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स्कूल मास्टर अपने मोबाइल से करेंगे एनपीआर और जनगणना का काम, एनपीआर पर जानकारी देना जरूरी नहीं

डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली Updated Wed, 15 Jan 2020 05:29 PM IST
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जनगणना और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) का कार्य एक साथ होगा। प्राइमरी स्कूल मास्टर लोगों के घर जाकर अपने मोबाइल फोन पर उक्त दोनों जानकारियां एकत्रित करेंगे। एनपीआर बाबत जानकारी देना अनिवार्य नहीं होगा। हालांकि सरकार ने इसके लिए दो अलग-अलग एप तैयार किए हैं। एक एप पर जनगणना और दूसरे के जरिए एनपीआर की सूचना अपलोड होगी।
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जनगणना कर्मी के पास इसका फार्म भी रहेगा। जहां पर एप काम नहीं करेगा, वहां फार्म में जानकारी भरकर उसे बाद में अपलोड कर दिया जाएगा। जनगणना कर्मी अपने साथ एनपीआर 2010 और 2015 का रिकॉर्ड रखेगा। लोगों से सवाल पूछ कर उस रिकॉर्ड को अपडेट कर दिया जाएगा। यदि कोई व्यक्ति एनपीआर के रिकॉर्ड को अपडेट नहीं कराना चाहता तो कोई बात नहीं ।इसके लिए उस पर कोई दबाव नहीं डाला जाएगा। एनपीआर, सेंसस और हाउसहोल्ड सर्वे, ये तीनों कार्य करने वाले कर्मी को 25 हजार रुपये तक मानदेय दिया जा सकता है।

केंद्र सरकार के सूत्रों के अनुसार, यह कार्य एक अप्रैल से लेकर 30 सितंबर तक पूरा किया जाना है। हर राज्य को अपनी सुविधानुसार 45 दिन में यह काम निपटाना होगा। छह माह के दौरान राज्य कभी भी इस काम को शुरू कर सकते हैं, लेकिन यह ध्यान रहे कि उन्हें यह कार्य 45 दिन में पूरा करना है और 30 सितंबर से पहले अपना कार्य संपन्न करना होगा। किसी परिवार के सदस्यों का आपस में क्या रिश्ता है, इसे लेकर इस दफा 12 कोड जारी किए गए हैं।

जैसे पिछली जनगणना में पौत्री, पुत्र वधु या बहु आदि शब्द लिखे गए थे। इससे आपसी रिश्ते ठीक तरह से परिभाषित नहीं हो सके। यही वजह है कि इस बार परिवार के सभी रिश्तों के लिए अलग-अलग कोड दे दिए हैं। लोगों को इन्हीं कोड के जरिए परिवार के मुखिया के साथ अपना रिश्ता बताना होगा। पहले चरण के सर्वे में यह पता लगा लिया गया है कि जनगणना और एनपीआर का 90 फीसदी से ज्यादा काम मोबाइल फोन पर ही पूरा हो जाएगा।

इसके बाद भी जहां किसी वजह से मोबाइल एप काम नहीं करेगा, तो वहां मैनुअल तरीके जानकारी हासिल की जाएगी। यानी फार्म भर कर कर सूचना एकत्रित करेंगे। 2011 में जब जनगणना हुई तो इस कार्य में लगे कर्मियों को 55 सौ रुपये तक कर मानदेय दिया गया था। उस वक्त जनगणना कार्य में एनपीआर शामिल नहीं था। गलत सूचना देने वालों पर पेनल्टी लगेगी। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को एनपीआर की अधिसूचना जारी कर दी है।

एनपीआर में कोई भी बायोमेट्रिक जानकारी नहीं मांगी जाएगी। लोगों को इस दौरान कोई सबूत भी नहीं देना होगा। एनपीआर में लोगों का आधार नंबर, मोबाइल नंबर, पैन कार्ड नंबर, डीएल नंबर यदि हाउसहोल्ड के पास है तो ही मांगेंगे। वह भी सिर्फ जानकारी के लिए। इस प्रक्रिया में कागजात नहीं मांगे जाएंगे। अभी एनपीआर में कुछ नए सवाल भी शामिल किए जा सकते हैं।


जानिए प्रमुख बातें 
  • एनपीआर और जनगणना को एक साथ ही पूरा कराया जाएगा। 
  • एक ही कर्मी अपने मोबाइल पर इसे करेगा। उसे अलग-अलग एप मुहैया कराया जाएगा। मोबाइल कर्मचारी का अपा होगा।
  • कर्मी अपने साथ 2010 और 2015 का एनपीआर रिकॉर्ड साथ ले जाएगा। अगर कोई बदलाव मिला तो मौके पर एडिट कर दिया जाएगा। 
  • एक कर्मी को अधिकतम 25 हजार रुपये का इंसेंटिव मिलेगा। 
  • एक अप्रैल से 30 सितंबर तक दूसरा फेज शुरू होगा। 
इस बीच केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) की फिर से अधिसूचना जारी की है। वहीं केरल और पश्चिम बंगाल ने अपने राज्य में एनपीआर नहीं लागू करने की सूचना केंद्र को दे दी है।
 
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