MHA Extends BSF Power: बीएसएफ की धार कुंद कर देगी 'सियासत', ये पांच बातें जो बल की 'नई ड्यूटी' के जोखिम को करती हैं उजागर
बीएसएफ के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया, ये 'पॉलिटिकल मूव' है। जल्दबाजी में फैसला लिया गया है। पाकिस्तान और बांग्लादेश बॉर्डर पर चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में बीएसएफ का ध्यान किसी दूसरी तरफ डायवर्ट क्यों किया जा रहा है। राजनीतिक मकसद और बॉर्डर गार्ड, इनका आपस में कोई मेल नहीं है...
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पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा की चौकसी की जिम्मेदारी जिस बीएसएफ पर है, लेकिन अब उसे 'पुलिसिंग' में भी लगाया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को साझा करने वाले तीन राज्य असम, पश्चिम बंगाल और पंजाब में बीएसएफ को सीमा के भीतर 50 किमी तक के क्षेत्र में गिरफ्तारी, तलाशी व जब्ती की शक्ति प्रदान की गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और विपक्षी नेताओं के अपने-अपने तर्क हैं। बीएसएफ के मौजूदा अधिकारी और रिटायर्ड अफसर, इस फरमान को सही नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि ये 'सियासत' बीएसएफ की धार को कुंद कर देगी। नई ड्यूटी में जोखिम बहुत ज्यादा है। बॉर्डर गार्ड फोर्स को पुलिसिंग सिस्टम की जानकारी नहीं है। ट्रेनिंग भी नहीं है। पुलिसिंग की ड्यूटी के लिए फोर्स को अपना इंटेलिजेंस सिस्टम बढ़ाना पड़ेगा। इसके लिए अतिरिक्त बजट, मैनपावर और तकनीकी संसाधन जुटाने होंगे। स्थानीय पुलिस के साथ टकराहट बढ़ेगी। इतना ही नहीं, ड्यूटी के दौरान भ्रष्टाचार के छींटे पड़ने का जोखिम उठाने के लिए भी ‘बीएसएफ’ को तैयार रहना होगा।
जल्दबाजी में लिया गया फैसला
बीएसएफ के एक शीर्ष अधिकारी पहले तो इस मुद्दे पर कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं हुए, लेकिन बाद में उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर बताया, ये 'पॉलिटिकल मूव' है। जल्दबाजी में फैसला लिया गया है। पाकिस्तान और बांग्लादेश बॉर्डर पर चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में बीएसएफ का ध्यान किसी दूसरी तरफ डायवर्ट क्यों किया जा रहा है। राजनीतिक मकसद और बॉर्डर गार्ड, इनका आपस में कोई मेल नहीं है। बॉर्डर गार्ड के क्षेत्र में एक प्रशिक्षित फोर्स को जानबूझकर जोखिम में डाला जा रहा है। पुलिसिंग और बॉर्डर गार्डिंग, दोनों अलग तरह की अवधारणा हैं। एक फोर्स को उसके मूल कार्य से अलग करने के नतीजे अच्छे नहीं मिलेंगे।
बीएसएफ के एक सर्विंग आईजी ने कुछ अलग तरह का जवाब दिया है। उनका कहना है, देश की इस फोर्स को कम करके न आंका जाए। पहले भी यह फोर्स हर मोर्चे पर सफल रही है। अब पचास किलोमीटर के क्षेत्र में सीमा सुरक्षा बल को कार्रवाई का अधिकार मिला है तो वह इसमें भी खरा उतरेगा। गिरफ्तारी, तलाशी और जब्ती की शक्ति मिलने के बाद सीमा सुरक्षा बल, पाकिस्तान की तरफ से आने वाले ड्रोन के मामलों को भी अच्छे से हैंडल कर सकेगा। ड्रग्स और हथियारों का स्थानीय सौदागर कौन है, उनके पीछे का गठजोड़, सुरक्षा बलों के लिए इस कड़ी तक पहुंचने की संभावना बन जाएगी।
बीएसएफ की नई ड्यूटी को पांच तरीके से समझा सकता है...
