फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Odisha train accident: indian Railways now have modern signal system, then how did accident happen in Odisha

Odisha train accident: रेलवे के पास अब आधुनिक सिग्नल सिस्टम, फिर ओडिशा में कैसे हो गई चूक?

Sat, 03 Jun 2023 01:03 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Sat, 03 Jun 2023 01:03 PM IST
विज्ञापन
सार
Odisha train accident: रेलवे के जानकारों का कहना है कि इस हादसे के पीछे दो कारण नजर आ रहे हैं। पहला- मानवीय भूल और दूसरा- तकनीकी खराबी। इस हादसे के पीछे तकनीक में खराबी को अब तक बड़ी वजह माना जा रहा है। सिग्नल सिस्टम की खराबी की वजह से दो ट्रेनें एक ही पटरी पर आ गईं और उनमें टक्कर हो गई...
loader
Odisha train accident: indian Railways now have modern signal system, then how did accident happen in Odisha
Odisha train accident - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht

विस्तार

ओडिशा के बालासोर जिले में शुक्रवार रात भीषण रेल हादसा हो गया। हादसे की शिकार हुई ट्रेनों में एक मालगाड़ी के अलावा हावड़ा एक्सप्रेस और कोरोमंडल एक्सप्रेस शामिल थी। हादसे में कई लोगों की जान चली गई। हादसे की गंभीरता को देखते हुए युद्धस्तर पर बचाव और राहत कार्य चल रहा है। सेना को भी बचाव कार्यों में लगा दिया गया है। बताया जा रहा है कि कोरोमंडल एक्सप्रेस की टक्कर मालगाड़ी से हो गई। इसी वजह से इतना बड़ा हादसा हो गया। अब सवाल यह उठता है कि आखिर दो ट्रेनें एक ही पटरी पर कैसे आ गईं? इसके पीछे मुख्य वजह क्या है? यहीं नहीं, रेलवे लगातार स्टेशनों और ट्रैक पर अत्याधुनिक सिग्नल सिस्टम लगा रहा है। फिर यह हादसा कैसे हो गया?

यह भी पढ़ें: Odisha Train Accident: बालासोर में कैसे एक के बाद एक हादसे का शिकार बनीं तीन ट्रेनें, क्या टल सकती थी अनहोनी?

पहले जानें कैसे तीन ट्रेनें आपस में भिड़ गईं?

यह हादसा बालासोर स्टेशन के नजदीक बहानगा बाजार स्टेशन के पास हुआ है। हादसे के समय आउटर लाइन पर एक मालगाड़ी खड़ी थी। हावड़ा से आ रही कोरोमंडल एक्सप्रेस (12841) जो चेन्नई जा रही थी, बहानगा बाजार से 300 मीटर पहले पटरी से उतर गई। हादसा इतना भयानक था कि कोरोमंडल एक्सप्रेस का इंजन मालगाड़ी पर चढ़ गया। इसके साथ ही कोरोमंडल एक्सप्रेस ट्रेन की पीछे वाली बोगियां तीसरे ट्रैक पर जा गिरीं। तभी इसी ट्रैक पर तेज रफ्तार से आ रही हावड़ा-बेंगलुरु एक्सप्रेस (12864) ट्रैक पर पड़ी कोरोमंडल एक्सप्रेस की बोगियों से बहुत तेजी से टकराईं।

एक पटरी पर दो ट्रेन कैसे आ जाती हैं

रेलवे के जानकारों का कहना है कि इस हादसे के पीछे दो कारण नजर आ रहे हैं। पहला- मानवीय भूल और दूसरा- तकनीकी खराबी। इस हादसे के पीछे तकनीक में खराबी को अब तक बड़ी वजह माना जा रहा है। सिग्नल सिस्टम की खराबी की वजह से दो ट्रेनें एक ही पटरी पर आ गईं और उनमें टक्कर हो गई। दरअसल, ड्राइवर ट्रेन को कंट्रोल रूम के निर्देश पर चलाता है और कंट्रोल रूम से निर्देश पटरियों पर ट्रैफिक को देख कर दिया जाता है।

डिस्प्ले पर ट्रेन का सिग्नल सही नहीं दिखाई दिया

देश के हर रेलवे स्टेशन के कंट्रोल रूम में एक बड़ी सी डिस्प्ले स्क्रीन लगी होती है, जिस पर दिख रहा होता है कि कौन सी पटरी पर कौन सी ट्रेन है और कौन सी पटरी खाली है। ये हरे और लाल रंग की लाइटों के माध्यम से दिखाया जाता है। जैसे अगर किसी पटरी पर कोई ट्रेन है या चल रही है तो वह लाल नजर आएगा और जो पटरी यानी रेलवे ट्रैक खाली है, वह हरा दिखाता है। इसी को देखकर कंट्रोल रूम से लोको पायलट को निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन इस बार जैसे हादसा हुआ, उसे देख कर लग रहा है कि डिस्पले पर ट्रेन का सिग्नल सही नहीं दिखाई दिया और इसकी वजह से इतने लोगों ने अपनी जान गंवा दी।

रेलवे पर उठ रहे ये सवाल

रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य सुबोध जैन अमर उजाला से बातचीत में कहते हैं कि आज के दौर में कई प्रकार की नई तकनीक आ गई है। पहले के हादसों में ट्रेनों के कोच एक-दूसरे उपर चढ़ जाते थे, लेकिन अब नए एंटी क्लाइम्बिंग कोच ट्रेन में लगाए गए हैं। यह एलएचबी कोच एक-दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते हैं। इसके बावजूद इस हादसे में इतने लोगों की मौत होना अपने आप में रेलवे के सिस्टम पर सवाल खड़ा कर रहा है। यह रेलवे का एक बहुत बड़ा 'सिस्टमेटिक फेल्युअर' है। आज रेलवे मंत्रालय सोशल मीडिया पर प्रचार कर रहा है कि रेल मंत्री एक ट्रेन में सफर कर रहे हैं, जिसमें ड्राइवर नहीं है, लेकिन जैसे ही ट्रेन की स्पीड बढ़ती है तो कवच नामक सिस्टम ट्रेन की गति को कंट्रोल कर लेता है। आज हर बजट में कवच और ट्रेनों के सिस्टम, ट्रैक और सिग्नल सिस्टम सुधारने के लिए करोड़ों का बजट आवंटित किया जाता है। इसके बावजूद यह हादसे कैसे हो जाते हैं?

यह भी पढ़ें: Odisha: दुर्घटना इतनी घातक कि ट्रेन को चीरते हुए अंदर घुसी पटरी, तस्वीरों में देखें हादसे का खौफनाक मंजर

जैन कहते हैं कि आज रेलवे में सारा सिस्टम इलेक्ट्रॉनिक हो चुका है। जैसे ही गाड़ी पटरी पर आती है, तो पॉइंट और सिंगल लॉक हो जाते हैं। स्टेशन मास्टर चाहने के बाद भी वह नई गाड़ी को सिग्नल नहीं दे सकता। किसी भी यात्री गाड़ी को स्टेशन पर आने से पहले पांच से तीन किलोमीटर पहले ही सिग्नल मिलना शुरू हो जाते हैं। फिर यहां ट्रेन कैसे आ गई? इससे सवाल उठा रहा है कि या तो सिग्नल सिस्टम फेल हो गया या फिर इसमें किसी ने कोई छेड़छाड़ की।

दूसरा सवाल है कि अगर सिग्नल सही था, तो ट्रेन के ड्राइवर ने सिग्नल को क्यों नहीं माना। लाल सिग्नल होने के बाद भी ट्रेन कैसे चलाई। इसी वजह से हादसा हुआ। जब ट्रेन के डिब्बे पटरी पर पलटे हैं, तो पास वाली लाइन में अवरोध आना स्वाभाविक है। ऐसे में स्टेशन के अधिकारियों को तुरंत एक्शन लेते हुए वहां आने वाली ट्रेनों को रोकना चाहिए था। लेकिन रेलवे के अफसरों ने कोई कदम नहीं उठाया। यह हादसा उनकी लापरवाही का ही नतीजा है।

रेल मंत्री ने हादसे को लेकर कही ये बात

घटनास्थल पहुंचे रेल मंत्री ने कहा कि यह एक दर्दनाक हादसा है। रेलवे, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और राज्य सरकार बचाव कार्यों में जुटी हैं। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। मुआवजे का कल एलान कर दिया गया था। हादसे की जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई है। साथ ही रेलवे सेफ्टी कमिश्नर भी घटनास्थल का दौरा करेंगे और इस बात की जांच करेंगे की हादसे की वजह क्या रही।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed