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एक्सप्लेनर: पहले अमित शाह से मुलाकात, फिर शरद पवार से बात; राकांपा में क्यों फूट की अटकलें, किस ओर जाएगा दल?
Sat, 07 Nov 2026 08:57 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sat, 07 Nov 2026 08:57 AM IST
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सार
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एनसीपी में टूट और विलय की अटकलें।
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विस्तार
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में एक बार फिर टूट की अटकलें लग रही हैं। खासकर नवंबर का महीना पार्टी के लिए भारी पड़ता दिख रहा है। इस पूरी हलचल की शुरुआत हुई 1 नवंबर को, जब राकांपा के आधा दर्जन शीर्ष नेता दिल्ली पहुंच गए। इसे लेकर महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में अटकलों का दौर शुरू हो गया और विपक्षी महाविकास अघाड़ी (एमवीए) ने राकांपा में एक और टूट की आशंका जताई।यह चर्चा थमी ही थीं कि शुक्रवार को एक बार फिर राकांपा के कद्दावर नेता प्रफुल्ल पटेल अविभाजित राकांपा के संस्थापक शरद पवार से मिलने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल पहुंच गए। प्रफुल्ल पटेल ने तो इसे शरद पवार के स्वास्थ्य का हाल जानने के लिए हुई मुलाकात करार दिया, लेकिन राजनीतिक हलकों में राकांपा में सबकुछ ठीक न होने की बातें फिर शुरू हो गईं।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर राकांपा में एक बार फिर टूटने की जो चर्चा जारी है, उनकी शुरुआत कब-कैसे हुई? टूट की आशंका को लेकर जो अटकलें लगाई जा रही हैं, उसकी क्या-क्या वजहें सामने आई हैं? क्यों अजित पवार की राकांपा के शरद पवार की राकांपा से विलय की बात उठी है? खुद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का इस पर क्या कहना है? विपक्ष की ओर से क्या दावे किए जा रहे हैं? आइये जानते हैं...
पहले जानें- 1 नवंबर को ऐसा क्या हुआ कि राकांपा में टूट की चर्चा शुरू हुई?
1 नवंबर (रविवार) को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ राकांपा के छह वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक हुई, जिसने पार्टी में आंतरिक कलह और टूट की चर्चा को हवा दे दी। इस बैठक में राकांपा के छह प्रमुख नेता- प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ, दिलीप वलसे पाटिल और धनंजय मुंडे शामिल हुए थे।
सामने आया कि इस बैठक की तात्कालिक वजह हाल ही में महाराष्ट्र में हुए विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव और औरंगाबाद स्नातक सीट पर राकांपा की हार रही, जिससे भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और राकांपा के संयोजन वाली महायुति को बड़ा झटका लगा। इस सीट को शरद पवार की राकांपा ने जीता था।
अमित शाह के साथ दिल्ली में बैठक के लिए प्रफुल्ल पटेल, धनंजय मुंडे जैसे सभी शीर्ष नेता पहुंचे थे। लेकिन इसमें न तो पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार मौजूद थीं और न ही उनके दोनों बेटे- राज्यसभा सांसद पार्थ पवार और जय पवार उपस्थित थे। पार्टी प्रमुख को दरकिनार कर शीर्ष नेताओं का सीधे दिल्ली जाकर शाह से मिलना इस बात का सीधा संकेत माना गया कि संगठन में कुछ गंभीर मतभेद हैं।
क्यों इस मुलाकात ने पैदा कीं टूट की अटकलें?
1. बैठक पार्टी प्रमुख और पवार परिवार की पूरी तरह गैरमौजूदगीअमित शाह के साथ दिल्ली में बैठक के लिए प्रफुल्ल पटेल, धनंजय मुंडे जैसे सभी शीर्ष नेता पहुंचे थे। लेकिन इसमें न तो पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार मौजूद थीं और न ही उनके दोनों बेटे- राज्यसभा सांसद पार्थ पवार और जय पवार उपस्थित थे। पार्टी प्रमुख को दरकिनार कर शीर्ष नेताओं का सीधे दिल्ली जाकर शाह से मिलना इस बात का सीधा संकेत माना गया कि संगठन में कुछ गंभीर मतभेद हैं।
1 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने पहुंचे थे राकांपा के शीर्ष नेता।
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2. पार्थ पवार के 'दखल' और एकतरफा फैसलों के खिलाफ सीधी शिकायत
- रिपोर्ट्स में कहा गया कि अमित शाह के साथ बैठक का मुख्य आधार पार्टी के शीर्ष नेताओं में उपजा असंतोष था। उनका कहना था कि दिवंगत अजित पवार के बाद अनुभवी नेताओं को राकांपा में दरकिनार किया जा रहा है।
- दावा किया गया है नेताओं ने पार्थ पवार पार्टी और सरकार के कामकाज में जरूत से ज्यादा दखल देने और बिना वरिष्ठ नेताओं को विश्वास में लिए राष्ट्रीय और मुंबई स्तर पर मनमाने फैसले और नियुक्तियां करने की बात अमित शाह के सामने भी रखीं।
- बैठक के बाद सामने आया कि राकांपा नेताओं ने सुनेत्रा पवार की तरफ से पार्थ पवार को खुली छूट दिए जाने को लेकर चिंता जताई और वरिष्ठ नेताओं के खुद को अलग-थलग महसूस किए जाने की बात से भी अवगत कराया।
3. एमएलसी चुनाव में हार और अविश्वास का माहौल
इस बैठक की टाइमिंग ने भी राकांपा में टूट की अटकलें पैदा कीं। दरअसल, यह बैठक महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में औरंगाबाद स्नातक सीट पर राकांपा की हार के ठीक बाद हुई, जहां पार्टी 18 साल से काबिज थी और शरद पवार गुट (राकांपा-एसपी) ने जीत दर्ज की थी। संगठन के अंदर नेताओं में भारी 'विश्वास की कमी' देखी गई, जहां सभी को अपना राजनीतिक वजूद छिनने का डर सता रहा था।
4. दिल्ली से लौटते ही अलग समानांतर बैठकें
एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली से मुंबई लौटने के बाद इन नेताओं ने सुनेत्रा पवार से मिलने के बजाय छगन भुजबल के आवास पर बंद कमरों में अलग से बैठकें कीं। इसके बाद के घटनाक्रम को संभालने के लिए सुनेत्रा पवार को आनन-फानन में विधायकों और कोर कमेटी की अलग बैठक बुलानी पड़ी, जिससे यह साफ हो गया कि पार्टी दो फाड़ होने के कगार पर नजर आ रही है।
इस बैठक की टाइमिंग ने भी राकांपा में टूट की अटकलें पैदा कीं। दरअसल, यह बैठक महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में औरंगाबाद स्नातक सीट पर राकांपा की हार के ठीक बाद हुई, जहां पार्टी 18 साल से काबिज थी और शरद पवार गुट (राकांपा-एसपी) ने जीत दर्ज की थी। संगठन के अंदर नेताओं में भारी 'विश्वास की कमी' देखी गई, जहां सभी को अपना राजनीतिक वजूद छिनने का डर सता रहा था।
4. दिल्ली से लौटते ही अलग समानांतर बैठकें
एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली से मुंबई लौटने के बाद इन नेताओं ने सुनेत्रा पवार से मिलने के बजाय छगन भुजबल के आवास पर बंद कमरों में अलग से बैठकें कीं। इसके बाद के घटनाक्रम को संभालने के लिए सुनेत्रा पवार को आनन-फानन में विधायकों और कोर कमेटी की अलग बैठक बुलानी पड़ी, जिससे यह साफ हो गया कि पार्टी दो फाड़ होने के कगार पर नजर आ रही है।
अचानक क्यों उठी अजित पवार की राकांपा के शरद पवार की राकांपा से विलय की बात?
दिवंगत अजित पवार की राकांपा, जिसका मौजूदा समय में नेतृत्व सुनेत्रा पवार के पास है, के शरद पवार की राकांपा से संभावित विलय की चर्चाएं कई प्रमुख राजनीतिक घटनाक्रमों, बयानों और अंदरूनी हालात के कारण उठी हैं।1. पहले अमित शाह की 'विलय' कराने से जुड़ी सख्त चेतावनी
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट दावा किया गया कि 1 नवंबर को दिल्ली में जब राकांपा के छह वरिष्ठ नेताओं ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर पार्टी के आंतरिक हालात और सुनेत्रा और पार्थ पवार की कार्यशैली की शिकायत की, तो शाह ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई। अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि आपसी खींचतान के कारण पार्टी गठबंधन के लिए एक बोझ बनती जा रही है। शाह ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर पार्टी की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ, तो पार्टी का राकांपा-एसपी में विलय हो सकता है और इसकी कमान वापस शरद पवार के पास जा सकती है। बताया जाता है कि इस टिप्पणी ने दोनों गुटों के एक होने की अटकलों को सबसे ज्यादा हवा दी।
हालांकि, वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक चंद्रकांत शिंदे ने कहा कि राकांपा नेताओं और अमित शाह के बीच बैठक में विलय को लेकर कोई सीधी बातचीत नहीं हुई थी; उनका जोर केवल पार्टी के अंदरूनी मतभेद और संगठनात्मक नियुक्तियों से जुड़े असंतोष को सुलझाने पर था, उन्होंने बताया कि अमित शाह ने राकांपा नेताओं को सिर्फ अपने अंदरूनी मसलों को हल करने के लिए कहा था, ताकि गठबंधन की स्थिति महाराष्ट्र में बेहतर की जा सके।
2. अब प्रफुल्ल पटेल और शरद पवार की अस्पताल में मुलाकात
मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती शरद पवार से राकांपा के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने गुरुवार रात मुलाकात की। इस मुलाकात का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें शरद पवार पटेल से कह रहे थे कि वे 10 नवंबर के बाद बैठकर इस मसले पर चर्चा करेंगे और पटेल ने इस पर सहमति जताई। दोनों नेताओं के बीच पारिवारिक संबंधों और राज्य व राष्ट्रीय राजनीति पर हुई इस बातचीत ने राजनीतिक गलियारों में विलय की चर्चाओं को दोबारा गर्मा दिया।
ये भी पढ़ें: एनसीपी में विलय की सुगबुगाहट: शरद पवार से मिले प्रफुल्ल पटेल, फिर क्यों गरमाया महाराष्ट्र का सियासी पारा?
2. अब प्रफुल्ल पटेल और शरद पवार की अस्पताल में मुलाकात
मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती शरद पवार से राकांपा के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने गुरुवार रात मुलाकात की। इस मुलाकात का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें शरद पवार पटेल से कह रहे थे कि वे 10 नवंबर के बाद बैठकर इस मसले पर चर्चा करेंगे और पटेल ने इस पर सहमति जताई। दोनों नेताओं के बीच पारिवारिक संबंधों और राज्य व राष्ट्रीय राजनीति पर हुई इस बातचीत ने राजनीतिक गलियारों में विलय की चर्चाओं को दोबारा गर्मा दिया।
ये भी पढ़ें: एनसीपी में विलय की सुगबुगाहट: शरद पवार से मिले प्रफुल्ल पटेल, फिर क्यों गरमाया महाराष्ट्र का सियासी पारा?
3. सुनील तटकरे का 'अजित पवार और 12 फरवरी' वाला खुलासा
इस बीच राकांपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने खुलासा किया कि अगर अजित पवार जीवित होते, तो इसी वर्ष 12 फरवरी को दोनों गुटों के विलय को अंतिम रूप दे दिया जाता। तटकरे के मुताबिक, दिवंगत अजित पवार 2029 के चुनावों और पार्टी की प्रासंगिकता को ध्यान में रखते हुए शरद पवार की सहमति से दोनों गुटों के विलय पर गंभीरता से काम कर रहे थे।
चंद्रकांत शिंदे के मुताबिक, दोनों गुटों के एक होने की बातचीत कोई नई नहीं है, बल्कि यह योजना उस समय से चल रही थी जब अजित पवार जीवित थे।
इस बीच राकांपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने खुलासा किया कि अगर अजित पवार जीवित होते, तो इसी वर्ष 12 फरवरी को दोनों गुटों के विलय को अंतिम रूप दे दिया जाता। तटकरे के मुताबिक, दिवंगत अजित पवार 2029 के चुनावों और पार्टी की प्रासंगिकता को ध्यान में रखते हुए शरद पवार की सहमति से दोनों गुटों के विलय पर गंभीरता से काम कर रहे थे।
चंद्रकांत शिंदे के मुताबिक, दोनों गुटों के एक होने की बातचीत कोई नई नहीं है, बल्कि यह योजना उस समय से चल रही थी जब अजित पवार जीवित थे।
राकांपा में टूट और विलय की चर्चाओं पर पत्रकार चंद्रकांत शिंदे।
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4. विपक्षी दल भी जता रहे राकांपा के विलय की संभावना
महाराष्ट्र में सियासी गतिविधियों पर नजर रख रहे पत्रकार चंद्रकांत शिंदे का कहना है कि शरद पवार की सबसे बड़ी चिंता सुप्रिया सुले और अपनी पार्टी के नेताओं का राजनीतिक भविष्य सुरक्षित करना है। सुप्रिया सुले इतने वर्षों से सांसद हैं, लेकिन न तो केंद्र में मंत्री बन पाईं और न ही महाराष्ट्र में कुछ हो पाया। अगर इस बहाने उन्हें केंद्र में कोई अच्छा मंत्रालय या पोर्टफोलियो मिल जाता है, तो यह विलय उनके लिए मुफीद रहेगा।"
उन्होंने आगे कहा, "अगर राकांपा का विलय हो जाएगा, तो उनका महाविकास अघाड़ी की तरफ जाना मुश्किल है, वे भाजपा के साथ ही जाएंगे। मुमकिन है कि विलय इसी शर्त पर हो। राकांपा-एसपी और शरद पवार सत्ता के बिना रह नहीं सकते और विपक्ष में मौजूदा समय में रहने पर सिर्फ नुकसान ही नुकसान हैं।"
- राकांपा (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने कहा कि दोनों गुटों का विलय संभव है, लेकिन इसके लिए शर्त यह है कि अजित पवार गुट को भाजपा और एनडीए का साथ छोड़ना होगा और उनके खिलाफ लड़ना होगा।
- दूसरी ओर शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने आरोप लगाया कि अजित पवार के निधन के बाद राकांपा 'अनाथ' हो गई है और भाजपा के इशारों पर काम कर रही है।
महाराष्ट्र में सियासी गतिविधियों पर नजर रख रहे पत्रकार चंद्रकांत शिंदे का कहना है कि शरद पवार की सबसे बड़ी चिंता सुप्रिया सुले और अपनी पार्टी के नेताओं का राजनीतिक भविष्य सुरक्षित करना है। सुप्रिया सुले इतने वर्षों से सांसद हैं, लेकिन न तो केंद्र में मंत्री बन पाईं और न ही महाराष्ट्र में कुछ हो पाया। अगर इस बहाने उन्हें केंद्र में कोई अच्छा मंत्रालय या पोर्टफोलियो मिल जाता है, तो यह विलय उनके लिए मुफीद रहेगा।"
उन्होंने आगे कहा, "अगर राकांपा का विलय हो जाएगा, तो उनका महाविकास अघाड़ी की तरफ जाना मुश्किल है, वे भाजपा के साथ ही जाएंगे। मुमकिन है कि विलय इसी शर्त पर हो। राकांपा-एसपी और शरद पवार सत्ता के बिना रह नहीं सकते और विपक्ष में मौजूदा समय में रहने पर सिर्फ नुकसान ही नुकसान हैं।"
टूट और शरद पवार गुट के विलय पर क्या है राकांपा का पक्ष?
