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नेशनल हेराल्ड मामला : दिल्ली हाई कोर्ट ने खारिज की सोनिया और राहुल की याचिकाएं

Mon, 10 Sep 2018 06:49 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 10 Sep 2018 06:49 PM IST
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National Herald case: Supreme Court dismisses petitions of Sonia and Rahul gandhi
सोनिया गांधी, राहुल गांधी
दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया जिनमें उन्होंने 2011-12 के अपने कर निर्धारण की फाइल दोबारा खोले जाने को चुनौती दी थी। 
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न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति ए के चावला की पीठ ने कहा कि याचिकाएं खारिज की जाती हैं। पीठ ने कांग्रेस नेता ऑस्कर फर्नांडीस की याचिका भी खारिज कर दी। उन्होंने भी 2011-12 के अपने कर निर्धारण की फाइल दोबारा खोले जाने को चुनौती दी थी। (इनपुट, भाषा)
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क्या है नेशनल हेराल्ड केस

National Herald case: Supreme Court dismisses petitions of Sonia and Rahul gandhi
नेशनल हेराल्ड

बता दें कि मामला नेशनल हेरल्ड अखबार से जुड़ा है जिसकी स्थापना 1938 में जवाहरलाल नेहरू ने की थी। उस समय से यह अखबार कांग्रेस का मुखपत्र माना जाता रहा। अखबार का मालिकाना हक एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड यानी 'एजेएल' के पास था जो दो और अखबार भी छापा करती थी। हिंदी में 'नवजीवन' और उर्दू में 'कौमी आवाज'। आजादी के बाद 1956 में एसोसिएटेड जर्नल को अव्यवसायिक कंपनी के रूप में स्थापित किया गया और कंपनी एक्ट धारा 25 के अंतर्गत इसे कर मुक्त भी कर दिया गया।

वर्ष 2008 में 'एजेएल' के सभी प्रकाशनों को निलंबित कर दिया गया और कंपनी पर 90 करोड़ रुपए का कर्ज भी चढ़ गया। फिर कांग्रेस नेतृत्व ने 'यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड' नाम की एक नई अव्यवसायिक कंपनी बनाई जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित मोतीलाल वोरा, सुमन दुबे, ऑस्कर फर्नांडिस और सैम पित्रोदा को निदेशक बनाया गया। इस नई कंपनी में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास 76 प्रतिशत शेयर थे जबकि बाकी के 24 प्रतिशत शेयर अन्य निदेशकों के पास थे।

कांग्रेस पार्टी ने इस कंपनी को 90 करोड़ रुपए बतौर ऋण भी दे दिया। इस कंपनी ने 'एजेएल' का अधिग्रहण कर लिया। भाजपा के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने वर्ष 2012 में एक याचिका दायर कर कांग्रेस के नेताओं पर 'धोखाधड़ी' का आरोप लगाया। उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि 'यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड' ने सिर्फ 50 लाख रुपयों में 90.25 करोड़ रुपए वसूलने का उपाय निकाला जो 'नियमों के खिलाफ' है। याचिका में आरोप है कि 50 लाख रुपए में नई कंपनी बना कर 'एजेएल' की 2000 करोड़ रुपए की संपत्ति को 'अपना बनाने की चाल' चली गई।

समझिए पूरा मामला

National Herald case: Supreme Court dismisses petitions of Sonia and Rahul gandhi
राहुल गांधी, सोनिया गांधी

दिल्ली की एक अदालत ने मामले में चार गवाहों के बयान दर्ज किए और 26 जून 2014 को अदालत ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित नई कंपनी में निदेशक बनाए गए सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, ऑस्कर फर्नांडिस और मोतीलाल वोरा को पेश होने का समन भेज दिया। अदालत ने 'यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड' के सभी निदेशकों को 7 अगस्त 2014 को अपने सामने पेश होने का निर्देश दिया। मगर कांग्रेस के नेताओं ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई के बाद निचली अदालत की ओर से जारी समन पर रोक लगा दी गई।

कांग्रेस के नेताओं ने अदालत में दलील दी कि 'यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड' नाम की संस्था को 'सामजिक और दान करम' के कार्यों के लिए बनाया गया है। नेताओं की यह भी दलील थी कि 'एजेएल' के शेयर स्थानांतरित करने में किसी 'गैर कानूनी' प्रक्रिया को 'अंजाम नहीं दिया गया' बल्कि यह शेयर स्थानांतरित करने की 'सिर्फ एक वित्तीय प्रक्रिया' थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने कांग्रेस के नेताओं की ओर से दायर 'स्टे' की याचिका को खौारिज करते हुए कहा कि एक 'सबसे पुराने राष्ट्रीय दल की साख दांव पर' लगी है क्योंकि पार्टी के नेताओं के पास ही नई कंपनी के शेयर हैं।

हाई कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत के लिए यह जरूरी कि वो मामले की बारीकी से सुनवाई करे ताकि पता चल पाये कि 'एजेएल' को ऋण किन सूरतों में दिया गया और फिर वो नई कंपनी 'यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड' को कैसे ट्रांस्फर किया गया। 8 दिसंबर को पेशी से राहत मांगने वाली याचिका की सुनवाई करते हुए दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 19 दिसंबर मुकर्रर की थी। शनिवार की शाम 3 बजे सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य आरोपी अदालत में पेश होंगे। जज ने कांग्रेस के नेताओं के वकीलों से कहा है कि वो सोनिया गांधी, राहुल गांधी और उन सब की अदालत में पेशी सुनिश्चित करें जिनको मामले में अदालत के सामने पेश होने के समन भेजे गए हैं।

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