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Parliament live updates: राज्यसभा में बोले आनंद शर्मा- सरकार के हर निर्णय और नीति को स्वीकार करना जरूरी नहीं...

Fri, 05 Feb 2021 11:39 AM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Fri, 05 Feb 2021 11:39 AM IST
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Parliament live updates:  congress leader Anand Sharma said in Rajya Sabha It is not necessary to accept every decision of the government
राज्यसभा में बोलते आनंद शर्मा - फोटो : ANI

कृषि कानून के खिलाफ सड़क से संसद तक संग्राम जारी है। राज्यसभा में शुक्रवार को विपक्ष ने एक बार फिर किसानों के मुद्दे को लेकर मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला और कृषि कानून वापस लेने की मांग की। राज्यसभा में बोलते हुए कांग्रेसी नेता आनंद शर्मा ने कहा कि सरकार के हर निर्णय और नीति को जनता स्वीकार करे और विपक्ष अनुमोदन करे ये ना तो अनिवार्य है और ना ही स्वीकार्य है और यदि ऐसा हो तो हम जनतंत्र नहीं रहे। राज्यसभा में शुक्रवार को विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्यों ने 26 जनवरी को लाल किले में राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किए जाने की घटना की जांच कराए जाने पर भी बल दिया।

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कांग्रेस के सांसद आनंद शर्मा ने कोरोना संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के प्रयासों की सराहना की। साथ ही उन्होंने कोरोना काल में जान गंवाने वाले डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों और किसान आंदोलन के दौरान मारे गए 194 किसानों को श्रद्धाजंलि दी। आनंद शर्मा ने 26 जनवरी की हिंसा पर अपना कर्तव्य निभाते हुए जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों को भी श्रद्धांजलि दी।
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कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने किसानों के आंदोलन के बारे में बोलते हुए कहा कि प्रजातंत्र में एक मत हो, एक विचार हो ये ना संभव है ना स्वीकार्य है। भारत की परंपरा चर्चा और चिंतन की रही है, वाद-विवाद की संवाद की रही है। सरकार के हर निर्णय और नीति को जनता स्वीकार करे और विपक्ष अनुमोदन करे ये ना तो अनिवार्य है और ना ही स्वीकार्य है और यदि ऐसा हो तो हम जनतंत्र नहीं रहे।

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किसान आंदोलन को बदनाम किया जा रहा : संजय राउत

शिवसेना नेता संजय राउत ने आरोप लगाया कि किसानों के आंदोलन को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है और किसानों के लिए खालिस्तानी, आतंकवादी जैसे शब्दों का उपयोग किया जा रहा है। राष्ट्रपति अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में आगे हो रही चर्चा में भाग लेते हुए राउत ने आरोप लगाया कि सरकार अपने आलोचकों को बदनाम करने का प्रयास करती है और किसान आंदोलन के साथ भी ऐसा ही किया जा रहा है।
शिवसेना सदस्य ने आरोप लगाया कि सरकार सवाल पूछने वाले को देशद्रोही बताने लगती है। उन्होंने कहा कि लोकसभा सदस्य शशि थरूर सहित कई लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है। राउत ने 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान लाल किले पर हुई घटना और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का जिक्र करते कहा ‘‘ वह दुखद घटना है। लेकिन इस मामले में असली आरोपियों को नहीं पकड़ा गया है और निर्दोष किसानों को गिरफ्तार कर लिया गया है।’’

किसानों पर जबरन कानून थोपे नहीं जा सकते : सतीश चंद्र मिश्रा
बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्र ने कहा कि सरकार किसानों के आंदोलन को रोकने के लिए खाई खोद रही है और पानी, खाना, शौचालय जैसी सुविधाएं बंद कर रही है जो मानवाधिकार हनन है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों पर नए कृषि कानून नहीं थोप सकती। मिश्र ने कहा कि सरकार नए कानूनों को डेढ़ साल के लिए स्थगित करने की बात कर रही है। ऐसे में उसे अपनी जिद छोड़कर इन कानूनों को वापस ले लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि नए कानूनों में कई खामियां हैं जिनसे किसानों को भय है कि उनकी जमीन चली जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ठेकेदारी के नाम पर जमींदारी व्यवस्था को वापस लाना चाहती है।

मोदी सरकार में बेरोजगारी चरम पर : मिश्र
बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्र ने सरकार की विनिवेश नीति की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सरकार अब एलआईसी, बैंकों और बंदरगाहों को भी निजी हाथों में सौंपने जा रही है। उन्होंने कहा कि लोगों को एलआईसी के प्रति भरोसा रहा है और सरकार उसे भी तोड़ने पर लगी है। उन्होंने कहा कि नोटबंदी के कारण अर्थव्यवस्था की स्थिति खराब हो गई। इसके अलावा बेरोजगारी चरम पर पहुंच गई है।
मिश्र ने 26 जनवरी को लाल किले की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि इस मामले में दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का जिक्र करते हुए कहा कि अगर सरकार की नीयत साफ है, तो उसे कानून में शामिल किया जाना चाहिए।