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने पार्टी में आंतरिक कलह, नेताओं के अमित शाह से मिलने और शरद पवार गुट के साथ विलय की सभी अटकलों को पूरी तरह भ्रामक, निराधार और तथ्यहीन करार देकर खारिज किया है।1. अमित शाह के साथ मुलाकात पर पार्टी का स्पष्टीकरण
- राकांपा के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता उमेश पाटिल ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठ नेताओं की गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात सुनेत्रा पवार की पूर्व-सहमति और जानकारी से ही हुई थी। खुद सुनेत्रा पवार ने अपनी पिछली मुलाकात में अमित शाह से पार्टी के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल को समय देने का अनुरोध किया था।
- पार्टी का कहना है कि यह एक सामान्य व औपचारिक बैठक थी, जिसका मकसद महायुति गठबंधन के घटकों के बीच बेहतर तालमेल बनाना, संगठन को मजबूत करना और दिवंगत अजित पवार के समय के अहम मुद्दों, जैसे- वित्त मंत्रालय की वापसी और सूखा राहत पर चर्चा करना था।
राकांपा प्रवक्ता उमेश पाटिल।
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2. सुनेत्रा पवार के नेतृत्व पर अटूट भरोसा जताया
3. पार्थ पवार के दखल पर सफाई
- राकांपा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और मुंबई अध्यक्ष जीशान सिद्दीकी ने कहा कि पूरी पार्टी सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में पूरी तरह एकजुट है।
- तटकरे ने कहा कि पार्टी में किसी असंतोष का सवाल ही नहीं उठता; सभी फैसले आपसी संवाद और सामूहिक नेतृत्व के जरिए लिए जा रहे हैं।
- देवगिरि बंगले पर हुई विधायकों की बैठक के बाद यह दोहराया गया कि पार्टी 2029 के चुनावों में सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में ही और अधिक सीटें जीतकर आएगी।
3. पार्थ पवार के दखल पर सफाई
- पार्टी प्रवक्ता ने पार्थ पवार और पवार परिवार का बचाव करते हुए कहा कि अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार, पार्थ और जय पवार ने खुद को पूरी तरह पार्टी संगठन के लिए समर्पित कर दिया है।
- वरिष्ठों के असंतोष की खबरों के बीच कोर कमेटी और विधायकों की बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि संगठन से जुड़े सभी फैसले वरिष्ठ नेताओं के साथ सलाह-मशविरा और सामूहिक तालमेल से ही लिए जाएंगे।
4. शरद पवार गुट के साथ विलय की खबरों पर सीधा इनकार
आधिकारिक स्तर पर दोनों ही पक्षों ने औपचारिक विलय की बात से इनकार किया है।
इतना ही नहीं, अस्पताल में शरद पवार से प्रफुल्ल पटेल की मुलाकात पर पटेल ने खुद स्पष्ट किया कि यह केवल स्वास्थ्य जानने के लिए की गई शिष्टाचार भेंट थी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन उनके पारिवारिक और व्यक्तिगत संबंधों में कोई कड़वाहट नहीं है और यह बातचीत पार्टी के आंतरिक मामलों पर नहीं थी।
आधिकारिक स्तर पर दोनों ही पक्षों ने औपचारिक विलय की बात से इनकार किया है।
- राकांपा-एसपी के मुखिया शरद पवार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी पार्टी सत्ता के लिए किसी दल में विलय नहीं करेगी; जो नेता आना चाहें, वे स्वतंत्र रूप से शामिल हो सकते हैं।
- दूसरी ओर, राकांपा प्रवक्ता उमेश पाटील और सुनील तटकरे ने भी आधिकारिक तौर पर कहा कि विलय का अध्याय बंद हो चुका है और पार्टी सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में ही आगे बढ़ रही है।
- साथ ही, दोनों गुटों के 78 संगठनात्मक जिलों के अध्यक्षों, आगामी टिकटों और पदों के तालमेल की व्यावहारिक कठिनाइयों को भी विलय की राह में बड़ा रोड़ा बताया गया है।
इतना ही नहीं, अस्पताल में शरद पवार से प्रफुल्ल पटेल की मुलाकात पर पटेल ने खुद स्पष्ट किया कि यह केवल स्वास्थ्य जानने के लिए की गई शिष्टाचार भेंट थी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन उनके पारिवारिक और व्यक्तिगत संबंधों में कोई कड़वाहट नहीं है और यह बातचीत पार्टी के आंतरिक मामलों पर नहीं थी।