फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Microplastic: Indian scientists will find a way to destroy it, present up to 30 cm under the ground in the fields of Maharashtra, Karnataka

घातक माइक्रोप्लास्टिक : भारतीय वैज्ञानिक खोजेंगे इसे नष्ट करने का तरीका, महाराष्ट्र, कर्नाटक के खेतों में जमीन के अंदर 30 सेमी तक मौजूद

Sun, 08 May 2022 06:22 AM IST
योगेश साहू परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sun, 08 May 2022 06:22 AM IST
विज्ञापन
सार
हमें रोजाना माइक्रोप्लास्टिक दिखाई देता है, पर हमें उसके बारे में पता नहीं होता। टूथपेस्ट और फेस स्क्रब में उपयुक्त माइक्रोबायड्स नामक कॉस्मेटिक में माइक्रोप्लास्टिक होता है। नायलॉन, पॉलिएस्टर, रेयान आदि कपड़ों को जब धोते हैं, तो वाशिंग मशीन में ये रेशे छोड़ते हैं। यही रेशे पानी में बह जाते हैं और बाद में सूक्ष्म कणों में टूटकर माइक्रोप्लास्टिक के कण बनते हैं।
loader
Microplastic: Indian scientists will find a way to destroy it, present up to 30 cm under the ground in the fields of Maharashtra, Karnataka
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay

विस्तार

भारतीय वैज्ञानिक माइक्रोप्लास्टिक को नष्ट करने का रास्ता खोजेंगे। केंद्र सरकार के बायोटेक्नोलॉजी विभाग (डीबीटी) ने देश के अलग-अलग अनुसंधान केंद्रों के साथ मिलकर अध्ययन की योजना बनाई है। इसके लिए निजी अनुसंधान केंद्र और कंपनियों को भी जुड़ने का न्योता दिया गया है।



डीबीटी के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि जैविक प्रक्रियाओं के जरिए माइक्रोप्लास्टिक की समस्या से भारत सहित पूरी दुनिया को छुटकारा दिलाया जा सकता है। प्लास्टिक की तरह उसके छोटे टुकड़े भी वर्षों तक नष्ट नहीं होते हैं। इस योजना पर काफी समय से काम चल रहा है। हाल ही में इस प्रोजेक्ट का समय भी बढ़ाया गया। इससे अधिक से अधिक शोधार्थियों के साथ अध्ययन आगे बढ़ाया जा सकेगा।


जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र और कर्नाटक के खेतों में माइक्रोप्लास्टिक पाया गया है। महाराष्ट्र के बड़गांव में मिट्टी के अंदर 15 सेंटीमीटर तक माइक्रोप्लास्टिक अधिक मात्रा में मिला है। वहीं कर्नाटक के खानपुर गांव में जमीन के अंदर 30 सेंटीमीटर तक प्रति एक किलोग्राम मिट्टी में आठ टुकड़ों की दर से माइक्रोप्लास्टिक कण मिले हैं। 

वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया के रॉयल मेलबर्न इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय और चीन के हेनान विश्वविद्यालय ने संयुक्त रूप से अध्ययन किया है। इसमें बताया गया है, माइक्रोप्लास्टिक और उसके साथ घातक रसायन समुद्र में मौजूद मछलियों तक पहुंचते हैं और उनके आहार बनते हैं। ये उन्हें काफी नुकसान पहुंचाते हैं। यहां तक मछलियां मर भी जाती हैं।

क्या है माइक्रोप्लास्टिक
माइक्रोप्लास्टिक, प्लास्टिक के छोटे-छोटे टुकड़े होते हैं। ये बीते कुछ वर्षों में भारत सहित पूरी दुनिया के लिए नए संकट के रूप में सामने आए हैं। प्लास्टिक के अलावा ये कपड़ों और अन्य वस्तुओं के माइक्रोफाइबर के टूटने पर भी बनते हैं। इनका आकार एक माइक्रोमीटर से पांच मिलीमीटर तक होता है। सामान्य तौर पर कहें तो ये एक तरह से तिल के बीज के लगभग बराबर होते हैं।

...तो समुद्र में मछलियों से ज्यादा होगा प्लास्टिक

  • एलन मैकआर्थर फाउंडेशन की रिपोर्ट बताती है कि प्लास्टिक को लेकर वैश्विक स्तर पर अगर तुरंत कुछ नहीं किया गया तो वर्ष 2050 तक समुद्र में मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक होगा।
  • स्वीडन की उप्साला विश्वविद्यालय के शोधार्थियों के अनुसार प्लास्टिक खाने से मछलियों की वृद्धि  होती है और वे जल्दी मरने लगती हैं। कुछ मछलियों को इन्हें खाने की लत लग जाती है।
  • एनवायरनमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि दुनिया भर में लोग हर साल 39 से 52 हजार माइक्रोप्लास्टिक के कणों को निगल जाते हैं।
  • मांस के सेवन से माइक्रोप्लास्टिक इंसानों तक पहुंचता है। उनके दिल व फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बनता है।

अलग-अलग अनुसंधान केंद्रों के साथ मिलकर अध्ययन शुरू

  • 94 लाख प्लास्टिक कचरा निकलता है भारत में प्रति वर्ष
  • 40 फीसदी प्लास्टिक कचरा इकट्ठा ही नहीं हो पाता भारत में

...तो होगा बड़ा बदलाव
इस समस्या के समाधान के लिए सिंगल यूज प्लास्टिक को बढ़ावा दिया जा रहा है। लेकिन जागरूकता की कमी के साथ माइक्रोप्लास्टिक कचरे पर अभी तक सही शोध भी नहीं हुआ है। ऐसे में अगर वैज्ञानिक इस खोज में सफल होते हैं तो पर्यावरण के लिहाज से एक बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

चिंताः टूथपेस्ट और स्क्रब में भी
डीबीटी के अनुसार हमें रोजाना माइक्रोप्लास्टिक दिखाई देता है, पर हमें उसके बारे में पता नहीं होता। टूथपेस्ट और फेस स्क्रब में उपयुक्त माइक्रोबायड्स नामक कॉस्मेटिक में माइक्रोप्लास्टिक होता है। नायलॉन, पॉलिएस्टर, रेयान आदि कपड़ों को जब धोते हैं, तो वाशिंग मशीन में ये रेशे छोड़ते हैं। यही रेशे पानी में बह जाते हैं और बाद में सूक्ष्म कणों में टूटकर माइक्रोप्लास्टिक के कण बनते हैं।

कर्नाटक, महाराष्ट्र के सभी सैंपल में मिला
कर्नाटक और महाराष्ट्र के गांवों से लिए मिट्टी के सैंपल में माइक्रोप्लास्टिक कणों की पुष्टि हुई। कण प्लास्टिक मल्च शीट से जुड़े थे। इस तरह के प्लास्टिक का खेती में बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है। महाराष्ट्र के सैंपल में प्रति किलोग्राम मिट्टी में 87.57 टुकड़े माइक्रोप्लास्टिक युक्त मिले हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed