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Malegaon Blast Verdict: मालेगांव विस्फोट मामले में साध्वी प्रज्ञा समेत सभी आरोपी बरी; एनआईए कोर्ट का फैसला

Thu, 31 Jul 2025 11:25 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 31 Jul 2025 11:25 AM IST
सार

महाराष्ट्र के मालेगांव विस्फोट मामले के लगभग 17 साल बाद एनआईए की विशेष अदालत गुरुवार को फैसला सुनाया। यह सर्वाधिक संवेदनशील मामलों में से एक रहा है, क्योंकि इसमें हिंदू और भगवा आतंकवाद शब्दों का प्रयोग किया गया था।

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NIA Court acquits all accused in Malegaon blast case, including Sadhvi Pragya Singh, Lt Colonel Purohit
कोर्ट ने फैसला सुनाए वक्त क्या-क्या कहा? - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सितंबर 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में गुरुवार को मुंबई की एक विशेष अदालत ने पूर्व भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित सहित सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया। इस विस्फोट में छह लोग मारे गए थे और 101 अन्य घायल हुए थे। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के मामलों की सुनवाई के लिए नियुक्त विशेष न्यायाधीश एके लाहोटी ने अभियोजन पक्ष के मामले और की गई जांच में कई खामियां बताईं। उन्होंने कहा कि आरोपियों को संदेह का लाभ मिलना चाहिए। विस्फोट के सभी छह पीड़ितों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये और सभी घायलों को 50,000 रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।

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फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे: पीड़ित परिवारों के वकील
पीड़ित परिवारों के वकील एडवोकेट शाहिद नदीम ने कहा कि बम विस्फोट की पुष्टि कोर्ट ने कर दी है। हम इस बरी करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। हम स्वतंत्र रूप से अपील दायर करेंगे। 
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क्या है मामला?
29 सितंबर 2008 को मुंबई से लगभग 200 किलोमीटर दूर मालेगांव शहर में एक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल पर बंधे विस्फोटक उपकरण में विस्फोट होने से छह लोगों की मौत हो गई थी। धमाके में 100 से अधिक घायल हुए थे।
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कोई विश्वसनीय और ठोस सबूत नहीं
न्यायाधीश ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि मामले को संदेह से परे साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय और ठोस सबूत नहीं है। मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधान लागू नहीं होते। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह साबित नहीं हुआ है कि विस्फोट में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल प्रज्ञा ठाकुर के नाम पर पंजीकृत थी, जैसा कि अभियोजन पक्ष ने दावा किया है। यह भी साबित नहीं हुआ है कि विस्फोट कथित तौर पर बाइक पर लगाए गए बम से हुआ था।

कोर्ट ने फैसले में क्या-क्या कहा?

  • अदालत ने कहा, 'आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। कोई भी धर्म हिंसा का समर्थन नहीं कर सकता। अदालत केवल धारणा और नैतिक साक्ष्य के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहरा सकती। इसके लिए ठोस सबूत होना जरूरी है।'
  • कोर्ट ने कहा, 'अभियोजन पक्ष ने साबित किया कि मालेगांव में विस्फोट हुआ था, लेकिन यह साबित नहीं कर पाया कि उस मोटरसाइकिल में बम रखा गया था। अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि घायलों की संख्या 101 नहीं, बल्कि केवल 95 थी। कुछ मेडिकल प्रमाणपत्रों में भी हेराफेरी की गई थी।
  • कोर्ट ने कहा, 'श्रीकांत प्रसाद पुरोहित के आवास में विस्फोटकों के भंडारण या संयोजन का कोई सबूत नहीं मिला। पंचनामा करते समय जांच अधिकारी की ओर से घटनास्थल का कोई स्केच नहीं बनाया गया था। घटनास्थल से कोई फिंगरप्रिंट, डंप डेटा या अन्य कोई जानकारी एकत्र नहीं की गई थी। नमूने गड़बड़ थे, इसलिए रिपोर्ट निर्णायक और विश्वसनीय नहीं हो सकी। विस्फोट में कथित रूप से शामिल बाइक का चेसिस नंबर स्पष्ट नहीं था। अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि विस्फोट से ठीक पहले वह साध्वी प्रज्ञा के पास थी।'
  • कोर्ट ने कहा, 'इस मामले में यूएपीए लागू नहीं किया जाएगा, क्योंकि नियमों के अनुसार मंजूरी नहीं ली गई थी। इस मामले में यूएपीए के दोनों मंजूरी आदेश दोषपूर्ण हैं।'
  • कोर्ट ने कहा, 'अभियोजन पक्ष ने अभिनव भारत संगठन को एक सामान्य संदर्भ के रूप में इस्तेमाल किया था। इस बात का कोई सबूत नहीं है कि अभिनव भारत के धन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया गया था।'
  • कोर्ट ने कहा, 'हमने एडीजी एटीएस को आरोपी सुधाकर चतुर्वेदी के घर में विस्फोटक रखने के मामले की जांच शुरू करने का आदेश दिया है।'




कौन-कौन आरोपी थे?
इससे पहले सुबह सातों आरोपी दक्षिण मुंबई स्थित सत्र न्यायालय पहुंचे, जहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। आरोपी जमानत पर बाहर थे। मामले के आरोपियों में प्रज्ञा ठाकुर, पुरोहित, मेजर (सेवानिवृत्त) रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी शामिल थे। उन सभी पर यूएपीए और भारतीय दंड संहिता तथा शस्त्र अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आतंकवादी कृत्य करने का आरोप लगाया गया था। अभियोजन पक्ष का दावा था कि स्थानीय मुस्लिम समुदाय को आतंकित करने के इरादे से दक्षिणपंथी चरमपंथियों ने विस्फोट की योजना बनाई थी।





साध्वी प्रज्ञा ने क्या कहा?
फैसले के बाद साध्वी प्रज्ञा ने कहा, 'मैंने शुरू से ही कहा था कि जिन्हें भी जांच के लिए बुलाया जाता है, उनके पीछे कोई न कोई आधार जरूर होना चाहिए। मुझे जांच के लिए बुलाया गया और मुझे गिरफ्तार करके प्रताड़ित किया गया। इससे मेरा पूरा जीवन बर्बाद हो गया। मैं एक साधु का जीवन जी रही थी, लेकिन मुझ पर आरोप लगाए गए और कोई भी हमारे साथ खड़ा नहीं हुआ। मैं जिंदा हूं, क्योंकि मैं एक संन्यासी हूं। उन्होंने एक साजिश के तहत भगवा को बदनाम किया। आज भगवा की जीत हुई है, हिंदुत्व की जीत हुई है और ईश्वर दोषियों को सजा देगा। हालांकि, भारत और भगवा को बदनाम करने वालों को आपने गलत साबित नहीं किया।'



पुरोहित ने क्या कहा?
लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित ने कहा, 'मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे उसी दृढ़ विश्वास के साथ अपने देश और अपने संगठन की सेवा करने का मौका दिया, जैसा मैं इस मामले में फंसने से पहले कर रहा था। मैं इसके लिए किसी भी संगठन को दोष नहीं देता। जांच एजेंसियों जैसे संगठन गलत नहीं हैं, बल्कि संगठनों के अंदर के लोग ही गलत कर रहे हैं। मैं आपको व्यवस्था में आम आदमी का विश्वास फिर से बहाल करने के लिए धन्यवाद देता हूं।'

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