फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Parliament Monsoon Session begins today know Government Agenda Bills Opposition Issues PM Modi Rahul Gandhi

Explainer: संसद का मानसून सत्र, इन विधेयकों पर सरकार का जोर, विपक्ष की ओर से गूंजेंगे कौन से मुद्दे?

Mon, 20 Jul 2026 11:11 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 20 Jul 2026 11:11 AM IST
विज्ञापन
सार
संसद के मानसून सत्र में सरकार का ध्यान किन विधेयकों को पारित कराने पर रहेगा? इनमें से किन विधेयकों पर जबरदस्त विवाद की स्थिति है? सरकार के लिए इस वक्त संसद में इन विधेयकों को पारित कराने के लिए कितना समर्थन है? इसके अलावा विपक्ष के पास इस वक्त क्या-क्या मुद्दे हैं, जिस पर लोकसभा और राज्यसभा दोनों में ही हंगामा होना तय है? आइये जानते हैं...
loader
Parliament Monsoon Session begins today know Government Agenda Bills Opposition Issues PM Modi Rahul Gandhi
संसद के मानसून सत्र का आज से आगाज। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत हो चुकी है। बजट सत्र की तरह ही एक बार फिर लोकसभा और राज्यसभा में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर असहमति बन सकती है। खासकर केंद्र की तरफ से पेश होने वाले संभावित परिसीमन विधेयक को लेकर। सरकार ने अब तक संसद के अपने एजेंडे में इस विधेयक का जिक्र नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि सरकार सत्र के बीच में इसे पेश कर सकती है। दूसरी तरफ नीट-यूजी पेपर लीक, राम मंदिर दान में गबन और कुछ अन्य मुद्दे भी संसद में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव का कारण बन सकते हैं।


ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर संसद के मानसून सत्र में सरकार का ध्यान किन विधेयकों को पारित कराने पर रहेगा? इनमें से किन विधेयकों पर जबरदस्त विवाद की स्थिति है? सरकार के लिए इस वक्त संसद में इन विधेयकों को पारित कराने के लिए कितना समर्थन है? इसके अलावा विपक्ष के पास इस वक्त क्या-क्या मुद्दे हैं, जिस पर लोकसभा और राज्यसभा दोनों में ही हंगामा होना तय है? आइये जानते हैं...

कौन से विधेयकों को पारित कराने पर सरकार का जोर?

संसद के मानसून सत्र में सरकार का मुख्य ध्यान अपने विधायी एजेंडे को पूरा करने और कई अहम विधेयकों को पारित कराने पर रहेगा। 

1. परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक: यह सरकार के सबसे प्रमुख और महत्वाकांक्षी एजेंडों में से एक है। इसका मुख्य मकसद 2029 के आम चुनावों तक संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करना है। इस विधेयक के जरिए लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या को 550 से बढ़ाकर 850 करने का भी प्रस्ताव है। इस संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, जिसे जुटाने के लिए वह अन्य दलों का समर्थन हासिल करने का प्रयास कर रही है।

2. विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026: इस विधेयक का उद्देश्य विदेशी फंडों को हासिल करने और उनके इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है। हालांकि, यह सत्र के सबसे विवादास्पद विधेयकों में से एक हो सकता है, क्योंकि विपक्ष को आशंका है कि इससे कुछ विशेष गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और संस्थाओं पर असर पड़ सकता है।

3. सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026: इसके जरिए  सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव है।

4. आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026: यह विधेयक एक अध्यादेश का स्थान लेगा, जिसका उद्देश्य सरकारी बॉन्डों में निवेश करने वाले विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) को टैक्स (पूंजीगत कर) में छूट प्रदान करना है।

5. राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026: इस विधेयक के तहत विशेष रूप से वंदे मातरम के गायन में बाधा डालने या अपमानित करने को एक आपराधिक कृत्य बनाने का प्रस्ताव शामिल है।

6. जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026: इसके जरिए जन्म और मृत्यु के देरी से होने वाले पंजीकरण के नियमों को और सख्त बनाया जाएगा।

7. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास (संशोधन) विधेयक, 2026: इसका उद्देश्य विलंबित भुगतानों के तंत्र को मजबूत करके, मध्यस्थता लागू करके और व्यापार नियमों को आसान बनाकर एमएसएमई क्षेत्र के कानूनों का आधुनिकीकरण करना है।

इसके अलावा, कुछ ऐसे विधेयक भी हैं जिन पर सरकार फिलहाल बहुत सावधानी बरत रही है...

