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Hindi News ›   India News ›   No matter how many medical claims MPs have, they will be passed ; Bills will not go to CGHS or Health Ministry

CGHS: सांसदों के मेडिकल क्लेम हर हाल में होंगे पास, सीजीएचएस या स्वास्थ्य मंत्रालय के पास नहीं जाएंगे बिल

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 15 Jul 2025 08:17 PM IST
सार

सांसदों के मेडिकल बिल पास करने की पावर लोकसभा व राज्यसभा सचिवालय के पास है। यानी लोकसभा व राज्यसभा के महासचिव, इन बिलों को पास करेंगे। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के 'ईएचएस' द्वारा इस बाबत 11 जुलाई को लोकसभा व राज्यसभा सचिवालय को कार्यालय ज्ञापन जारी किया गया है।   

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No matter how many medical claims MPs have, they will be passed ; Bills will not go to CGHS or Health Ministry
मेडिकल क्लेम - फोटो : एडोव

विस्तार

लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के मेडिकल क्लेम की राशि, चाहे कितनी भी हो, वह हर हाल में पास करनी होगी। मेडिकल क्लेम को लेकर सीजीएचएस के नियम जो भी हों, उनकी परवाह नहीं करनी है। सांसदों के मेडिकल बिल, पास करने ही होंगे। ये बिल, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय या सीजीएचएस के पास नहीं जाएंगे। सांसदों के मेडिकल बिल पास करने की पावर लोकसभा व राज्यसभा सचिवालय के पास है। यानी लोकसभा व राज्यसभा के महासचिव, इन बिलों को पास करेंगे। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के 'ईएचएस' द्वारा इस बाबत 11 जुलाई को लोकसभा व राज्यसभा सचिवालय को कार्यालय ज्ञापन जारी किया गया है।   

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बता दें कि 2006 के दौरान सांसदों के वेतन/भत्तों को लेकर एक ज्वाइंट कमेटी बनाई गई थी। तब लोकसभा या राज्यसभा के सांसदों का मेडिकल रिम्बर्समेंट क्लेम, स्वास्थ्य मंत्रालय और सीजीएचएस में जमा होता था। कई बार बिलों के पास होने में समय लगता था। ज्वाइंट कमेटी ने अपनी सिफारिशों में कहा था कि मेडिकल बिलों को मंजूरी देने की पावर लोकसभा व राज्यसभा सचिवालय को दे दी जाए। उस वक्त सुप्रीम कोर्ट के जजों के मेडिकल बिल भी इसी तरीके से पास होते थे। 
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स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस प्रपोजल पर विचार किया और लोकसभा व राज्यसभा के महासचिव को उक्त पावर दे दी गई। यह कहा गया कि सांसदों का मेडिकल बिल, चाहे कितना भी भारी भरकम क्यों न हो, लोकसभा व राज्यसभा के महासचिव ही उसे पास करेंगे। लोकसभा और राज्यसभा के महासचिवों को वर्तमान सीजीएचएस दिशानिर्देशों/प्रावधानों में छूट के अंतर्गत मौद्रिक सीमाओं पर ध्यान दिए बिना ही सांसदों के चिकित्सा दावों की प्रतिपूर्ति करनी है। मतलब, ये बिल सीजीएचएस की तय सीमा के दायरे में नहीं आएंगे।
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अब मंत्रालय का कहना है कि कई सांसदों के मेडिकल क्लेम, अभी तक उनके पास आ रहे हैं। ऐसे कुछ मेडिकल बिल सीजीएचएस के पास भी जमा हो रहे हैं। हालांकि यह प्रक्रिया, अब सीजीएचएस में चालू नहीं है। दूसरी तरफ, कई सांसदों को यह शिकायत रहती है कि उनका मेडिकल बिल पास होने में देरी हो रही है। वर्तमान सांसदों के एमआरसी के निपटान की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए, 26 अप्रैल 2006 के कार्यालय ज्ञापन की विषयवस्तु को दोहराया जा रहा है। वर्तमान सांसदों के चिकित्सा दावों की प्रतिपूर्ति के लिए, चाहे उनकी वित्तीय सीमा कुछ भी हो, मौजूदा सीजीएचएस दिशानिर्देशों/प्रावधानों में छूट देने की शक्तियां पहले ही लोकसभा/राज्यसभा के महासचिव को सौंप दी गई हैं। ऐसे मामलों को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय या सीजीएचएस को भेजने की आवश्यकता नहीं है। 

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