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एनसीपी में विलय की सुगबुगाहट: शरद पवार से मिले प्रफुल्ल पटेल, फिर क्यों गरमाया महाराष्ट्र का सियासी पारा?

Fri, 06 Nov 2026 05:32 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, मुंबई।

सार

मुंबई के अस्पताल में प्रफुल्ल पटेल और शरद पवार की मुलाकात का वीडियो सामने आने और सुनील तटकरे के चौंकाने वाले बयानों के बाद महाराष्ट्र में एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की चर्चाएं तेज हो गई हैं। तटकरे ने दावा किया है कि दिवंगत अजित पवार की देखरेख में यह विलय बहुत पहले ही तय हो चुका था। हालांकि, शरद पवार और उनके करीबियों के रुख को देखते हुए यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में राज्य की सियासत क्या नया मोड़ लेती है।
 
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शरद पवार से मिले प्रफुल्ल पटेल - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में इन दिनों महाराष्ट्र की सियासत का पारा अचानक हाई हो गया है। एनसीपी (एसपी) के मुखिया शरद पवार पिछले कुछ दिनों से सीने में इंफेक्शन के चलते अस्पताल में भर्ती हैं, और उनका हालचाल जानने के लिए राजनीतिक दिग्गजों का तांता लगा हुआ है। इसी बीच, पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल उनसे मिलने पहुंचे। दोनों के बीच हुई बातचीत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस वायरल वीडियो ने एक बार फिर महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में एनसीपी के दोनों गुटों के आपसी विलय की चर्चाओं को हवा दे दी है।
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सुनील तटकरे के चौंकाने वाले दावे
एनसीपी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और शरद पवार की इस गुप्त मुलाकात के ठीक बाद, सत्तारूढ़ एनसीपी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने एक ऐसा बयान दे दिया जिसने राजनीतिक पंडितों को भी हैरान कर दिया। तटकरे ने दावा किया कि अगर दिवंगत नेता अजित पवार आज हमारे बीच होते, तो एनसीपी के दोनों गुटों का विलय इसी साल 12 फरवरी को ही औपचारिक रूप से हो चुका होता। इस बड़े खुलासे के बाद से राज्य की राजनीति में तरह-तरह के कयासों का दौर शुरू हो गया है और हर कोई यह जानना चाहता है कि पर्दे के पीछे आखिर क्या खिचड़ी पक रही थी।

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अजित पवार के निधन के बाद कैसे बदले हालात?
गौरतलब है कि महाराष्ट्र के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और पार्टी के सर्वेसर्वा अजित पवार का इसी साल 28 जनवरी को बारामती में एक विमान हादसे में निधन हो गया था। उनके जाने के बाद पार्टी और परिवार की कमान उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार के हाथों में आ गई, जो इस समय राज्य की उपमुख्यमंत्री भी हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अजित पवार बहुत ही दूरगामी सोच के साथ दोनों गुटों के विलय को आगे बढ़ा रहे थे, ताकि साल 2029 के चुनावों और पार्टी के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

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क्या वाकई में दोनों गुटों का विलय होने जा रहा है?
जब इस पूरे विवाद और वायरल वीडियो को लेकर प्रफुल्ल पटेल से सवाल किए गए, तो उन्होंने साफ किया कि उनकी यह मुलाकात पूरी तरह से सिर्फ शरद पवार की सेहत का हाल जानने के लिए थी और इसका आंतरिक दलगत राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। इसके अलावा, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शरद पवार को फोन किए जाने को दोनों नेताओं के बीच के आपसी आदर और सौहार्दपूर्ण रिश्तों का नतीजा बताया। दूसरी तरफ, सितंबर के महीने में खुद शरद पवार यह कह चुके हैं कि उनकी पार्टी सिर्फ सत्ता हासिल करने के लिए किसी भी कीमत पर किसी अन्य दल में विलय नहीं करेगी।

क्या है इनसाइड स्टोरी?
अस्पताल में हुई इस मुलाकात और विलय की चर्चाओं के पीछे दिल्ली की हलचल का भी बड़ा हाथ माना जा रहा है। हाल ही में, सत्तारूढ़ एनसीपी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी प्रमुख सुनेत्रा पवार और उनके बेटों (पार्थ और जय) को साथ लिए बिना दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से गुप्त मुलाकात की थी। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व पार्थ पवार के बढ़ते हुए सियासी प्रभाव से बिल्कुल खुश नहीं है। इन तमाम अंदरूनी उठापटक के बीच शरद पवार के स्वास्थ्य को जानने के लिए गौतम अडानी, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और संजय राउत जैसे दिग्गज नेता भी अस्पताल का दौरा कर चुके हैं।
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