बीएसएफ के रिटायर्ड एडीजी और बॉर्डर सिक्योरिटी मामलों के एक्सपर्ट एसके सूद कहते हैं, बीएसएफ की नई ड्यूटी को पांच तरीके से समझें...
- पहला, बीएसएफ के पास लोकल पुलिसिंग में काम आने वाले संसाधन नहीं हैं। बल के पास पुलिसिया ट्रेनिंग का अभाव है। हमारे जवानों के पास जो अनुभव है, वह बॉर्डर गार्डिंग का है। यह बल स्थानीय अपराध रोकने में विशेषज्ञ नहीं हैं। अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई को लेकर टकराव की आशंका बनी रहेगी।
- दूसरा, सघन जनसंख्या के बीच पुलिसिंग की ड्यूटी देना, ये सब बॉर्डर गार्ड फोर्स के लिए आसान नहीं है। स्थानीय अपराधियों का नेटवर्क रहता है। ऐसी खबरें समय समय पर मिलती रहती हैं, जिनमें कथित तौर पर पुलिस और अपराधियों की सांठगांठ होने की बात सामने आती है।
- तीसरा, सीमा सुरक्षा बल के पास पहले भी इस तरह की शक्ति रही है, लेकिन उसके लिए जनसंख्या घनत्व को देखा जाता था। इस तरह से बॉर्डर गार्ड फोर्स के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाना व उसे कार्रवाई का अधिकार देना, इससे कोई व्यावहारिक उपयोगिता हासिल हो सकेगी, इसमें संदेह है।
- चौथा, सबसे बड़ी बात है कि जिन क्षेत्रों में यह शक्ति दी गई है, वहां सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम, लागू नहीं है। ऐसी स्थिति में बीएसएफ को बिना किसी ट्रेनिंग के पुलिस बनना पड़ेगा। इसके परिणाम अच्छे नहीं मिलेंगे। अतीत में पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में महज चार किलोमीटर तक पीछे जाने पर भी बीएसएफ जवानों पर हमले होते रहे हैं।
- पांचवां, बीएसएफ को यह शक्ति मिलने के बाद अपना इंटेलिजेंस सिस्टम बढ़ाना पड़ेगा। इसके लिए अतिरिक्त बजट, मैनपावर और तकनीकी संसाधन जुटाने होंगे। ये सब इतना आसान नहीं होगा। बॉर्डर गार्ड फोर्स के पास फोन इंटरसेप्ट करने की पावर भी नहीं है। लोकल पुलिसिंग में अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए यह सुविधा कारगर साबित होती है।
'ड्रोन' के चलते गृह मंत्रालय ने उठाया कदम
केंद्रीय गृह मंत्रालय का दावा है कि सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स के पैकेट गिराए जा रहे हैं, ऐसी घटनाओं ने बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र में विस्तार करने के लिए प्रेरित किया है। पिछले दिनों जम्मू कश्मीर, पंजाब और दूसरे इलाकों में सीमा पार से आने वाले ड्रोन हमलों ने खासी हलचल मचा दी थी। जम्मू-कश्मीर में एयरपोर्ट और सैन्य प्रतिष्ठानों को ड्रोन की मदद से निशाना बनाने का प्रयास किया गया। नई अधिसूचना के अनुसार, बीएसएफ को दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), पासपोर्ट अधिनियम और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम के तहत यह कार्रवाई करने का अधिकार मिला है। हालांकि, गुजरात में बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को कम कर दिया गया है। वहां पहले यह सीमा 80 किमी थी, जो अब कम होकर 50 किमी रह गई है।
पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा है, मैं अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगे 50 किलोमीटर के दायरे में बीएसएफ को अतिरिक्त अधिकार देने के सरकार के एकतरफा फैसले की कड़ी निंदा करता हूं, जो संघवाद पर सीधा हमला है। मैं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस तर्कहीन फैसले को तुरंत वापस लेने का आग्रह करता हूं।