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Naga Peace Talk: केंद्रीय प्रतिनिधि एके मिश्रा ने की एनएनपीजी नेताओं से वार्ता, राजनीतिक समाधान पर जोर
Fri, 21 Feb 2025 06:56 AM IST
शुभम कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शुभम कुमार
Updated Fri, 21 Feb 2025 06:56 AM IST
सार
बैठक में नगा राजनीतिक समूहों और हितधारकों के बीच सहमति विकसित करने पर भी विचार-विमर्श किया गया। ताकि किसी भी हितधारक को बाहर किए बिना व्यापक आधार पर मुद्दे को हल करने में तेजी लाई जा सके।
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नगा शांति वार्ता
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नगा शांति वार्ता के लिए केंद्र सरकार के प्रतिनिधि एके मिश्रा बृहस्पतिवार को नगा राष्ट्रीय राजनीतिक समूहों (एनएनपीजी) की कार्य समिति के साथ बातचीत में शामिल हुए। बैठक में नगा नेताओं ने उन्हें हाल के घटनाक्रम की जानकारी दी और राजनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया।
बैठक में नगा राजनीतिक समूहों और हितधारकों के बीच सहमति विकसित करने पर भी विचार-विमर्श किया गया। ताकि किसी भी हितधारक को बाहर किए बिना व्यापक आधार पर मुद्दे को हल करने में तेजी लाई जा सके। एनएनपीजी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि परस्पर विरोधी नगा राजनीतिक समूहों के बीच सहमति बनाने के लिए चल रहे प्रयासों की भी समीक्षा की गई। सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार के प्रतिनिधि शुक्रवार को एनएससीएन-आईएम के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर सकते हैं।
केंद्र और एनएससीएन-आईएम ने 1997 में संघर्ष विराम पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के राजनीतिक समाधान के लिए बातचीत शुरू हुई थी। 70 से अधिक दौर की वार्ता के बाद केंद्र ने 2015 में एनएससीएन-आईएम के साथ रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर किए। हालांकि, केंद्र ने नगाओं के लिए अलग ध्वज और संविधान की मांग को स्वीकार नहीं किया है, जिसके कारण बातचीत लंबी खिंचती चली गई। एनएससीएन-आईएम नगालैंड के लिए अलग ध्वज और संविधान की मांग पर अड़ा हुआ है।
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बैठक में नगा राजनीतिक समूहों और हितधारकों के बीच सहमति विकसित करने पर भी विचार-विमर्श किया गया। ताकि किसी भी हितधारक को बाहर किए बिना व्यापक आधार पर मुद्दे को हल करने में तेजी लाई जा सके। एनएनपीजी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि परस्पर विरोधी नगा राजनीतिक समूहों के बीच सहमति बनाने के लिए चल रहे प्रयासों की भी समीक्षा की गई। सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार के प्रतिनिधि शुक्रवार को एनएससीएन-आईएम के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर सकते हैं।
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केंद्र और एनएससीएन-आईएम ने 1997 में संघर्ष विराम पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के राजनीतिक समाधान के लिए बातचीत शुरू हुई थी। 70 से अधिक दौर की वार्ता के बाद केंद्र ने 2015 में एनएससीएन-आईएम के साथ रूपरेखा समझौते पर हस्ताक्षर किए। हालांकि, केंद्र ने नगाओं के लिए अलग ध्वज और संविधान की मांग को स्वीकार नहीं किया है, जिसके कारण बातचीत लंबी खिंचती चली गई। एनएससीएन-आईएम नगालैंड के लिए अलग ध्वज और संविधान की मांग पर अड़ा हुआ है।
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