संसद का मानसून सत्र।
संसद का मानसून सत्र। - फोटो : अमर उजाला
8. विकसित भारत शिक्षा प्रतिष्ठान विधेयक 2025: उच्च शिक्षा को विनियमित करने वाले इस विधेयक को भी पेश किया जा सकता है। हालांकि, कुछ विवादों के चलते फिलहाल इसके पेश होने की संभावना कम है। 

9. 130वां संविधान संशोधन विधेयक: गंभीर अपराधों में लगातार 30 दिनों से अधिक समय तक गिरफ्तार रहने वाले मंत्रियों को पद से हटाने के प्रावधान वाले इस बिल को भी सरकार ने फिलहाल के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया है।


इनमें किन विधेयकों पर सबसे ज्यादा विवाद और क्यों?

1. परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक 

संघवाद पर खतरा और दक्षिणी राज्यों का डर: विपक्षी और क्षेत्रीय दलों का आरोप है कि सरकार इसके जरिए पिछले दरवाजे से परिसीमन लागू कर रही है, जो संघवाद के खिलाफ है। उनका तर्क है कि अगर 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों का बंटवारा होता है तो दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी सिकुड़ जाएगी और राष्ट्रीय राजनीति में उनका प्रभाव कम हो जाएगा।

लिखित गारंटी की मांग: विपक्षी दल इस बात से आशंकित हैं, क्योंकि पहले वितरित किए गए ड्राफ्ट में सीटों की बढ़ोतरी का विवरण नहीं था। कुछ विपक्षी दल मांग कर रहे हैं कि विधेयक में सभी राज्यों के लिए सीटों में एक समान 50% बढ़ोतरी का स्पष्ट रूप से जिक्र किया जाना चाहिए। 


2. विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026

सरकार का तर्क है कि इस विधेयक का मूल मकसद विदेशी फंड्स को हासिल करने और उनके इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि इन प्रस्तावित बदलावों का विदेशी चंदा प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) और विशेष रूप से ईसाई संगठनों पर अनुचित और गहरा प्रभाव पड़ सकता है।


3. विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025

यह विधेयक उच्च शिक्षा को विनियमित करने के लिए एक एकल निकाय बनाने का प्रस्ताव करता है। हालांकि, इसके जबरदस्त केंद्रीकरण के प्रावधानों के कारण इसे खुद सत्ता पक्ष के भीतर से ही कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इसी विरोध के कारण सरकार को सावधानी बरतते हुए इससे जुड़ी संयुक्त संसदीय समिति की बैठक को भी रद्द करना पड़ा है।

सरकार के पास विधेयकों को पारित कराने के लिए कितना समर्थन?

मौजूदा समय में एनडीए के पास 293 सांसद हैं। इनमें भाजपा के 240 सांसद हैं, जबकि सहयोगी दलों के 53 सांसद भी शामिल हैं। 

1. टीएमसी में टूट: तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट का दावा है कि उनके पास कुल 28 सांसदों में से 19-20 सांसदों का समर्थन है। ऐसे में अगर यह सांसद एनडीए को समर्थन देते हैं तो इस गठबंधन को कुल 313 सांसदों तक का समर्थन मिल सकता है। 

2. शिवसेना में टूट: वहीं, शिवसेना के भी नौ में से छह सांसद टूट चुके हैं। यह सांसद शिंदे गुट के साथ आए हैं, जो कि एनडीए का अंग हैं। इस लिहाज से एनडीए का कुल समर्थन 320 तक पहुंच सकता है। 