कानून की मांग करने वाले ही आज विरोध कर रहे : विनय सहस्रबुद्धे

चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा के डॉ. विनय पी सहस्रबुद्धे ने कहा कि किसानों के मुद्दे पर सरकार को अहंकार छोड़ने की बात कही जाती है, लेकिन सरकार ने लगातार बातचीत की पेशकश की और तीनों नए कृषि कानूनों को डेढ़ साल तक निलंबित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा, ''हम अभी भी बात करने के लिए तैयार हैं। यह लचीलापन नहीं तो और क्या है। अभी कुछ ही राज्यों के किसान धरने पर बैठे हैं। अगर मान लीजिये कि अलग अलग जगहों पर बड़ी संख्या में लोग धरने पर इसी तरह बैठ जाएं, तो क्या इसका मतलब यह है कि हम गृह युद्ध चाहते हैं। सदन को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और ऐसी टिप्पणियां करने से बचना चाहिए। जिन लोगों ने पहले ऐसे कानूनों की मांग की थी, आज वे ही इनका विरोध कर रहे हैं।''

सहस्रबुद्धे ने कहा कि पहले कई जिले पिछड़े हुए थे, लेकिन सरकार ने जमीनी स्तर पर समस्याओं की पहचान कर समय रहते विकास के लिए राशि जारी की और ये जिले अब मुख्यधारा से जुड़ गए हैं। उन्होंने कहा कि हमने विकास के लिए यह नहीं सोचा कि कौन से राज्य में कौन से दल की सरकार है। और यह सब काम से संभव हुआ है। हमने अधिकारों का विकेंद्रीकरण किया है।

हिंसा की घटनाओं में कमी दर्ज की गई 
भाजपा सदस्य विनय सहस्रबुद्धे ने कहा कि गृह मंत्रालय की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, साल 2010 में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हिंसा संबंधी घटनाए 2013 थीं, जो 2014 में 1000 हुईं और आज घट कर 230 हो गई हैं। हताहत होने वालों की संख्या भी कम हुई है। उन्होंने कहा कि देश के निर्माण में आयकरदाताओं की अहम भूमिका होती है। 2014 में आयकरदाताओं की संख्या केवल 3.31 करोड़ थी जो आज 2020 में दोगुनी हो कर 6.48 करोड़ हो गई है। उन्होंने कहा कि विदेश नीति के मोर्चे पर भी भारत का काम उल्लेखनीय रहा है। इसका उदाहरण कोविड-19 टीका कूटनीति है जो संकट के समय बेहद उपयोगी साबित हो रही है।

 बाजवा ने कृषि कानूनों को डेथ वारंट बताया 

कांग्रेस के प्रताप सिंह बाजवा ने अपनी बात पंजाबी में रखी। उन्होंने कहा कि सितंबर माह में तीनों कृषि कानून पारित किए गए। उन्होंने कहा ‘‘तब भी मैंने इन कानूनों को किसानों का ‘डेथ वारंट’ बताया था। मेरी बात सही निकली। यह कानून कुछ बड़े कारपोरेट घरानों को लाभ देने के लिए लाए गए हैं। कोविड-19 का कहर पूरी दुनिया पर टूटा। अर्थव्यवस्था तबाह हो गई, लोगों की नौकरियां चली गईं, प्रवासी मजदूर बेहाल हो गए। ऐसे में सरकार को इन कानूनों को लाने की क्या जल्दी थी? क्या कुछ समय तक इंतजार नहीं किया जा सकता था? ये कानून किसानों के हित में तो हैं ही नहीं। फिर इन्हें जल्दबाजी में अध्यादेशों का रास्ता चुन कर क्यों लाया गया ?’’

बाजवा ने कहा ‘‘1971 में बांग्लादेश के लिए हुई लड़ाई में पाकिस्तान के 93 हजार युद्धबंदी हमारे पास थे। हमने दो साल तक उनके खाने पीने रहने का इंतजाम किया। लेकिन आज आपने अपने ही किसानों का बिजली, पानी बंद कर दिया। यह क्या है ? किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि महात्मा गांधी के देश में यह सब होगा। कल 12 दलों के नेता गाजीपुर गये, उन्हें पुलिस ने अंदर जाने नहीं दिया। क्या यह लोकतंत्र है ?’’
 

मैं टूटा, तो सब टूटेगा : राकेश सिन्हा
राज्यसभा में भाजपा सांसद राकेश सिन्हा ने आम आदमी पार्टी के सांसद के लिए कविता पढ़ी। 26 जनवरी की घटना पर संजय सिंह के कल के भाषण का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘ मैं टूटा, तो सब टूटेगा, जो कुछ भी है वह भी छूटेगा, मैं हूं जो आज़ाद वतन है, मैं भारत का संविधान हूं, लाल किला से बोल रहा हूं।''
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