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FARA दस्तावेजों से खुलासा: विदेश मामलों के विशेषज्ञ बोले- US में लॉबिंग पर हर महीने करोड़ों खर्च कर रहा PAK
Mon, 01 Jun 2026 12:22 AM IST
Pavan
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Mon, 01 Jun 2026 12:22 AM IST
सार
अमेरिकी एफएआरए दस्तावेजों के अनुसार पाकिस्तान वॉशिंगटन में लॉबिंग पर हर महीने करीब 9 लाख डॉलर खर्च कर रहा है। विदेश मामलों के विशेषज्ञ रॉबिंदर सचदेव ने दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने अमेरिका में तेजी से कूटनीतिक संपर्क बढ़ाए, जो उसकी बढ़ती चिंता और दबाव को दर्शाता है।
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रोबिंदर सचदेव, विदेश मामलों के विशेषज्ञ
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पाकिस्तान की सेना भले ही यह दावा कर रही हो कि हालिया भारत-पाक तनाव के दौरान भारत ने अमेरिका से युद्धविराम के लिए मध्यस्थता की मांग की थी, लेकिन अमेरिका में दर्ज आधिकारिक दस्तावेज एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहे हैं। अमेरिकी कानून फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (एफएआरए) के तहत सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों के अनुसार, पाकिस्तान इस समय वॉशिंगटन में अपनी छवि सुधारने और राजनीतिक समर्थन हासिल करने के लिए हर महीने करीब 9 लाख डॉलर (लगभग 7.5 करोड़ रुपये) खर्च कर रहा है।
यह भी पढ़ें- सत्यब्रत कुमार: ईडी के पूर्व विशेष निदेशक ने लिया VRS, इन कई हाई-प्रोफाइल मामलों में किया था जांच का नेतृत्व
'पाकिस्तान का कुल वार्षिक लॉबिंग खर्च 1-1.2 करोड़ डॉलर तक पहुंचा'
विदेश मामलों के विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेव ने एएनआई से बातचीत में बताया कि पाकिस्तान की सरकार और उसके अधिकारी अमेरिका में प्रभावशाली नेताओं और अधिकारियों तक पहुंच बनाने के लिए कई लॉबिंग फर्मों की सेवाएं ले रहे हैं। उनके मुताबिक, पाकिस्तान का कुल वार्षिक लॉबिंग खर्च 1 से 1.2 करोड़ डॉलर तक पहुंच चुका है। इसमें पाकिस्तान के गृह मंत्री की बैठकों की व्यवस्था करने के लिए 50 हजार डॉलर प्रति माह का अनुबंध शामिल है, जबकि व्यापार और आर्थिक मामलों को संभालने के लिए एक अन्य फर्म को हर महीने 2.5 लाख डॉलर दिए जा रहे हैं।
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लॉबिंग फर्म का खर्च बढ़ाकर 12 लाख डॉलर हुआ
रोबिंदर सचदेव ने यह भी बताया कि अक्तूबर में जिस लॉबिंग फर्म को 25 हजार डॉलर प्रतिमाह पर नियुक्त किया गया था, उसका अनुबंध हाल ही में बढ़ाकर 12 लाख डॉलर कर दिया गया है। इससे संकेत मिलता है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते दबाव और अपनी कूटनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर जनसंपर्क अभियान चला रहा है। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख और स्वयंभू फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने दावा किया था कि हालिया सैन्य तनाव के दौरान भारत ने सबसे पहले पीछे हटने के संकेत दिए थे। रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि भारत ने अमेरिकी नेतृत्व के माध्यम से मध्यस्थता की इच्छा जताई थी, जिसे पाकिस्तान ने क्षेत्रीय शांति के हित में स्वीकार किया।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान US में सक्रिय था पाकिस्तान
हालांकि, एफएआरए दस्तावेजों में दर्ज गतिविधियां इस दावे से मेल नहीं खातीं। दस्तावेजों के अनुसार, 6 से 9 मई 2025 के बीच पाकिस्तान से जुड़े प्रतिनिधियों ने अमेरिकी संसद, रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ लगभग 60 तात्कालिक बैठकें और संपर्क किए। यह वही अवधि थी जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। भारतीय रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 6 और 7 मई 2025 की रात भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकवाद से जुड़े नौ महत्वपूर्ण ठिकानों पर सटीक और समन्वित कार्रवाई की थी। इस अभियान को भारत की ओर से आतंकवाद के खिलाफ कड़ा जवाब माना गया।
