North East Diary: ईटानगर में APSLSA के थीम सॉन्ग का विमोचन; बराक घाटी में बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान
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असम के बराक घाटी क्षेत्र में अब तक के सबसे बड़े अतिक्रमण हटाओ अभियानों में से एक की शुरुआत सोमवार को की गई। हैलाकांडी जिले के घरमुरा इनर लाइन आरक्षित वन क्षेत्र से अवैध कब्जा हटाने के लिए जिला प्रशासन और वन विभाग ने संयुक्त रूप से व्यापक कार्रवाई शुरू की है। इस अभियान के तहत कुल 522 परिवारों को हटाया जाना है।
अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई की शुरुआत सोमवार सुबह करीब सात बजे डामछेरा इलाके से हुई। यह अभियान चार फरवरी तक चलेगा और इसका उद्देश्य आरक्षित वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराना तथा भविष्य में अवैध कब्जे को रोकना है। अभियान को सुचारू रूप से चलाने के लिए वन विभाग ने 35 जेसीबी मशीनें तैनात की हैं। इसके साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया गया है। मौके पर 1500 से अधिक सुरक्षाकर्मियों के अलावा करीब 200 वन विभाग के अधिकारी तैनात किए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या से निपटा जा सके।
हैलाकांडी एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने बताया कि पूरे अतिक्रमण क्षेत्र को सात सेक्टरों में विभाजित किया गया है। सोमवार को सेक्टर 5, 6 और 7 में कार्रवाई की गई, जबकि शेष सेक्टरों में अगले दो दिनों में चरणबद्ध तरीके से अतिक्रमण हटाया जाएगा। प्रशासन ने बताया कि करीब दो महीने पहले ही क्षेत्र में रह रहे लोगों को अतिक्रमण हटाने के नोटिस जारी किए गए थे। नोटिस के बाद बड़ी संख्या में परिवारों ने स्वेच्छा से जमीन खाली कर दी थी, जिससे अभियान के शुरुआती चरण में किसी बड़े विरोध का सामना नहीं करना पड़ा। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई आरक्षित वन भूमि की सुरक्षा, पर्यावरणीय संतुलन बहाल करने और संरक्षित क्षेत्रों को अवैध कब्जे से मुक्त रखने के उद्देश्य से की जा रही है।
इटानगर में एपीएसएलएसए थीम सॉन्ग का विमोचन, मुख्य न्यायाधीश ने मेल-मिलाप और समावेशी न्याय पर दिया जोर
गुवाहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और अरुणाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (एपीएसएलएसए) के संरक्षक-इन-चीफ न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार ने कहा है कि कानून और संगीत, दोनों समाज को जोड़ने का काम करते हैं, लेकिन जहां कानूनी भाषा कभी-कभी दूरी पैदा कर देती है, वहीं संगीत हर वर्ग और समुदाय तक सहज रूप से पहुंच जाता है।
एपीएसएलएसए के थीम सॉन्ग ‘अरुणाचल तुम भारत को जगाते हो’ के विमोचन और स्क्रीनिंग समारोह को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति कुमार ने कहा कि न्याय केवल भौतिक निकटता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका भावनात्मक जुड़ाव भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि न्याय का उद्देश्य केवल कानूनी पुस्तकों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि आम नागरिक तक उसकी सहज पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्याय का वास्तविक मकसद विवादों का निपटारा भर नहीं, बल्कि समाज में विश्वास बहाल करना, मानवीय गरिमा की रक्षा करना और लोगों को जोड़ना है। उन्होंने मेल-मिलाप, मध्यस्थता और लोक अदालतों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि ये तंत्र जन-केंद्रित और संवेदनशील न्याय प्रदान करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने एपीएसएलएसए के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्था का लक्ष्य हाशिए पर मौजूद वर्गों को विधिक साक्षरता और जागरूकता के माध्यम से सशक्त बनाना, मध्यस्थता केंद्रों, लोक अदालतों और विधिक सहायता क्लीनिकों को मजबूत करना तथा सभी हितधारकों को समावेशी न्याय के लिए एकजुट करना है। न्यायमूर्ति कुमार ने इस रचनात्मक पहल के लिए एपीएसएलएसए की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रयास संस्थागत आत्मविश्वास, नवाचार और समावेशी न्याय के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अदालतें जब जनता तक पहुंच बना रही हैं, तब भी कानून की गरिमा पूरी तरह सुरक्षित है।
इस अवसर पर गुवाहाटी हाईकोर्ट के न्यायाधीश और एपीएसएलएसए के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजय कुमार मेधी ने कहा कि थीम सॉन्ग का उद्देश्य राज्य के दूर-दराज़ इलाकों तक लोगों से संवाद स्थापित करना है और इसकी वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब यह गीत व्यापक रूप से साझा और प्रचारित होगा। कार्यक्रम में गुवाहाटी हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति कर्दाक एते और न्यायमूर्ति बुदी हाबुंग सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।