फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Nirbhaya Case: Supreme Court reject review petition of akshay, now what next

फांसी के फंदे से अभी कितनी दूर हैं निर्भया के दोषी, जानें आगे क्या होगा 

Wed, 18 Dec 2019 04:50 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित कुमार Updated Wed, 18 Dec 2019 04:50 PM IST
विज्ञापन
Nirbhaya Case: Supreme Court reject review petition of akshay, now what next
nirbhaya case - फोटो : सोशल मीडिया
सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के चार दोषियों में से एक अक्षय कुमार सिंह की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही निर्भया के हत्यारों और फांसी के फंदे के बीच की दूरी भी थोड़ी कम हो गई है। हालांकि इन दोषियों को फांसी के फंदे पर झूलते देखने के लिए थोड़ा इंतजार और करना होगा। कानूनी प्रक्रिया में अभी ऐसे कुछ चरण बाकी हैं, जिनका फायदा उठाकर बचाव पक्ष सजा ए मौत को थोड़ा लटका सकता है। 
विज्ञापन



विज्ञापन

यह चाल चलने की फिराक में बचाव पक्ष 

  • अक्षय की पुनर्विचार याचिका दायर करने वाला वकील एपी सिंह इस मामले को लटकाने की कोशिश में है 
  • इसके लिए वह निर्भया के दोस्त द्वारा मीडिया में बयान देने के मामले को इस्तेमाल कर सकता है 
  • वकील का दावा है कि नए तथ्य सामने आने के बाद नए सिरे से केस की सुनवाई होनी चाहिए। 

17 मामलों को ढाल बनाने की कोशिश 

  • बचाव पक्ष चारों दोषियों को फांसी से बचाने के लिए दुष्कर्म के 17 मामलों का इस्तेमाल कर सकता है 
  • ये 17 मामले ऐसे हैं, जिनमें सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया 
  • बचाव पक्ष का वकील 2017 के बाद हुए इन मामलों को अदालत के सामने रखेगा

बाकी तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका अभी बाकी 

  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अभी तक सिर्फ अक्षय ने ही पुनर्विचार याचिका दायर की है 
  • बाकी तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका दाखिल होना अभी बाकी है
  • बचाव पक्ष मामले को लटकाने के लिए इसका भी इस्तेमाल कर सकता है 

क्यूरेटिव पिटिशन 

  • अक्षय के वकील ने कहा है कि वह इस मामले में क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल करेंगे 
  • क्यूरेटिव पिटिशन किसी के लिए आखिरी चरण होता है
  • अगर यह रद्द हो जाती है, तो फिर मुजरिम के पास दया याचिका का अधिकार है 

दया याचिका

  • अगर बाकी तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका खारिज हो जाती हैं 
  • इसके बाद क्यूरेटिव पिटिशन भी दोषियों के खिलाफ जाती है
  • तो अंतिम रास्ता दया याचिका ही है
  • राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद-72 व राज्यपाल अनुच्छेद-161 के तहत दया याचिका पर सुनवाई करते हैं। 
  • अगर राष्ट्रपति भी दया याचिका खारिज कर देते हैं, तो मुजरिमों को फांसी देने का रास्ता साफ हो जाएगा

डेथ वारेंट के बाद तारीख होगी तय 

  • सभी अर्जी खारिज होने के बाद निचली अदालत दोषी के नाम पर डेथ वारेंट जारी करती है 
  • इसमें फांसी की तारीख, समय और जगह तय होगी 
  • इसके बाद फांसी पर लटकाने से पहले दोषी की अंतिम इच्छा पूछी जाएगी 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed