्पणी की कि इस तरह के सुधार से कथित रूप से मनगढ़ंत सामग्री पर आधारित प्रारंभिक फाइलिंग को ठीक नहीं किया जा सकता है। पीठ ने कहा कि आप इसे छोटी सी गलती कैसे कह सकते हैं?
क्या है मामला?
कांग्रेस नेता ने 5 अप्रैल को आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के पास कई पासपोर्ट और विदेश में संपत्ति है, जिनका जिक्र राज्य में 9 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनावों के लिए मुख्यमंत्री के चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया था। इसी वजह से अपने दावों को साबित करने के लिए कथित तौर पर जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। खेड़ा ने 7 अप्रैल को हाईकोर्ट का रुख किया था और अपना आवासीय पता हैदराबाद का बताया। खेड़ा ने हाईकोर्ट से गुजारिश की कि अगर उन्हें गिरफ्तार किया जाता है, तो उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया जाए। 10 अप्रैल को हाईकोर्ट ने खेड़ा को एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दे दी और उन्हें संबंधित अदालत में याचिका दायर करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया था।
15 अप्रैल को असम सरकार ने यह दलील दी थी कि तेलंगाना हाईकोर्ट में खेड़ा की ओर से दायर की गई याचिका कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और यह ‘फोरम शॉपिंग’ (अपनी पसंद की अदालत चुनने की कोशिश) के समान है। इसमें कहा गया था कि अधिकार क्षेत्र की सीधे तौर पर कमी थी। अपराध असम में हुआ था और एफआईआर भी असम में ही दर्ज की गई थी। इसमें यह भी कहा गया कि अग्रिम जमानत की अर्जी एक मनगढ़ंत दस्तावेज पेश करके दायर की गई थी, जिसका एकमात्र मकसद तेलंगाना हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र को साबित करना था।
जब खेड़ा बोले-क्या मैं संगीन अपराधी हूं; कोर्ट ने पूछा-क्या यह छोटी गलती थी
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने असम की अदालत में जाने के लिए मंगलवार तक का समय मांगते हुए कहा, क्या मैं कोई संगीन अपराधी हूं कि मुझे यह राहत भी न दी जाए? उन्होंने यह भी दलील दी कि दस्तावेज जमा करने में हुई एक छोटी सी गलती के लिए किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन नहीं किया जाना चाहिए। इस पर शीर्ष अदालत ने पूछा, क्या यह सचमुच एक छोटी सी गलती है? खेड़ा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने जोर देकर कहा कि आधार कार्ड गलत तरीके से पेश होना एक वास्तविक भूल थी और इसमें किसी भी तरह की कोई जालसाजी नहीं की गई थी। उन्होंने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट का पिछला आदेश असम की अदालत के फैसले को प्रभावित कर सकता है। लेकिन पीठ ने स्पष्ट किया कि उस समय भी यह बात साफ कर दी गई थी और अब फिर से यह स्पष्ट किया जाता है कि पिछले आदेश में की गई टिप्पणियां खेड़ा की याचिका पर विचार करते समय असम की अदालत के फैसले को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करेंगी।