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Parliament Session: संसद में 'रौद्र' रूप दिखाने को तैयार विपक्ष, स्पीकर-NEET, UGC, अग्निवीर पर होगा हल्लाबोल
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संसद सत्र पर विपक्ष की नजर।
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अमर उजाला।
विस्तार
मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का पहला संसद सत्र 24 जून से प्रारंभ हो रहा है। विपक्ष की तरफ से पहले ही यह इशारा कर दिया गया है कि इस बार सत्ता पक्ष को विपक्ष का 'रौद्र' रूप देखने को मिलेगा। यानी, संसद सत्र के हंगामेदार रहने की उम्मीद है। एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच पहला टकराव 'स्पीकर' पद के चुनाव को लेकर हो सकता है। अतीत में लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद का चुनाव सर्वसम्मति से होता रहा है। इस बार वैसी स्थिति नजर नहीं आ रही। भाजपा ने सांसद भर्तृहरि महताब को लोकसभा का प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस पर सवाल खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह संसदीय परंपरा के खिलाफ है। सबसे वरिष्ठ सांसद को ही प्रोटेम स्पीकर के पद पर नियुक्त करने की परंपरा रही है। राहुल गांधी, नीट और यूजीसी नेट के पेपर लीक पर मोदी सरकार को घेरेंगे, तो वहीं दूसरी तरफ सेना में अग्निवीर योजना को लेकर भी सरकार पर हल्ला बोल करेंगे। इसके अलावा, कांग्रेस और टीएमसी ने तीन नए कानूनों पर भी मोदी सरकार को घेरने का संकेत दे दिया है। ये कानून तब पारित किए गए थे, जब रिकॉर्ड 146 विपक्षी सांसदों को निलंबित कर दिया गया था।लोकसभा चुनाव के बाद से ही विपक्ष लगातार अपनी सक्रियता दिखा रहा है। खासतौर से राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी के अलावा आरजेडी व आप नेता, एनडीए सरकार पर निशाना साधने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे। सबसे पहला मुद्दा, लोकसभा स्पीकर का रहेगा। अभी तक इस पद का चुनाव सर्वसम्मति से ही होता रहा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश कहते हैं, प्रोटेम स्पीकर के पद पर कोडिकुन्निल सुरेश का हक बनता है। सरकार की यह मानसिकता पूरी तरह से बुलडोजर मानसिकता है। सरकार पहले ही दिन से पंगा लेने में लगी हुई है।
कांग्रेस पार्टी के सांसद कोडिकुन्निल सुरेश और भाजपा के वीरेंद्र कुमार, ये दोनों ही 18वीं लोकसभा में अपना आठवां कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद वीरेंद्र कुमार को, तो वहीं 2014 में कमलनाथ को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया था। वीरेंद्र कुमार अब केंद्रीय मंत्री बन चुके हैं। ऐसे में कोडिकुन्निल सुरेश को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया जाना चाहिए था। भाजपा ने बीजेडी से 6 और भाजपा से सातवां कार्यकाल पूरा कर रहे सांसद भर्तृहरि महताब को प्रोटेम स्पीकर बना दिया है। ऐसे में स्पीकर के मुद्दे पर टकराव संभव है। 26 जून को नए लोकसभा अध्यक्ष के पद पर चुनाव होना है। विपक्षी दलों का प्रयास है कि जदयू और टीडीपी को स्पीकर व डिप्टी स्पीकर पद लेने के लिए कोशिश करनी चाहिए। गठबंधन के नेता संजय राउत कह चुके हैं कि स्पीकर के लिए टीडीपी अपना उम्मीदवार उतारती है, तो इंडिया गठबंधन उसका समर्थन करेगा।
