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ऑल इंडिया आयुर्वेद इंस्टीट्यूट: अब अफ्रीकी देशों में होगा आयुर्वेद का विस्तार, जानें क्या हैं इसके मायने

Tue, 26 Sep 2023 11:45 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Tue, 26 Sep 2023 11:45 PM IST
सार

G20 समूह में शामिल होने के बाद पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका देशों के उच्चायुक्तों और राजदूतों के 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान का दौरा किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने आयुर्वेदिक चिकत्सा पद्धतियों के माध्यम से होने वाले इलाज और उसके मॉडर्न चिकित्सा पद्धति के पहलू को बखूबी समझा।

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Now Ayurveda will be expanded to African countries, Know its Meaning
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान पहुंचे अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधि - फोटो : आयुष मंत्रालय

विस्तार

अब अफ्रीकी देशों में भारत के पुरातन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद का और बड़े तरीके तरीके से विस्तार होगा। इसके लिए वकायदा अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को ऑल इंडिया आयुर्वेद इंस्टीट्यूट में दौरा  किया। इन दौरान अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधियों ने न सिर्फ यहां की चिकित्सा पद्धति के बारे में जाना बल्कि अपने-अपने देश के चिकित्सा संस्थानों के साथ मिलकर आयुर्वेद की दिशा में न सिर्फ शोध करने बल्कि इलाज में इसका इस्तेमाल करने की भी दिशा में बात की। आयुर्वेद संस्थान में दौरा करने वाले अफ्रीकी देशों में कई देश ऐसे भी हैं जो दिल्ली में आयोजित जी20 के सम्मेलन में इस समूह का हिस्सा बने हैं। आयुष मंत्री सर्वानंद सोनवाल ने इस विजिट के दौरान कहा कि दुनिया के सभी देशों में आयुर्वेद का प्रसार हो रहा है। इससे दुनिया के लाखों करोड़ों मरीजों को बहुत फायदा हो रहा है।

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G20 समूह में शामिल होने के बाद पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका देशों के उच्चायुक्तों और राजदूतों के 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान का दौरा किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने आयुर्वेदिक चिकत्सा पद्धतियों के माध्यम से होने वाले इलाज और उसके मॉडर्न चिकित्सा पद्धति के पहलू को बखूबी समझा। केंद्रीय आयुष मंत्री सर्वानंद सोनेवाल कहते हैं कि जिस तरीके से भारत ने अफ्रीकी देशों को G20 समूह में शामिल करवाने के लिए बहुत बड़ा प्लेटफार्म उपलब्ध कराया, उससे इन देशों में भारत के प्रति जो रवैया दिख रहा है वह बहुत सकारात्मक है। पूर्वी और दक्षिण अफ्रीकी देशों के प्रमुख प्रतिनिधियों की अखिल भारतीय आयुर्वेद इंस्टीट्यूट में विजिट बताती है कि भारत के आयुर्वेद को दुनिया के देश में और कितना बड़ा विस्तार मिलने वाला है।
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केंद्रीय आयुष मंत्री कहते हैं कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति ने समूची दुनिया में वैश्विक स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यही वजह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन में भारतीय पुरातन चिकित्सा पद्धति को न सिर्फ पहचाना है बल्कि देश का पहला सबसे बड़ा अनुसंधान संस्थान भी भारत में ही शुरू किया गया है। वह कहते हैं कि आयुष मंत्रालय आयुर्वेद के इस प्रमुख चिकित्सा संस्थान को और नई ऊंचाइयां देने के लिए लगातार न सिर्फ सुविधाओं को बढ़ा रहा है बल्कि देश और दुनिया में चिकित्सकीय सुविधाओं  के लिहाज से बड़ा रोल भी निभा रहा है।
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इस विजिट के दौरान अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधियों ने संस्थान में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में न सिर्फ जायजा लिया बल्कि इन सुविधाओं के माध्यम से अपने देश में बेहतर इलाज के लिए होने वाले करार और उसको बढ़ाने के संबंध में भी चर्चा की। केंद्रीय आयुष मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि आयुर्वेद संस्थान का दुनिया के कई देशों के साथ न सिर्फ चिकित्सकीय शोध के करार हुआ है बल्कि इलाज के लिए भी दुनिया के अलग-अलग देश में हमारी इस पद्धति का बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक जल्द ही जी20 समूह में शामिल हुए इन अफ्रीकी देशों में भारतीय पुरातन चिकित्सा पद्धति का न सिर्फ विस्तार होगा बल्कि कई चिकित्सकीय करार भी होने वाले है। एआईआईए की निदेशक डॉ. तनुजा नेसारी कहती है कि अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधियों ने चिकित्सा संस्थान में किए जाने वाले इलाज के बारे में बारीकी से समझा और अपने-अपने देश में इस पद्धति के माध्यम से इलाज कराए जाने के अगले चरण के बारे में भी विस्तार से संस्थान और अधिकारियों के साथ बातचीत की। वह कहती है कि उनका संस्थान आयुर्वेद को वैश्विक समुदाय तक ले जाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।


अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधियों के साथ संस्थान में विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव पुनीत आर कुंडल समेत विदेश मंत्रालय के अधिकारी मौजूद थे। संस्थान में चिकित्सक की सुविधाओं और पुरातन चिकित्सा पद्धति को समझने के लिए बुरुंडी, इथियोपिया, जिम्बाब्वे, मलावी, नामीबिया, दक्षिण अफ़्रीका, युगांडा और जाम्बिया समेत कई अफ्रीकी देशों के उच्चायुक्तों बहुत से वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

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