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बाहरी ताकतों ने मनमोहन, पवार को  नया कृषि कानून नहीं लाने दिया: तोमर

Mon, 28 Dec 2020 07:33 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 28 Dec 2020 07:33 PM IST
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On Farmers protest Narendra Singh Tomar says, Wall of Lies will Fall Soon, Hopeful for Early Solution to Farm bill
कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर - फोटो : ANI

किसानों से बातचीत से पहले सोमवार को केंद्रीय कृषिमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने विपक्ष पर निशाना साधा है। तोमर ने कहा, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और उनकी सरकार में कृषिमंत्री रहे शरद पवार खुद कृषि सुधार कानून लाना चाहते थे लेकिन बाहरी ताकतों ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया।

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किसान संगठनों को संबोधित करते हुए तोमर ने कहा, कई आयोग, मंत्रियों, मुख्यमंत्रियाें और सरकारों ने कृषि क्षेत्र में सुधार की दिशा में खूब कोशिशें कीं लेकिन सफलता नहीं मिली। यूपीए सरकार में पीएम रहे डॉ मनमोहन सिंह और तत्कालीन कृषिमंत्री शरद पवार खुद नए कृषि कानूनों के पक्ष में थे लेकिन न जाने कौन से बाहरी दबावों के कारण वे इन्हें लागू नहीं कर पाए। तोमर ने कहा, लेकिन अब हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं और उनका इकलौता मिशन देश और देशवासियों का विकास करना है। तोमर ने कहा कि किसानों और कृषि क्षेत्र के विकास के इरादे से नए कृषि कानून लाए गए हैं।
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मोदी को नहीं रोक सकतीं बाहरी ताकतें
किसी तरह का बाहरी ताकतें पीएम मोदी को रोक नहीं सकतीं। तोमर ने नोटबंदी, जीएसटी, अनुच्छेद 370, 35ए और नागरिकता संशोधन कानून का हवाला दिया। तोमर ने कहा, बाहरी ताकतें पीएम मोदी को रोकने की हर कोशिश करती रहीं और अंत में नाकाम हो गईं। 
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आपके आशीर्वाद से बनी सरकार क्या आपका बुरा चाहेगी
तोमर ने पूछा, प्रधानमंत्री मोदी को जनता के आशीर्वाद से लोकसभा चुनाव में 303 सीटें मिलीं हैं। क्या वह ऐसा फैसला लेंगे जो किसानों और ग्रामीणों के लिए गलत हो। तोमर ने कहा, कृषि कानूनों के मुद्दे पर पंजाब में कुछ विरोधी ताकतें किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर अपना उल्लू सीधा कर रही हैं।

अन्नदाता का सम्मान, इनकी मदद से आत्मनिर्भर बनेगा देश
तोमर ने कहा, सरकार अन्नदाता का सम्मान करती है। उनका हित चाहती है और इसके लिए प्रतिबद्ध है। भारत आत्मनिर्भर तभी बन सकता है जब किसान आत्मनिर्भर बनेंगे। तोमर ने संकेत दिया कि कृषि कानून वापस नहीं लिए जाएंगे। सरकार बातचीत से किसानों के मुद्दे का समाधान निकालेगी। 

सरकार ने 30 दिसंबर को वार्ता के लिए किया आमंत्रित

अभी तक केंद्र और किसान संगठनों के बीच पांच दौर की औपचारिक वार्ता हुई है जो बेनतीजा रही है। केंद्र द्वारा गतिरोध को समाप्त करने के लिए वार्ता बहाल करने के लगातार आग्रह के बाद किसान संगठनों ने बातचीत के लिए 29 दिसंबर का समय दिया है। सरकार ने जवाब में किसान संगठनों को पत्र लिखकर वार्ता के लिए 30 दिसंबर को आमंत्रित किया है।

यूपीए सरकार भी लाना चाहती थी कानून
उन्होंने कहा कि 1990 में आर्थिक उदारीकरण के बाद से कृषि क्षेत्र में सुधार की चर्चा चल रही थी। मंत्री ने कहा कि कई समितियों का गठन हुआ और देश भर में विचार-विमर्श हुआ। यूपीए सरकार के दौरान, मनमोहन सिंह और शरद पवार भी कृषि कानून लाना चाहते थे, लेकिन दबाव के कारण ऐसा नहीं कर सके। हम भाग्यशाली हैं कि आज मोदी जी हमारे पीएम हैं जो देश के विकास और लोगों के कल्याण के लिए निस्वार्थ भाव से काम करते हैं।

कृषि मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी भविष्य को ध्यान में रखते हुए कृषि कानूनों के माध्यम से आंदोलनकारी बदलाव लाए हैं। मुझे विश्वास है कि इन कानूनों से देश भर के गरीब, छोटे और सीमांत किसानों को फायदा होगा।

बता दें कि एक महीने से अधिक समय से पंजाब, हरियाणा और उत्तरप्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों के किसान तीनों नये कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि आगामी दिनों में अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे अपना आंदोलन तेज करेंगे।

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