एनडीए को 293 सांसदों का समर्थन हासिल है, जबकि इंडिया गठबंधन के पास 233 सांसदों का समर्थन है। संसद सत्र में दूसरा बड़ा मुद्दा, जिस पर विपक्ष का हल्लाबोल हो सकता है, वह नीट का पेपर है। राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, आप सांसद संजय सिंह व इंडिया गठबंधन के दूसरे सहयोगी दल यह बात कह चुके हैं कि वे मेडिकल परीक्षा का मुद्दा संसद में उठाएंगे। राहुल गांधी ने कहा है कि हिंदुस्तान में लगातार पेपर लीक हो रहे हैं। नरेंद्र मोदी या तो उसे रोक नहीं पा रहे या रोकना ही नहीं चाहते। भाजपा शासित राज्य पेपर लीक का एपिसेंटर और शिक्षा माफियाओं की लेबोरेटरी बन गए हैं। संसद सत्र में पेपर लीक का मामला, जोरदार तरीके से उठाया जाएगा। राहुल ने इसी सप्ताह हुई प्रेसवार्ता में कहा था, भाजपा सरकार शिक्षा व्यवस्था को चौपट कर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। इंडिया गठबंधन ऐसा कभी नहीं होने देगा। पेपर लीक के पीछे जो भी लोग जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
बतौर राहुल गांधी, पेपर लीक पर सख्त कानून, आफ्टर द फैक्ट है। वह होना चाहिए। बिहार सरकार को लेकर राहुल ने कहा, मेरिट के आधार पर जॉब नहीं दी जा रही। केवल विचारधारा के आधार पर वाइस चांसलर बनाए जा रहे हैं। परीक्षा लेने के स्ट्रक्चर में विचारधारा वाले लोगों को लाएंगे, तो यही काम होगा। बतौर राहुल गांधी, आप दोषी लोगों को ढूंढेंगे, तो जिन लोगों ने हिंदुस्तान के संस्थानों को बर्बाद किया है, जो पहले ऑब्जेक्टिव हुआ करते थे, निष्पक्ष हुआ करते थे, वे आज ऑडियोलॉजिकल बना दिए गए हैं।
जब तक हिन्दुस्तान के संस्थान इनके हाथों से छीने नहीं जाते हैं, वहां से विचारधारा वाले लोगों की जगह निष्पक्ष लोग नहीं बिठाए जाएंगे, तब तक वहां नहीं होंगे। बतौर राहुल, तब यह नहीं रुकेगा। राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा, जब तक भाजपा रहेगी तब तक ये सब जारी रहेगा। विपक्ष के जोरदार हमले के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को प्रेसवार्ता बुलानी पड़ी। उन्होंने कहा, फिलहाल सभी मामलों की इंटरनल इंक्वायरी की जा रही है। एनटीए की व्यवस्था को सुधारने के लिए एक कमेटी का भी गठन किया जा रहा है। बतौर प्रधान, मैं इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को स्वीकार करता हूं। मैं इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेता हूं। उन्होंने नीट और यूजीसी नेट का मामला अलग-अलग बताया है। बच्चों के हित हमारे लिए सर्वोपरि है। उनके भविष्य के साथ किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा, जो भी दोषी होगा उसे बख्शा नहीं जाएगा। हम जल्द ही लॉजिकल एंड तक पहुंचेंगे।
18 जून को हुई यूजीसी-नेट परीक्षा को भी सरकार ने रद्द कर दिया था। इस परीक्षा में भी गड़बड़ी होने की बात सामने आई थी। सीबीआई को इस मामले की जांच सौंपी गई है। नीट का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा है। इस मामले की अभी सुनवाई चल रही है। विपक्ष ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए), जो इन परीक्षाओं का आयोजन करती है, उस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सरकार को मालूम है कि विपक्ष, पेपर लीक और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को लेकर संसद में हंगामा कर सकता है।
इससे पहले ही शनिवार को सरकार ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक समिति गठित कर दी है। कमेटी के अन्य सदस्यों में एम्स दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया, हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीजे राव, आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर एमेरिटस राममूर्ति के., पीपुल स्ट्रांग के सह संस्थापक पंकज बंसल और आईआईटी दिल्ली के डीन (छात्र मामले) प्रो. आदित्य मित्तल शामिल हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव गोविंद जायसवाल को कमेटी का सदस्य सचिव बनाया गया है। यह समिति दो महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। शुक्रवार रात केंद्र सरकार ने नीट और यूजीसी जैसे परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने के लिए एंटी पेपर लीक कानून लागू किया है। 