यह भी पढ़ें- India Economy: 'पश्चिम एशिया संकट नहीं, निजी निवेश की कमी'; भारतीय अर्थव्यवस्था पर और क्या बोले सुरजीत भल्ला?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी दस्तावेज यह संकेत देते हैं कि एक ओर पाकिस्तान की सैन्य नेतृत्व सार्वजनिक रूप से आत्मविश्वास का प्रदर्शन कर रही थी, वहीं दूसरी ओर उसके प्रतिनिधि वॉशिंगटन में सक्रिय लॉबिंग के जरिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने और भारत की सैन्य कार्रवाई से निकलने का रास्ता तलाश रहे थे। एफएआरए में दर्ज करोड़ों डॉलर के ये अनुबंध पाकिस्तान की कूटनीतिक बेचैनी और अमेरिका में प्रभाव बढ़ाने की उसकी कोशिशों को उजागर करते हैं।
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'पाकिस्तान का कुल वार्षिक लॉबिंग खर्च 1-1.2 करोड़ डॉलर तक पहुंचा'
विदेश मामलों के विशेषज्ञ रोबिंदर सचदेव ने एएनआई से बातचीत में बताया कि पाकिस्तान की सरकार और उसके अधिकारी अमेरिका में प्रभावशाली नेताओं और अधिकारियों तक पहुंच बनाने के लिए कई लॉबिंग फर्मों की सेवाएं ले रहे हैं। उनके मुताबिक, पाकिस्तान का कुल वार्षिक लॉबिंग खर्च 1 से 1.2 करोड़ डॉलर तक पहुंच चुका है। इसमें पाकिस्तान के गृह मंत्री की बैठकों की व्यवस्था करने के लिए 50 हजार डॉलर प्रति माह का अनुबंध शामिल है, जबकि व्यापार और आर्थिक मामलों को संभालने के लिए एक अन्य फर्म को हर महीने 2.5 लाख डॉलर दिए जा रहे हैं।
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लॉबिंग फर्म का खर्च बढ़ाकर 12 लाख डॉलर हुआ
रोबिंदर सचदेव ने यह भी बताया कि अक्तूबर में जिस लॉबिंग फर्म को 25 हजार डॉलर प्रतिमाह पर नियुक्त किया गया था, उसका अनुबंध हाल ही में बढ़ाकर 12 लाख डॉलर कर दिया गया है। इससे संकेत मिलता है कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते दबाव और अपनी कूटनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर जनसंपर्क अभियान चला रहा है। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान के सेना प्रमुख और स्वयंभू फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने दावा किया था कि हालिया सैन्य तनाव के दौरान भारत ने सबसे पहले पीछे हटने के संकेत दिए थे। रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि भारत ने अमेरिकी नेतृत्व के माध्यम से मध्यस्थता की इच्छा जताई थी, जिसे पाकिस्तान ने क्षेत्रीय शांति के हित में स्वीकार किया।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान US में सक्रिय था पाकिस्तान
हालांकि, एफएआरए दस्तावेजों में दर्ज गतिविधियां इस दावे से मेल नहीं खातीं। दस्तावेजों के अनुसार, 6 से 9 मई 2025 के बीच पाकिस्तान से जुड़े प्रतिनिधियों ने अमेरिकी संसद, रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ लगभग 60 तात्कालिक बैठकें और संपर्क किए। यह वही अवधि थी जब भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। भारतीय रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 6 और 7 मई 2025 की रात भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकवाद से जुड़े नौ महत्वपूर्ण ठिकानों पर सटीक और समन्वित कार्रवाई की थी। इस अभियान को भारत की ओर से आतंकवाद के खिलाफ कड़ा जवाब माना गया।
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विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी दस्तावेज यह संकेत देते हैं कि एक ओर पाकिस्तान की सैन्य नेतृत्व सार्वजनिक रूप से आत्मविश्वास का प्रदर्शन कर रही थी, वहीं दूसरी ओर उसके प्रतिनिधि वॉशिंगटन में सक्रिय लॉबिंग के जरिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने और भारत की सैन्य कार्रवाई से निकलने का रास्ता तलाश रहे थे। एफएआरए में दर्ज करोड़ों डॉलर के ये अनुबंध पाकिस्तान की कूटनीतिक बेचैनी और अमेरिका में प्रभाव बढ़ाने की उसकी कोशिशों को उजागर करते हैं।