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NIA:कंबोडिया से जुड़े मानव तस्करी नेटवर्क पर एनआईए की रेड, तीन राज्यों में छह जगह छापे
Tue, 07 Jul 2026 10:41 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Tue, 07 Jul 2026 10:41 PM IST
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एनआईए।
- फोटो : अमर उजाला।
नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने मंगलवार को कंबोडिया से जुड़े मानव तस्करी और साइबर गुलामी के मामले में उत्तर भारत के तीन राज्यों में छह जगहों पर छापेमारी की है। बिहार के चार जिलों - गोपालगंज, सिवान, सारण और पूर्वी चंपारण - में एक-एक जगह के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और दिल्ली में भी एक-एक जगह पर बड़े पैमाने पर तलाशी ली गई। केस संख्या RC-10/2024/NIA/DLI में गिरफ़्तार आरोपियों और फरार लोगों के साथियों/समर्थकों से जुड़ी जगहों पर तलाशी के दौरान स्मार्टफोन, लैपटॉप और कई डिजिटल डिवाइस के साथ-साथ अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज/सामान जब्त किए गए।
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यह तलाशी अभियान, एनआईए की उस जांच का हिस्सा है, जो मानव तस्करी और साइबर गुलामी के सिंडिकेट की गतिविधियों के बारे में चल रही है। इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड फरार आरोपी आनंद कुमार सिंह उर्फ मुन्ना सिंह है। मुख्य आरोपी आनंद कुमार और उसके चार साथियों प्रह्लाद कुमार सिंह, अभय नाथ दुबे, अभिरंजन कुमार और रोहित यादव के खिलाफ एनआईए ने मई 2026 में चार्जशीट दाखिल की थी। इससे पहले फरवरी 2026 में, आनंद के तीन साथियों अभय, अभिरंजन और रोहित को कंबोडिया से दिल्ली लौटने पर गिरफ्तार किया गया था
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एनआईए की अब तक की जांच से पता चला है कि मानव तस्करी करने वाला एक संगठित गिरोह भारतीय युवाओं को अच्छी सैलरी वाली वैध नौकरियों का झूठा वादा करके कंबोडिया बुलाता था। विदेशी धरती पर उतरते ही पीड़ितों के पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते थे। कंबोडिया पहुंचने पर उन्हें तस्करी करके लाए गए लोगों के साथ ही धोखाधड़ी करने वाली कंपनियों को सौंप दिया जाता था।जांच में यह भी पता चला है कि आनंद, भारत में अलग-अलग सब-एजेंटों या ट्रैवल एजेंटों के जरिए आसानी से झांसे में आने वाले युवाओं को भर्ती करता था। इसके बाद वह अपने साथियों की मदद से पीड़ितों को भारत से बाहर भेज देता था।
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पीड़ितों ने अपने बयानों में बताया कि उन्हें कंबोडिया में धोखाधड़ी करने वाली कंपनियों के लिए काम करने के लिए मजबूर किया जाता था। काम करने से मना करने पर उन्हें मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी जाती थी, जिसमें बिजली के झटके देना, जबरदस्ती कैद में रखना और खाना-पानी न देना जैसी हरकतें शामिल थीं। फरार लोगों और गिरोह के अन्य सदस्यों का पता लगाने की कोशिशें जारी हैं।