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अफवाह रोकने के लिए मणिपुर में पांच दिनों के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित
अमर उजाला ब्यूरो, इंफाल
Updated Fri, 20 Jul 2018 08:42 PM IST
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मोबाइल
राज्य में नफरत फैलाने वाले वीडियो और संदेशों के जरिए अफवाह फैलने पर अंकुश लगाने के लिए मणिपुर सरकार ने पांच दिनों के लिए इंटरनेट मोबाइल सेवाएं निलंबित कर दी हैं।
राज्य के विशेष सचिव (गृह) केएच रघुमणि की ओर से जारी एक आदेश में कहा गया है कि अफवाहों पर अंकुश लगाने के लिए यह फैसला लिया गया है। इन अफवाहों से राज्य में कानून व व्यवस्था की गंभीर समस्या पैदा होने का अंदेशा है।
यह भी पढ़ें: भीड़ की बढ़ती अराजकता पर लगाम के लिए सुप्रीम कोर्ट ने चलाया कायदे का चाबुक
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बता दें कि हाल में मोबाइल के जरिए भेजे जाने वाले वीडियो व संदेशों के चलते भीड़ की हिंसा और सामूहिक पिटाई के कई मामले हुए हैं।
बच्चा चोरी की अफवाह के चलते साल 2017 से अब तक पीट-पीट कर मार देने से हुई ये 32वीं हत्या है। सिर्फ साल 2018 की बात करें तो वाट्सऐप के जरिए अफवाह फैलने के बाद हुई ये 21वीं हत्या है। इस आंकड़ें में गोरक्षा के नाम पर हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं को जोड़ दें तो साल 2015 से अब तक 100 से ज्यादा मौतें हो चुकीं हैं।
लोग बिना जांचे संदेश आगे बढ़ा देते हैं
सोशल मीडिया और इंटरनेट के प्रसार से भारत में समस्या और भी गंभीर हो गई है। यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक में हुई रिसर्च की मानें तो 40 फीसदी पढ़े-लिखे युवा खबर की सत्यता जांच किए बिना ही संदेश दूसरे लोगों को भेज देते हैं। आंकड़ो की माने तो कुछ युवाओं को अगर सोशल मीडिया के जरिये मिले संदेशों भी कुछ गलत भी लगता है तो इनमें से सिर्फ 45 फीसदी युवा ही खबर की सत्यता जांचते हैं।
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राज्य के विशेष सचिव (गृह) केएच रघुमणि की ओर से जारी एक आदेश में कहा गया है कि अफवाहों पर अंकुश लगाने के लिए यह फैसला लिया गया है। इन अफवाहों से राज्य में कानून व व्यवस्था की गंभीर समस्या पैदा होने का अंदेशा है।
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बता दें कि हाल में मोबाइल के जरिए भेजे जाने वाले वीडियो व संदेशों के चलते भीड़ की हिंसा और सामूहिक पिटाई के कई मामले हुए हैं।
बच्चा चोरी की अफवाह के चलते साल 2017 से अब तक पीट-पीट कर मार देने से हुई ये 32वीं हत्या है। सिर्फ साल 2018 की बात करें तो वाट्सऐप के जरिए अफवाह फैलने के बाद हुई ये 21वीं हत्या है। इस आंकड़ें में गोरक्षा के नाम पर हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं को जोड़ दें तो साल 2015 से अब तक 100 से ज्यादा मौतें हो चुकीं हैं।
लोग बिना जांचे संदेश आगे बढ़ा देते हैं
सोशल मीडिया और इंटरनेट के प्रसार से भारत में समस्या और भी गंभीर हो गई है। यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक में हुई रिसर्च की मानें तो 40 फीसदी पढ़े-लिखे युवा खबर की सत्यता जांच किए बिना ही संदेश दूसरे लोगों को भेज देते हैं। आंकड़ो की माने तो कुछ युवाओं को अगर सोशल मीडिया के जरिये मिले संदेशों भी कुछ गलत भी लगता है तो इनमें से सिर्फ 45 फीसदी युवा ही खबर की सत्यता जांचते हैं।