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India Economy: 'पश्चिम एशिया संकट नहीं, निजी निवेश की कमी'; भारतीय अर्थव्यवस्था पर और क्या बोले सुरजीत भल्ला?
Sun, 31 May 2026 05:34 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
एएनआई, कोलकाता
एएनआई, कोलकाता
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Sun, 31 May 2026 05:34 PM IST
सार
अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला ने कहा है कि भारत की आर्थिक सुस्ती की असली वजह पश्चिम एशिया संकट नहीं, बल्कि निजी निवेश की कमी है। उनके मुताबिक सरकार के खर्च से अर्थव्यवस्था को सहारा मिला, लेकिन निजी निवेश कमजोर बना रहा। भल्ला ने विदेशी निवेशकों के लिए आसान नीतियां बनाने, टैक्स कम करने और निर्यात आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई है। आइए, विस्तार से जानते हैं भल्ला और क्या कुछ कहा...
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सुरजीत भल्ला, अर्थशास्त्री
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर मशहूर अर्थशास्त्री और लेखक सुरजीत भल्ला ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक रफ्तार धीमी होने की असली वजह पश्चिम एशिया का संकट नहीं, बल्कि देश में निजी निवेश की कमजोरी है। भल्ला के मुताबिक कुछ महीने पहले भारत की मजबूत जीडीपी ग्रोथ ने यह तस्वीर बनाई कि अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन असल समस्या निजी क्षेत्र के निवेश में गिरावट थी।
सुरजीत भल्ला ने कहा कि छह से आठ महीने पहले भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर काफी सकारात्मक माहौल था। जीडीपी ग्रोथ अच्छी थी और महंगाई भी नियंत्रण में थी। लेकिन उन्होंने कहा कि उस समय भी निजी निवेश कमजोर था। उनका कहना है कि सरकार के खर्च और निवेश की वजह से अर्थव्यवस्था मजबूत दिख रही थी, जबकि निजी कंपनियां निवेश बढ़ाने से बच रही थीं।
ये भी पढ़ें-Abhishek Banerjee Attack: 'BJP मारती तो नामोनिशान नहीं मिलता', अभिषेक बनर्जी के आरोपों पर दिलीप घोष का पलटवार
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सरकार के निवेश पर सुरजीत भल्ला ने क्या कहा?
सुरजीत भल्ला ने कहा कि सरकार के निवेश से अर्थव्यवस्था को सहारा जरूर मिला, लेकिन यह निजी निवेश जितना प्रभावी नहीं होता। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी परियोजनाओं में भ्रष्टाचार और खर्च ज्यादा होता है। ऐसे में सरकार के खर्च से उतना फायदा नहीं मिलता जितना निजी क्षेत्र के निवेश से मिलता है। भल्ला के मुताबिक लंबे समय तक केवल सरकारी निवेश के भरोसे तेज आर्थिक विकास हासिल नहीं किया जा सकता।
पश्चिम एशिया संकट को लेकर क्या बोले भल्ला?
भल्ला ने साफ कहा कि फरवरी 2026 के बाद बढ़े पश्चिम एशिया संकट को भारत की आर्थिक सुस्ती की मुख्य वजह नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि उनका आर्थिक विश्लेषण जनवरी 2026 से पहले के आंकड़ों पर आधारित है। इसलिए पश्चिम एशिया में तनाव का उनकी राय से सीधा संबंध नहीं है। हालांकि उन्होंने माना कि इस संकट का असर दुनिया के हर देश पर पड़ा है, लेकिन भारत की मुख्य समस्या घरेलू निवेश से जुड़ी हुई है।
निजी निवेश में गिरावट की वजह क्या बताई?
सुरजीत भल्ला ने कहा कि निजी कंपनियां वहीं निवेश करती हैं जहां उन्हें ज्यादा फायदा और बेहतर माहौल मिलता है। उनके मुताबिक भारत में कई नीतिगत बदलावों के बाद विदेशी और निजी निवेशकों के लिए माहौल कठिन हो गया। उन्होंने कहा कि 2015 के बाद द्विपक्षीय निवेश संधि व्यवस्था में बदलाव हुए, जिससे विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश करना मुश्किल लगने लगा।
विदेशी निवेशकों को लेकर क्या चिंता जताई?
भल्ला ने कहा कि विदेशी निवेशकों पर ज्यादा टैक्स और कड़े नियमों का असर पड़ा है। उनके मुताबिक भारत ने निवेशकों के लिए ऐसी परिस्थितियां बना दीं, जिससे कंपनियों को विदेशों में निवेश करना ज्यादा आसान और फायदेमंद लगने लगा। उन्होंने कहा कि अगर भारत को तेज आर्थिक विकास चाहिए, तो विदेशी निवेशकों के लिए माहौल आसान और प्रतिस्पर्धी बनाना होगा।
अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए क्या सुझाव दिए?
सुरजीत भल्ला ने कहा कि भारत को 2015 से पहले वाली द्विपक्षीय निवेश संधि व्यवस्था को फिर से लागू करने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स खत्म करने, विदेशी निवेशकों पर टैक्स कम करने और निर्यात आधारित मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की सलाह दी। भल्ला के मुताबिक अगर भारत निजी निवेश को मजबूत करता है, तो देश की आर्थिक विकास दर 6 प्रतिशत से बढ़कर 8 प्रतिशत के करीब पहुंच सकती है।
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सुरजीत भल्ला ने कहा कि छह से आठ महीने पहले भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर काफी सकारात्मक माहौल था। जीडीपी ग्रोथ अच्छी थी और महंगाई भी नियंत्रण में थी। लेकिन उन्होंने कहा कि उस समय भी निजी निवेश कमजोर था। उनका कहना है कि सरकार के खर्च और निवेश की वजह से अर्थव्यवस्था मजबूत दिख रही थी, जबकि निजी कंपनियां निवेश बढ़ाने से बच रही थीं।
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सरकार के निवेश पर सुरजीत भल्ला ने क्या कहा?
सुरजीत भल्ला ने कहा कि सरकार के निवेश से अर्थव्यवस्था को सहारा जरूर मिला, लेकिन यह निजी निवेश जितना प्रभावी नहीं होता। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी परियोजनाओं में भ्रष्टाचार और खर्च ज्यादा होता है। ऐसे में सरकार के खर्च से उतना फायदा नहीं मिलता जितना निजी क्षेत्र के निवेश से मिलता है। भल्ला के मुताबिक लंबे समय तक केवल सरकारी निवेश के भरोसे तेज आर्थिक विकास हासिल नहीं किया जा सकता।
पश्चिम एशिया संकट को लेकर क्या बोले भल्ला?
भल्ला ने साफ कहा कि फरवरी 2026 के बाद बढ़े पश्चिम एशिया संकट को भारत की आर्थिक सुस्ती की मुख्य वजह नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि उनका आर्थिक विश्लेषण जनवरी 2026 से पहले के आंकड़ों पर आधारित है। इसलिए पश्चिम एशिया में तनाव का उनकी राय से सीधा संबंध नहीं है। हालांकि उन्होंने माना कि इस संकट का असर दुनिया के हर देश पर पड़ा है, लेकिन भारत की मुख्य समस्या घरेलू निवेश से जुड़ी हुई है।
निजी निवेश में गिरावट की वजह क्या बताई?
सुरजीत भल्ला ने कहा कि निजी कंपनियां वहीं निवेश करती हैं जहां उन्हें ज्यादा फायदा और बेहतर माहौल मिलता है। उनके मुताबिक भारत में कई नीतिगत बदलावों के बाद विदेशी और निजी निवेशकों के लिए माहौल कठिन हो गया। उन्होंने कहा कि 2015 के बाद द्विपक्षीय निवेश संधि व्यवस्था में बदलाव हुए, जिससे विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश करना मुश्किल लगने लगा।
विदेशी निवेशकों को लेकर क्या चिंता जताई?
भल्ला ने कहा कि विदेशी निवेशकों पर ज्यादा टैक्स और कड़े नियमों का असर पड़ा है। उनके मुताबिक भारत ने निवेशकों के लिए ऐसी परिस्थितियां बना दीं, जिससे कंपनियों को विदेशों में निवेश करना ज्यादा आसान और फायदेमंद लगने लगा। उन्होंने कहा कि अगर भारत को तेज आर्थिक विकास चाहिए, तो विदेशी निवेशकों के लिए माहौल आसान और प्रतिस्पर्धी बनाना होगा।
अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए क्या सुझाव दिए?
सुरजीत भल्ला ने कहा कि भारत को 2015 से पहले वाली द्विपक्षीय निवेश संधि व्यवस्था को फिर से लागू करने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स खत्म करने, विदेशी निवेशकों पर टैक्स कम करने और निर्यात आधारित मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की सलाह दी। भल्ला के मुताबिक अगर भारत निजी निवेश को मजबूत करता है, तो देश की आर्थिक विकास दर 6 प्रतिशत से बढ़कर 8 प्रतिशत के करीब पहुंच सकती है।