{"_id":"57e897164f1c1bf50a5744c7","slug":"olympian-lalita-babar-joins-maratha-protests","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"महाराष्ट्र के मराठा आंदोलन से जुड़ी ओलंपियन ललिता बाबर ","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
महाराष्ट्र के मराठा आंदोलन से जुड़ी ओलंपियन ललिता बाबर
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 26 Sep 2016 09:04 AM IST
विज्ञापन
- फोटो : PTI
हो सकता है कि देश ललिता बाबर का नाम भूल गया हो, उनकी उपलब्धियों का भान भी किसी को न हो, लेकिन महाराष्ट्र के मराठा आंदोलन में एक चेहरा ललिता बाबर का भी है, जिसे पूरा देश पहचान सकता है। ये वही ललिता बाबर है, जिन्होंने रियो ओलंपिक के 3000 मीटर स्टीपलचेज प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया था। ललिता इस इवेंट में दसवें स्थान पर रही थीं, लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से 125 करोड़ भारतीयों का दिल जीत लिया।
रियो ओलंपिक की तैयारियों में जुटी ललिता बाबर ऊंटी में ट्रेनिंग कर रही थी, जब उन्होंने महाराष्ट्र के अहमदनगर के कोपार्डी में 14 साल की युवती से गैंगरेप और मर्डर की घटना के बारे में सुना। इस घटना ने ललिता बाबर को आक्रोश से भर दिया और डेढ़ महीने बाद वो अपने सुरक्षाकवच से बाहर निकलीं।
ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन के डेढ़ महीने बाद ललिता बाबर रविवार को पुणे में हुए मराठा आंदोलन में उतरीं। मराठा आंदोलन के प्रदर्शनकारियों के साथ ललिता बाबर ने डेक्कन चौक से काउंसिल हॉल तक प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
रियो ओलंपिक की तैयारियों में जुटी ललिता बाबर ऊंटी में ट्रेनिंग कर रही थी, जब उन्होंने महाराष्ट्र के अहमदनगर के कोपार्डी में 14 साल की युवती से गैंगरेप और मर्डर की घटना के बारे में सुना। इस घटना ने ललिता बाबर को आक्रोश से भर दिया और डेढ़ महीने बाद वो अपने सुरक्षाकवच से बाहर निकलीं।
विज्ञापन
ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन के डेढ़ महीने बाद ललिता बाबर रविवार को पुणे में हुए मराठा आंदोलन में उतरीं। मराठा आंदोलन के प्रदर्शनकारियों के साथ ललिता बाबर ने डेक्कन चौक से काउंसिल हॉल तक प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
विज्ञापन
Trending Videos
'महिलाएं अब भी असुरक्षित'
बाबर ने कहा कि मैंने इस मार्च में जाति के आधार पर या खिलाड़ी की हैसियत से हिस्सा नहीं लिया बल्कि एक साधारण महिला की हैसियत से भाग लिया। बाबर ने कहा कि स्कूली लड़कियों के साथ जो हो रहा है, वो मुझे व्यथित करता है।
उन्होंने कहा, 'मैंने इस दौड़ में एक सामान्य लड़की की हैसियत से हिस्सा लिया, जो मानती है कि महिलाओं के प्रति अत्याचार और अपराध रूकना चाहिए। मैंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और ग्रामीण परिवेश से बाहर निकल आई हूं, लेकिन हमारे माता-पिता अब भी गांवों में ही रहते हैं। हालांकि लड़कियों के प्रति हो रहे अपराध उन्हें घर से बाहर निकलने से रोकते हैं। मुझे अविश्वसनीय लगता है कि महिलाएं अब भी असुरक्षित हैं।
गौरलतब है कि मराठा समुदाय के लोग कोपार्डी की लड़कियों के लिए न्याय की मांग करते हुए पूरे राज्य में प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके साथ ही उनकी एससी-एसटी एक्ट को खत्म करने और मराठाओं को आरक्षण देने की मांग है।
उन्होंने कहा, 'मैंने इस दौड़ में एक सामान्य लड़की की हैसियत से हिस्सा लिया, जो मानती है कि महिलाओं के प्रति अत्याचार और अपराध रूकना चाहिए। मैंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और ग्रामीण परिवेश से बाहर निकल आई हूं, लेकिन हमारे माता-पिता अब भी गांवों में ही रहते हैं। हालांकि लड़कियों के प्रति हो रहे अपराध उन्हें घर से बाहर निकलने से रोकते हैं। मुझे अविश्वसनीय लगता है कि महिलाएं अब भी असुरक्षित हैं।
गौरलतब है कि मराठा समुदाय के लोग कोपार्डी की लड़कियों के लिए न्याय की मांग करते हुए पूरे राज्य में प्रदर्शन कर रहे हैं। इसके साथ ही उनकी एससी-एसटी एक्ट को खत्म करने और मराठाओं को आरक्षण देने की मांग है।