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रिपोर्ट: देश में बढ़ रहा रोजगार, पर महंगाई के हिसाब से वेतन वृद्धि नहीं; नौकरी और कौशल एक ही सिक्के के दो पहलू

Mon, 03 Mar 2025 05:02 AM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Mon, 03 Mar 2025 05:02 AM IST
सार

जाने-माने अर्थशास्त्री विरमानी ने कहा, जहां तक मेरा आकलन है, महंगाई के हिसाब से पारिश्रमिक नहीं बढ़ने का मुख्य कारण कौशल की कमी है। हम कौशल वाली नौकरियां नहीं ले रहे हैं। मैंने कई देशों के आंकड़ों को देखा है। उसके आधार पर कहूंगा कि हमें कौशल पर काम करना होगा।  

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NITI Aayog member says that employment is increasing in country but salary increase not in line with inflation
वेतन - फोटो : freepik

विस्तार

नीति आयोग के सदस्य अरविंद विरमानी का कहना है कि देश में रोजगार तो बढ़ रहा है, पर नियमित कर्मचारियों का वास्तविक वेतन महंगाई के हिसाब से नहीं बढ़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि नौकरी कौशल एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। आप में हुनर है, तो नौकरी मिलना आसान हो जाता है।

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विरमानी ने कहा, आवधिक श्रमबल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के आंकड़ों के मुताबिक पिछले सात साल में कामगार-जनसंख्या अनुपात साफ तौर पर बढ़ रहा है। इसका अर्थ है कि नौकरियों की संख्या जनसंख्या वृद्धि के मुकाबले अधिक बढ़ रही है। इसलिए, यह कहना गलत है कि नौकरियां नहीं बढ़ रही हैं। पीएलएफएस की सालाना रिपोर्ट 2023-24 (जुलाई-जून) के मुताबिक, कामगार-जनसंख्या अनुपात सभी उम्र के व्यक्तियों के मामले में 2023-24 में बढ़कर 43.7 फीसदी पहुंच गया। 2017-18 में यह 34.7 फीसदी था। विरमानी ने कहा, अगर पीएलएफएस में पारिश्रमिक के आंकड़ों को देखें, तो ठेके पर काम करने वालों का वास्तविक वेतन सात साल के दौरान बढ़ा है और उनकी स्थिति सुधरी है। लेकिन, नियमित कर्मचारियों के वेतन में सात साल में महंगाई के हिसाब से वृद्धि नहीं हुई है।
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कौशल की कमी वेतन नहीं बढ़ने की मुख्य वजह
जाने-माने अर्थशास्त्री विरमानी ने कहा, जहां तक मेरा आकलन है, महंगाई के हिसाब से पारिश्रमिक नहीं बढ़ने का मुख्य कारण कौशल की कमी है। हम कौशल वाली नौकरियां नहीं ले रहे हैं। मैंने कई देशों के आंकड़ों को देखा है। उसके आधार पर कहूंगा कि हमें कौशल पर काम करना होगा।  केंद्र सरकार कदम उठा रही है। राज्यों और जिला स्तर पर भी इस दिशा में काम करने की जरूरत है, क्योंकि नौकरियों का सृजन वहीं होगा।
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शिक्षा के हर स्तर पर कौशल विकास जरूरी
विरमानी ने कहा, शिक्षा के हर स्तर पर कौशल विकास की जरूरत है। ऐसा नहीं है कि सबको आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) या इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर बनने के लिए ही कौशल की जरूरत है।हमें उन बच्चों के बारे में भी सोचना है, जो बीच में पढ़ाई छोड़ते हैं।

छवि की चिंता भी नौकरी की राह में बाधक
विरमानी ने कहा, वास्तव में ‘इमेज’ की भी थोड़ी समस्या है। मैं कई आईटीआई में गया हूं। ऐसी नौकरियां हैं, जहां कोई आवेदन नहीं करता। मशीनिस्ट (मशीन चलाने वाला) अच्छा काम है। वेतन भी अच्छा है, पर उसमें कोई आ ही नहीं रहा। इसी तरह के कई और काम हैं, जहां लोग नहीं आ रहे। ऐसा नहीं होना चाहिए कि हम सिर्फ ऐसी नौकरियों को देखें कि दफ्तर में जाएंगे और कागजों पर हस्ताक्षर करेंगे।


विरमानी ने कहा, राज्यों के निवेश अनुकूलता सूचकांक के दूसरे चरण पर काम जारी है। इसके एक-दो महीने में जारी होने की उम्मीद है। आम बजट में राज्यों का निवेश अनुकूलता सूचकांक लाने की घोषणा की गई है। यह सूचकांक राज्यों को नियमों की समीक्षा के लिए प्रेरित करेगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि निवेश की राह में क्या बाधाएं हैं। इसका उद्देश्य निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए राज्यों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है। वित्त मंत्रालय, नीति आयोग व उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग  के परामर्श से ‘राज्यों के निवेश अनुकूलता सूचकांक’ से संबंधित मानदंडों पर काम कर रहा है।

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