21 जून की रात को इस कानून की अधिसूचना जारी की गई है। अब पेपर लीक के दोषी को 10 साल तक की कैद और उस पर एक करोड़ रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव के दौरान अग्निवीर योजना को लेकर कहा था कि अगर इंडिया गठबंधन की सरकार आती है, तो इस भर्ती योजना को रद्द कर दिया जाएगा। कांग्रेस पार्टी के पूर्व सैनिक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल रोहित चौधरी ने कह चुके हैं कि एक ही यूनिट में व एक ही परिस्थिति में 'शहीद' होने पर/रिटायरमेंट होने पर, कई बातों में अंतर आ जाता है। 'सर्विस' के दौरान 'अग्निवीर सैनिक' को एक 'रेगुलर सैनिक' की तुलना में बहुत कुछ नहीं मिलता है। अग्निवीर के 'शहीद' होने पेंशन, ग्रेच्युटी, शहीद का दर्जा, मेडिकल सुविधा आश्रित पत्नी, बच्चे व माता-पिता को और कैंटीन सुविधा नहीं मिलेगी। फुल पे, बचे हुए सेवा कार्यकाल से लेकर सिर्फ चार साल तक ही मिलेगी, क्योंकि अग्निवीर की कॉन्ट्रैक्चुअल सेवा सिर्फ चार साल की है।
जयराम रमेश ने कहा है कि '25 दिसंबर 2023 को राष्ट्रपति ने भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 को अपनी सहमति दी थी। इन तीन दूरगामी विधेयकों को बिना उचित बहस और चर्चा के संसद से मनमाने ढंग से पारित कर दिया गया था। जब ये विधेयक पारित किए गए जा रहे थे तब 146 सांसदों को लोकसभा और राज्यसभा से निलंबित कर दिया गया था। जयराम रमेश ने दावा किया है कि 'इससे पहले इन विधेयकों को देश भर के पक्षकारों के साथ विस्तार से बातचीत के बिना और कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के कई सांसदों (जो समिति के सदस्य थे) के लिखित और बड़े पैमाने पर असहमति से भरे नोट को नजरअंदाज करते हुए गृह मामलों पर स्थायी समिति के माध्यम से जबरन अनुमोदित कर दिया गया था।'
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने तीन नए आपराधिक कानूनों को लेकर कहा, यह कानून उस समय पारित किए गए थे, जब 146 विपक्षी सांसदों को संसद से निलंबित कर दिया गया था। यह संसद के 'सामूहिक विवेक' को प्रतिबिंबित नहीं करता है। तिवारी ने कानून मंत्री मेघवाल पर 'सच्चाई से कंजूसी' करने का आरोप लगाया। इन तीनों कानूनों का क्रियान्वयन भारत की न्याय व्यवस्था में 'बाधा डालने के समान' होगा। तिवारी ने इन तीनों कानूनों के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग की है। ममता बनर्जी और अखिलेश यादव भी इस मुद्दे पर एनडीए सरकार को घेरेंगे।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने पिछले दिनों कहा था, मैं आपको एक बात बता सकती हूं, अपनी कुर्सी की पेटी बांध लें, क्योंकि संसद का (सियासी) तापमान बहुत बढ़ने वाला है। अब सदन की कार्यवाही तानाशाह तरीके से नहीं चलेगी, जैसा कि पहले होता था। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन (लोकसभा) अध्यक्ष बनता है और कौन डिप्टी स्पीकर बनता है। राहुल गांधी के 14 मिनट के भाषण में अब आपको 11 मिनट तक (लोकसभा) अध्यक्ष नहीं दिखेंगे। मैं आपको यह बता सकती हूं और यही लोकतंत्र की ताकत है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा, भाजपा के राज में पेपर माफिया, एक के बाद एक, हर एग्जाम में धांधली कर रहा है। ये देश के खिलाफ किसी की बड़ी साजिश भी हो सकती है। पुलिस भर्ती की परीक्षा का पेपर लीक होगा तो कानून-व्यवस्था नहीं सुधरेगी। जिससे देश-प्रदेश में अशांति और अस्थिरता बनी रहेगी। नीट की परीक्षा में घपला होगा तो ईमानदार लोग डॉक्टर नहीं बन पाएंगे। देश के लोगों के इलाज के लिए भविष्य में डॉक्टरों की कमी और बढ़ जाएगी। बेईमान लोग, जनता के जीवन के लिए खतरा बन जाएंगे।