3. द्रमुक-कांग्रेस में फूट: तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के बाद विजय की पार्टी टीवीके को कांग्रेस ने समर्थन दे दिया। इसे लेकर द्रमुक ने नाराजगी जताई है और कांग्रेस पर अपने चुनाव पूर्व बने गठबंधन को तोड़ने का आरोप लगाया। नाराजगी जताते हुए द्रमुक हाल ही में हुई विपक्षी गठबंधन- इंडिया की बैठक में भी नहीं पहुंचा था। अटकलें लग रही हैं कि द्रमुक मुद्दों के आधार पर एनडीए सरकार को समर्थन दे सकती है। द्रमुक से 22 सांसद हैं। ऐसा होता है तो एनडीए का आंकड़ा बढ़कर 342 हो जाएगा।  

संसद के मानसून सत्र का आज से आगाज।
संसद के मानसून सत्र का आज से आगाज। - फोटो : अमर उजाला

..तो क्या लोकसभा में अहम विधेयक पारित हो सकते हैं?

यूं तो केंद्र सरकार की तरफ से जो विधेयक पेश किए जा रहे हैं, उन्हें साधारण बहुमत से पारित कराया जा सकता है। हालांकि, कुछ विधेयक संविधान संशोधन से जुड़े हैं, जिन्हें पारित कराने के लिए सरकार को कुछ टूटे हुए सांसदों के साथ विपक्ष के कुछ दलों के अपने पक्ष में आने की उम्मीद करनी होगी। 

परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयकों को लोकसभा में पारित कराने के लिए सरकार को लोकसभा के कुल सदस्यों की संख्या का दो-तिहाई समर्थन हासिल करना अनिवार्य है। यानी 543 सांसदों वाले सदन में कम से कम 362 सांसदों का समर्थन। मौजूदा समय में सदन में 540 सांसद हैं। यानी एनडीए को 360 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। फिलहाल उसके 293 सांसद हैं और टीएमसी-शिवसेना में टूट से उसे अधिकतम 27 सांसदों का अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है। यानी उसका आंकड़ा 320 तक पहुंच सकता है। यानी अब भी 360 के जादुई आंकड़े से 40 सीट दूर। द्रमुक के 22 सांसदों का समर्थन मिलता है तो ये आंकड़ा 242 तक पहुंचेगा। यानी जादुई आंकड़े से 18 कम। 

विपक्ष के पास क्या मुद्दे, लोकसभा-राज्यसभा में हंगामा क्यों तय?

1. नीट पेपर लीक और छात्रों के मुद्दे
विपक्ष की तरफ से नीट परीक्षा में हुई कथित अनियमितताओं को जोर-शोर से उठाने की बात कही गई है। विपक्ष छात्रों के विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है। खुद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर मुखरता दिखाई है।

2. राम मंदिर चंदा चोरी का आरोप
विपक्ष, खासकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए आए चंदे में कथित गबन के मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे। विपक्षी नेताओं ने इस मामले में ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की एक स्वतंत्र जांच कराने और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।

संसद के मानसून सत्र का आज से आगाज।
संसद के मानसून सत्र का आज से आगाज। - फोटो : अमर उजाला
3. सोनम वांगचुक का प्रदर्शन
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर पर उनके अनशन से जबरन हटाकर अस्पताल ले जाने की पुलिस की कार्रवाई का विपक्ष कड़ा विरोध कर रहा है। माना जा रहा है कि विपक्ष इस मुद्दे को सरकार के विरोध में उठाएगा, जिसे लेकर हंगामे के भी आसार हैं।

4. मणिपुर की स्थिति
विपक्षी दल इस सत्र में मणिपुर के हालातों पर भी सरकार से चर्चा और जवाबदेही की मांग करेंगे।

5. आर्थिक और नीतिगत मुद्दे
विपक्ष महंगाई, भ्रष्टाचार, घोटालों, पेट्रोल में इथेनॉल और विदेश नीति की विफलताओं जैसे विषयों पर सरकार को घेरेगा। इसके अलावा विपक्षी दल सरकार पर संस्थाओं पर कब्जे और राजनीतिक दलों को तोड़ने का आरोप लगाते हुए इस मुद्दे को भी संसद में उठाएंगे। इसे लेकर पहले ही रविवार को विपक्ष ने सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार कर दिया था। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed